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गंगा एक्सप्रेस-वे पर चादर का खेल! फर्जी NSA एक्ट पर DM की सैलरी से कटेगा जुर्माना

राजपथ: 36 हजार करोड़ के गंगा एक्सप्रेस-वे पर 7 फीट गड्ढे पर चादर! DU छात्रा पर फर्जी NSA मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, नोएडा DM के वेतन से कटेगा हर्जाना।


Rajpath: द फ़ेडरल देश के खास कार्यक्रम 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने व्यवस्था की पोल खोलने वाले दो बड़े और बेहद गंभीर मामलों का तीखा विश्लेषण किया है। पहले खंड में उत्तर प्रदेश के नव-निर्मित 36 हज़ार करोड़ के गंगा एक्सप्रेस-वे पर 7 फीट गहरे गड्ढे को चादर से ढकने की शर्मनाक लापरवाही उजागर की गई, वहीं दूसरे खंड में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी पर लगाए गए फर्जी एनएसए (NSA) को खारिज करते हुए नोएडा डीएम मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये हर्जाना काटने के ऐतिहासिक आदेश की पड़ताल की गई।


1. 36 हज़ार करोड़ का गंगा एक्सप्रेस-वे: 7 फीट गहरा पाताल लोक और उस पर बिछी 'चादर'
नितिन गडकरी के 'अमेरिका जैसी सड़कें' बनाने के दावों और 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए लोकार्पण के कुछ ही हफ्तों बाद 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे पर भ्रष्टाचार का स्याह चेहरा सामने आया है।

लापरवाही की इंतहा: उन्नाव के बशीरतगंज टोल प्लाजा के पास प्रयागराज जाने वाली लेन पर सड़क अचानक धंस गई और करीब 7 फीट गहरा जानलेवा गड्ढा हो गया।

इंजीनियरिंग का 'चादर मॉडल': तकनीकी मरम्मत, बैरिकेडिंग या डामर डालने के बजाय ठेकेदारों और कर्मचारियों ने गड्ढे को छुपाने के लिए उस पर पुरानी 'चादर' और 'शॉल' बिछा दी, जिससे कोई भी वाहन सीधे हादसे का शिकार हो सकता था।

टोल वसूली जारी: 36 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा नदारद है, लेकिन यात्रियों की जेब से पूरा टोल काटा जा रहा है। वीडियो वायरल होने और भारी जनआक्रोश के बाद आनन-फानन में मिट्टी-गिट्टी भरकर लीपापोती की गई।

2. DU छात्रा पर फर्जी NSA: इलाहाबाद हाईकोर्ट का तमाचा, नोएडा DM के वेतन से कटेगा 5 लाख हर्जाना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासनिक तंत्र द्वारा रची गई एक मनगढ़ंत और फर्जी कहानी की धज्जियां उड़ाते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की छात्रा आकृति चौधरी पर लगे कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को रद्द कर दिया है।

फर्जी स्क्रिप्ट का भंडाफोड़: नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को हुए मजदूर प्रदर्शन और पथराव का मास्टरमाइंड आकृति चौधरी को बताया गया था। लेकिन कोर्ट ने जब पुलिस की जनरल डायरी (GD) की जांच की, तो सामने आया कि पुलिस आकृति को 11 अप्रैल को ही मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार कर चुकी थी। जो छात्रा 11 अप्रैल से जेल में बंद थी, वह 13 अप्रैल को दंगा कैसे भड़का सकती थी?

सबूत गायब, वकील निरुत्तर: पुलिस कमिश्नर द्वारा कैमरे पर "पक्के इलेक्ट्रॉनिक वीडियो सबूत" और "1 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग" के किए गए दावों पर जब कोर्ट ने साक्ष्य मांगे, तो पुलिस के पास एक भी पुख्ता सबूत नहीं था।

ऐतिहासिक सजा: कोर्ट ने 5 महीने तक निर्दोष छात्रा को जेल में रखने पर कड़ा रुख अपनाते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। सबसे अहम बात यह है कि यह राशि सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि नोएडा की डीएम मेधा रूपम के वेतन से काटी जाएगी।

पत्रकार पर भी शिकंजा: इसी मामले में पत्रकार सत्यम वर्मा को भी 17 अप्रैल को हिरासत में लेकर कागजों में 19 अप्रैल की गिरफ्तारी दिखाकर एनएसए लगाया गया था।


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