दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 मंजिला PG गिरा: 3 की मौत, 9 का रेस्क्यू
दिल्ली के मोतीबाग में 'हॉस्टल डेज' नाम की पांच मंजिला पीजी इमारत ढही। मलबे के नीचे से छात्रों ने लगाई मदद की गुहार। NDRF और पुलिस का महा-रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
PG Hostel Collapsed:दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां 75 बेड वाली एक 6 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में अब तक कम से कम 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 अन्य की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। मलबे से अब तक 9 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कई अन्य के अब भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है।
घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ (NDRF), दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस (DFS) और डीडीएमए (DDMA) की संयुक्त टीमों ने फायर टेंडर्स और कैट्स (CATS) एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
हादसे का पूरा घटनाक्रम और ग्राउंड ज़ीरो की स्थिति
'हॉस्टल डेज' नाम से संचालित थी इमारत: स्थानीय लोगों के मुताबिक, ढहने वाली यह 5 मंजिला इमारत 'हॉस्टल डेज' नाम से एक बॉयज पीजी के रूप में चलाई जा रही थी, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र कमरा लेकर रह रहे थे। इमारत के गिरने से भारी मात्रा में कंक्रीट और लोहे का मलबा सड़क पर फैल गया, जिसके चलते पड़ोस की एक अन्य इमारत का मुख्य प्रवेश द्वार भी पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
दोपहर 1:34 बजे मिली पीसीआर कॉल: दिल्ली पुलिस के अनुसार, साउथ कैंपस थाने में दोपहर करीब 1:34 बजे नानकपुरा गुरुद्वारे के पास इमारत जमींदोज होने की आपातकालीन सूचना (PCR Call) मिली। कॉल मिलते ही स्थानीय पुलिस की गाड़ियां, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और कैट्स एम्बुलेंस मौके की ओर रवाना हुईं।
मलबे के नीचे से छात्रों के फोन कॉल: प्रत्यक्षदर्शियों ने रोंगटे खड़े कर देने वाला मंज़र बयां करते हुए बताया कि जब इमारत गिरी, तब अधिकांश छात्र अपने-अपने कमरों में मौजूद थे। मलबे के नीचे फंसे कुछ छात्र अंदर से अपने मोबाइल फोन के जरिए बाहर खड़े लोगों और दोस्तों को कॉल कर मदद की गुहार लगा रहे हैं।
2 लोगों को बाहर निकाला गया: बचाव दलों ने मलबे से अब तक 2 घायल व्यक्तियों को जीवित बाहर निकाल लिया है। उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार देकर पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
राहत और बचाव कार्य: गैस कटर और भारी मशीनों से मलबा हटाने का काम तेज
हादसे की भयावहता को देखते हुए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) की विशेष टीम को मौके पर तैनात किया गया है:
सावधानीपूर्वक रेस्क्यू: मलबे में छात्रों के दबे होने के कारण बचाव दल बेहद सतर्कता से काम कर रहे हैं। कंक्रीट के बड़े स्लैब को हटाने के लिए भारी क्रेन और लोहे की छड़ों को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इमरजेंसी कॉरिडोर: घटनास्थल के आसपास भीड़ को नियंत्रित करने और एम्बुलेंस की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को कॉर्डन ऑफ (सील) कर दिया है।
प्रशासन और सरकार की प्राथमिकता: जीवन रक्षा और छात्रों की गिनती
हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और दिल्ली सरकार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं:
पहली प्राथमिकता जान बचाना: प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि इस वक्त सर्वोच्च प्राथमिकता मलबे में फंसे हर एक छात्र को सकुशल बाहर निकालना और घायलों को त्वरित चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराना है। भाजपा के स्थानीय विधायक अनिल कुमार शर्मा का कहना है कि अंदर कितने छात्र फंसे हैं, सही संख्या नहीं मालूम लेकिन यहाँ छात्र फंसे हुए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री से भी बात हुई है और हम सबका प्रयास जल्द से जल्द अंदर फंसे छात्रों को बाहर निकालना है.
हॉस्टल रजिस्टर से हो रही पड़ताल: अंदर फंसे छात्रों की वास्तविक संख्या को लेकर अभी संशय बना हुआ है। प्रशासन हॉस्टल संचालक के रजिस्टर और कमरों के रिकॉर्ड को खंगाल रहा है ताकि यह सटीक जानकारी मिल सके कि रविवार की दोपहर हादसे के वक्त कुल कितने छात्र हॉस्टल के अंदर मौजूद थे।
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