ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा! चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा मार्च
चुनाव आयोग के SIR सॉफ्टवेयर में हेराफेरी और लाखों वोट काटे जाने के विरोध में वामपंथी संगठनों और SKM का दिल्ली में मार्च। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली का ऐलान।
Zamini Haqiqat: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से वोट चोरी और वोटर लिस्ट में हेराफेरी के आरोपों को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। बुधवार को वामपंथी छात्र संगठनों (AISA, KYS) और कई अन्य नागरिक अधिकार संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इलेक्शन कमीशन की ओर पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) सॉफ्टवेयर में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। उनका कहना है कि यह एक 'तानाशाही' रवैया है, जो जनतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके पद से बर्खास्त किया जाए। उनका कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका यह आंदोलन पूरे देश में जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस ने धारा 163 लगाकर प्रदर्शनकारियों को अशोक रोड पर ही रोक दिया है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कड़े आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयुक्त ने कई कानूनों का उल्लंघन किया है। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार की छुट्टी नहीं होती, वे भी छुट्टी नहीं लेंगे। इसे 'मनुस्मृति की सरकार' करार देते हुए कहा गया कि यह सरकार महिलाओं की भागीदारी वाले आंदोलनों को रोकना चाहती है। देश भर के जिला मुख्यालयों पर भी इस तरह के मार्च निकाले जा रहे हैं।
SIR सॉफ्टवेयर में हेराफेरी के गंभीर आरोप
आंदोलन का मुख्य कारण 'एसआईआर' (SIR) सॉफ्टवेयर को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस सॉफ्टवेयर का एक्सेस डीएम और एडीएम स्तर के अधिकारियों के पास भी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 10,000 बोगस (फर्जी) वोटर पकड़े गए हैं। साथ ही, चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में पश्चिम बंगाल के लिए 'स्पेशल लॉक' लगे होने के दावे भी किए जा रहे हैं। यूपी के सीईओ द्वारा भी वोटर लिस्ट में हजारों झूठे नाम शामिल होने की बात मानने का दावा किया गया है।
पुलिस बैरिकेडिंग और धारा 163
प्रदर्शनकारियों को कालीबाड़ी मार्ग से गोल डाकखाना होते हुए चुनाव आयोग की तरफ जाना था। लेकिन पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें अशोक रोड पर ही रोक दिया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा की कि इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पहले धारा 144) लागू है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जमावड़ा गैरकानूनी है और इससे आपातकालीन सेवाओं में बाधा आ रही है। जगह खाली न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिग्गज नेताओं की भागीदारी
इस विरोध प्रदर्शन में योगेंद्र यादव, वृंदा करात और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेता भी शामिल हुए। वामपंथी नेता वृंदा करात ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घुसपैठियों की आड़ में महिलाओं और गरीबों के वोट चुराए जा रहे हैं। एसकेएम नेता ने बताया कि 12 अक्टूबर को करनाल में हुई बैठक में यह तय किया गया था कि 23 अक्टूबर को पूरे देश में प्रतिरोध किया जाएगा।
प्रवासी मजदूरों के वोट कटने का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि अकेले दिल्ली में 47 लाख वोट काटे गए हैं। इनमें सबसे बड़ा तबका औद्योगिक और प्रवासी मजदूरों का है। आरोप है कि करीब 35 प्रतिशत प्रवासी मजदूरों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं। अगर कोई मजदूर बिहार या बंगाल का है और दिल्ली में काम करता है, तो उसका नाम गृह राज्य से काट दिया जाता है, लेकिन काम करने वाली जगह पर जोड़ा नहीं जाता।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ बदसलूकी के भी आरोप लगाए गए हैं। एसकेएम और अन्य संगठनों ने अब चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक बहुत बड़ी रैली की जाएगी। इस रैली में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेता और देश भर के अन्य संगठन भी शामिल होंगे। प्रदर्शनकारियों का संकल्प है कि वे 13 करोड़ मतदाताओं के वोट बहाल होने तक अपना 'गली-गली जंतर-मंतर' आंदोलन जारी रखेंगे।
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