कैंपस के बाहर लड़कियों से अश्लील हरकतें! LSR की पूर्व छात्रा का खुलासा
आस्था कुंज गैंगरेप के बाद लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्राओं का पैदल मार्च। 'द फ़ेडरल देश' के शो ज़मीनी हकीकत में जानिए दिल्ली में महिला सुरक्षा की असली स्थिति।
Zamini Hakikat: राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और लचर सुरक्षा व्यवस्था के विरोध में लेडी श्रीराम (LSR) कॉलेज की छात्राओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। हाल ही में साउथ ईस्ट दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में एक छात्रा के साथ हुए खौफनाक सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद, LSR की छात्राओं ने अपने परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर एक बड़ा विरोध-प्रदर्शन और पैदल मार्च निकाला। 'द फ़ेडरल देश' के विशेष कार्यक्रम 'ज़मीनी हकीकत' की ग्राउंड रिपोर्ट में छात्राओं ने साफ किया कि महिला सुरक्षा कोई 'सुविधा' (Privilege) नहीं, बल्कि उनका बुनियादी और कानूनी अधिकार है। कॉलेज के बैक गेट से शुरू हुआ यह मार्च अमर कॉलोनी थाने के सामने से होते हुए वापस कॉलेज के मुख्य द्वार पर समाप्त हुआ।
'5 साल में कुछ नहीं बदला': एलुमनाई और छात्राओं का दर्दनाक खुलासा
प्रदर्शन के दौरान 'द फ़ेडरल न्यूज़' से खास बातचीत करते हुए कॉलेज की पूर्व छात्रा आन्या (वर्ष 2021 पास-आउट), जो वर्तमान में एक वकील हैं और अपना NGO चलाती हैं, ने परिसर के आसपास की जमीनी हकीकत उजागर की। आन्या ने बताया कि जब वे 5 साल पहले इस कॉलेज में पढ़ती थीं, तब भी बैक लेन और पीजी वाले रास्तों पर सुरक्षा का यही गंभीर संकट था।
उन्होंने बताया कि शाम ढलते ही कॉलेज के बैक लेन में लाइट्स की कमी का फायदा उठाकर अज्ञात लोग और अधेड़ उम्र के पुरुष लड़कियों को देखकर खुलेआम अश्लील हरकतें (मास्टरबेट) करते हैं। आन्या ने कहा, "समस्या केवल एडमिनिस्ट्रेशन से नहीं है, बल्कि उन तमाम लोगों से है जिनके हाथ में बदलाव करने की पावर है लेकिन वे इसे कोई महत्वपूर्ण मुद्दा ही नहीं मानते। कैंपस के अंदर भले ही छात्राएं सुरक्षित महसूस करें, लेकिन बाहर निकलते ही माहौल बेहद असुरक्षित हो जाता है।"
शो-पीस बना 'पिंक बूथ' और लचर पुलिस व्यवस्था
विरोध मार्च में शामिल LSR की वर्तमान छात्रा अदिति ने पुलिस प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाईं। अदिति ने बताया कि कॉलेज के बैक गेट के पास पुलिस ने 'पिंक बूथ' तो बना रखा है, लेकिन उसमें कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहता। यह पिंक बूथ सिर्फ एक ढांचा बनकर रह गया है, जिसका कोई व्यावहारिक लाभ छात्राओं को नहीं मिल रहा है।
छात्राओं का आरोप है कि जब भी दिल्ली में कोई बड़ी वारदात या रेप/गैंगरेप की घटना होती है, तब पुलिस और प्रशासन कुछ दिनों के लिए गश्त बढ़ा देता है। लेकिन कुछ ही समय बाद सब कुछ फिर से 'राम भरोसे' छोड़ दिया जाता है।
छात्राओं की तीन मुख्य मांगें
'ज़मीनी हकीकत' शो के दौरान छात्राओं ने प्रशासन और दिल्ली पुलिस के सामने अपनी तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं:
इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार: कॉलेज के बैक लेन, आस्था कुंज पार्क के पास और पीजी की तरफ जाने वाली गलियों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट्स और हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जाएं।
पिंक बूथ पर नियमित तैनाती: पिंक बूथों को तुरंत सक्रिय किया जाए और वहां महिला पुलिसकर्मियों की चौबीसों घंटे तैनाती सुनिश्चित की जाए।
स्थायी पुलिस गश्त: किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पुलिस और पीसीआर (PCR) वैन की नियमित व स्थायी गश्त बढ़ाई जाए।
'नारी मुक्ति जिंदाबाद' के नारों से गूंजीं दिल्ली की सड़कें
पैदल मार्च के दौरान छात्राओं के हाथों में कई संदेशात्मक तख्तियां (Placards) दिखीं, जिन पर लिखा था; 'नारी मुक्ति जिंदाबाद', 'Refuse Rapists' और 'Reclaim The Streets'। छात्राएं पुलिस सुरक्षा के बीच आगे बढ़ती रहीं और लगातार नारे लगाती रहीं। हालांकि, कई छात्राओं ने मीडिया से सीधे बात करने से परहेज किया और कहा कि वे बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के अपने स्तर पर अपनी सुरक्षा की यह लड़ाई लड़ रही हैं।
निष्कर्ष और बड़ा सवाल
दिल्ली पुलिस ने आस्था कुंज पार्क मामले में एक आरोपी को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार जरूर कर लिया है, लेकिन LSR की छात्राओं का यह प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि जमीनी स्तर पर खौफ का माहौल खत्म नहीं हुआ है। सवाल यह उठता है कि क्या देश की राजधानी में छात्राओं को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ हर दिन सड़कों पर सुरक्षित चलने के लिए भी यूं ही संघर्ष करना पड़ेगा?
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