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जंतर-मंतर से ग्राउंड रिपोर्ट: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महासंग्राम, पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को किया डिटेन!

जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि किसी भी आम नागरिक का आवागमन मुश्किल हो गया था। पुलिस बल के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भारी टुकड़ियों को तैनात किया गया था।


2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक अभेद्य किले और राजनीतिक संग्राम के केंद्र में तब्दील हो गया। हमारी टीम द फेडरल देश के प्रतिनिधि के रूप में सीधे ग्राउंड पर मौजूद थी और हमने आँखों देखी ज़मीनी हकीकत का जायजा लिया। जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर सुरक्षा बलों की भारी नाकेबंदी के बीच पुलिस प्रशासन का सख्त रुख साफ़ दिखाई दे रहा था। हमने अपनी आँखों से देखा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने पहुँचे युवा छात्रों और जेन ज़ी (Gen Z) के प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने बेहद सख्ती के साथ खदेड़ा और जबरन बसों में भरकर डिटेन किया।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया का विरोध

इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया थी। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों का गंभीर आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा पुनरीक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ी की जा रही है। उनका दावा है कि देश भर में लाखों वैध और असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से जानबूझकर हटा दिए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

विपक्ष और छात्र संगठनों का साझा मंच

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष और युवा छात्र शक्ति का एकजुट रूप देखने को मिला। आम आदमी पार्टी (AAP), वामपंथी दलों (CPI-M) के साथ-साथ प्रमुख छात्र संगठन—आइसा (AISA), एसएफआई (SFI) और एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ता और छात्र नेता भारी तादाद में जंतर-मंतर की ओर बढ़े।

जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के दफ्तर की तरफ बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। इस पुलिस कार्रवाई के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, आप नेता सौरभ भारद्वाज, वामपंथी नेता एमए बेबी और वृंदा करात समेत 700 से अधिक नेताओं और छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।

छावनी में तब्दील लुटियंस दिल्ली, मेट्रो स्टेशन बंद

जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि किसी भी आम नागरिक का आवागमन मुश्किल हो गया था। पुलिस बल के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भारी टुकड़ियों को तैनात किया गया था। बहुस्तरीय बैरिकेड्स और ड्रोन से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही थी। एहतियात के तौर पर DMRC ने आसपास के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेटों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया, जिससे आम यात्रियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

जमीनी हकीकत: उठते बड़े सवाल

ग्राउंड ज़ीरो से मिली तस्वीरें और जमीनी हकीकत यह बयां करती हैं कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर उठी यह राजनीतिक और सामाजिक चिंगारी अब केवल नेताओं के बयानों तक सीमित नहीं है। सड़कों पर छात्रों और युवाओं की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि निष्पक्ष चुनाव और मताधिकार की सुरक्षा को लेकर देश के नागरिकों में भारी असंतोष है। अब देखना यह होगा कि 700 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी और इस महाआंदोलन के बाद सरकार और चुनाव आयोग क्या कदम उठाते हैं।

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