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साकेत थाने में महिला पत्रकारों से बर्बरता! 'राजपथ' में बड़ा खुलासा

दिल्ली के साकेत थाने में महिला पत्रकारों शाहीन और नफ़ीसा ख़ान पर कथित पुलिसिया अत्याचार। 'राजपथ' शो में संजय शर्मा ने की CCTV फुटेज जारी करने की मांग।


Rajpath: द फ़ेडरल देश के खास कार्यक्रम 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने राजधानी दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन के भीतर दो युवा महिला पत्रकारों शाहीन और नफ़ीसा ख़ान के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट, अवैध हिरासत और धार्मिक पहचान पूछकर किए गए टॉर्चर के गंभीर आरोपों की ग्राउंड पड़ताल की। मामले को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में 4PM के संपादक संजय शर्मा और दोनों पीड़ित पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस की भूमिका, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन और व्यवस्थागत नफरत पर कई तीखे व झकझोरने वाले सवाल खड़े किए हैं।


1. थाने के भीतर 45 मिनट का कथित टॉर्चर: धार्मिक पहचान और लाठियों का तांडव
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपबीती सुनाते हुए पत्रकार शाहीन और नफ़ीसा ख़ान ने बताया कि उन्हें 'घर छोड़ने' के बहाने धोखे से साकेत थाने ले जाया गया, जहां उनके साथ अमानवीय बर्बरता की गई:

फोन जब्ती और हिंसा की शुरुआत: थाने में एसएचओ (SHO) के कमरे से दोनों पत्रकारों को घसीटा गया। महिला पुलिसकर्मी सोनम पर आरोप है कि उसने पत्रकारों के चेहरे पर लगातार चांटे मारे और फोन छीनने की कोशिश की।

पहचान देखकर बढ़ा आक्रोश: शाहीन के फोन की स्क्रीन पर एक नंबर और नाम देखकर जब पुलिसकर्मियों को उनकी मुस्लिम पहचान का पता चला, तो उनका व्यवहार अत्यधिक आक्रामक हो गया। गालियां देते हुए लाठियां मंगवाई गईं और बेरहमी से पिटाई की गई।

'तुम्हें प्यासा मारूंगी': गंभीर चोटों के चलते जब नफ़ीसा बेहोश होने लगीं और पीने के लिए पानी मांगा, तो पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से कहा कि 'तुम्हें प्यासा मारेंगे।'

हथकड़ी लगे अपराधी के साथ कस्टडी
: सुप्रीम कोर्ट की सख्त रूलिंग है कि महिला बंदियों या पीड़ितों को पुरुष बंदियों के साथ नहीं रखा जा सकता। इसके बावजूद नफ़ीसा को एक ऐसे कमरे में सोफे पर डाला गया जहां हथकड़ी लगा एक अन्य अपराधी पहले से मौजूद था और पुलिस उसे खाना खिला रही थी।

2. हाथ में संविधान लेकर नफ़ीसा का सवाल: 'हमारा गुनाह क्या था?'
पत्रकार नफ़ीसा ख़ान ने प्रेस वार्ता के दौरान हाथ में बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा रचित भारत के संविधान की प्रति लहराते हुए व्यवस्था से सीधा सवाल किया:

लोकतंत्र और पेशे पर सीधा हमला: नफ़ीसा ने कहा कि उनका एकमात्र "गुनाह" यह था कि वे भारतीय मुस्लिम महिला पत्रकार हैं जो सिस्टम से तीखे सवाल पूछती हैं। यह मारपीट केवल दो महिलाओं पर हमला नहीं, बल्कि संविधान, स्वतंत्र पत्रकारिता और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर सीधा प्रहार है।

एसएचओ की धमकी: आरोप लगाया गया कि एसएचओ ने लॉकअप में बंद करने और मनगढ़ंत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की धमकियां दीं।

24 घंटे बाद भी एफआईआर नहीं
: दोनों पत्रकारों ने बताया कि घटना को 24 घंटे से अधिक का समय बीत जाने और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम दिए जाने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की।

3. संजय शर्मा का अल्टीमेटम: 'सीसीटीवी फुटेज जारी करे दिल्ली पुलिस'
4PM के संपादक संजय शर्मा ने दिल्ली पुलिस के रुख और प्रशासनिक चुप्पी पर कड़ा हमला बोला:

सीसीटीवी सार्वजनिक करने की चुनौती: शर्मा ने कहा कि साकेत थाने के हर कमरे और गलियारे में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अगर पुलिस खुद को निर्दोष मानती है, तो 45 मिनट के उस घटनाक्रम का फुटेज सार्वजनिक करे।

डिलीट किया गया ट्वीट: घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वीआईपी मूवमेंट का हवाला देकर लड़कियों को पूछताछ के लिए थाने लाने का ट्वीट किया था, जिसे भारी जनआक्रोश के बाद डिलीट कर दिया गया। संजय शर्मा ने इसे पुलिस द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने का सीधा प्रमाण बताया।

हाईकोर्ट जाने की चेतावनी: उन्होंने मांग की कि साकेत थाने के दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाए और पूरे थाने के स्टाफ को निष्पक्ष जांच पूरी होने तक हटाया जाए। मांग पूरी न होने पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करने की घोषणा की गई।


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