
मेडिकल स्टोर पर CCTV अनिवार्य करने की तैयारी, सरकार का नया ड्राफ्ट; जानिए क्या बदलेगा
केंद्र सरकार ने मेडिकल स्टोर्स पर CCTV निगरानी अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत दवाओं की बिक्री और संबंधित गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जा सकती है। यह फिलहाल ड्राफ्ट प्रस्ताव है और सरकार ने इस पर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शेड्यूल H, H1 और X की दवाएं बेचने वाले मेडिकल स्टोर पर अनिवार्य CCTV निगरानी लागू करके, कुछ खास प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं पर सख्त रेगुलेटरी निगरानी का प्रस्ताव रखा है।
जहां शेड्यूल H में प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की एक बड़ी रेंज आती है, वहीं शेड्यूल H1 में ऐसी कुछ दवाएं शामिल हैं जिनके लिए अतिरिक्त निगरानी और रिकॉर्ड रखने की ज़रूरत होती है। शेड्यूल X में ज़्यादा सख्ती से रेगुलेट की जाने वाली दवाओं का समूह आता है।
नया कानून अभी ड्राफ़्ट के चरण में है
इस प्रस्ताव का मकसद इन दवाओं की बिक्री और वितरण की निगरानी को मज़बूत करना और बिना सही प्रिस्क्रिप्शन के इनकी बिक्री को रोकना है। हालाँकि, CCTV लगाने का प्रस्तावित नियम अभी कोई कानून या अनिवार्य शर्त नहीं है। यह अभी एक ड्राफ़्ट नोटिफ़िकेशन का हिस्सा है, और सरकार ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले संबंधित लोगों और आम जनता से आपत्तियाँ और सुझाव माँगे हैं।
मंत्रालय ने नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए, 8 सितंबर, 2026 की ड्राफ्ट गजट नोटिफिकेशन G.S.R. 791(E) के ज़रिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है।
सरकार CCTV से निगरानी क्यों करना चाहती है?
मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन का मकसद शेड्यूल H, H1 और X वाली दवाओं की अनधिकृत बिक्री और उन तक अनधिकृत पहुंच से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है। इन कैटेगरी में डॉक्टर की सलाह पर मिलने वाली वे दवाएं शामिल हैं, जिन पर अलग-अलग स्तर का रेगुलेटरी कंट्रोल होता है।
सरकार का कहना है कि मेडिकल स्टोर पर CCTV निगरानी एक अतिरिक्त रेगुलेटरी सुरक्षा उपाय का काम करेगी।
इस प्रस्तावित सिस्टम का मकसद इन दवाओं की रिटेल बिक्री में पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहतर बनाना और फ़ार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में निगरानी को मज़बूत करना है।
DTAB की मंज़ूरी के बाद प्रस्ताव को मंज़ूरी मिली
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस मामले पर सबसे पहले ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) ने विचार-विमर्श किया था।
इसके बाद, इस प्रस्ताव को ड्रग्स टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड (DTAB) के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के लिए भेजा गया। प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद, DTAB ने इसे मंज़ूरी देने की सिफारिश की।
मंत्रालय ने अब प्रस्तावित संशोधन को ड्राफ्ट गैज़ेट नोटिफ़िकेशन के ज़रिए स्टेकहोल्डर्स और आम जनता के सामने रखा है।
शेड्यूल H, H1 और X दवाएं क्या हैं?
शेड्यूल H दवाएं प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की एक बड़ी कैटेगरी हैं। इनमें आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं शामिल हैं, जैसे कि कुछ एंटीबायोटिक्स, हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं और स्टेरॉयड। इन दवाओं को रिटेल में बेचने के लिए आम तौर पर रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के प्रिस्क्रिप्शन की ज़रूरत होती है।
शेड्यूल H1 में ऐसी दवाएं शामिल हैं जिनके लिए नियम अतिरिक्त निगरानी की ज़रूरत बताते हैं। इस कैटेगरी में कुछ एंटीबायोटिक्स, एंटी-ट्यूबरकुलोसिस दवाएं और ऐसी अन्य दवाएं शामिल हैं जिनके गलत या अनुचित इस्तेमाल को लेकर नियम बनाने की ज़रूरत है।
शेड्यूल X ज़्यादा कड़ाई से नियंत्रित श्रेणी है। इसमें कुछ ऐसी दवाएँ और पदार्थ शामिल हैं जिनकी बिक्री, भंडारण और रिकॉर्ड रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की ज़रूरत होती है।
किसी खास दवा का वर्गीकरण 'ड्रग्स रूल्स' (दवा संबंधी नियमों) और उसके बाद हुए संशोधनों के लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है।
मंत्रालय ने सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं
खास बात यह है कि मेडिकल स्टोर को यह ध्यान रखना चाहिए कि सरकार ने अभी सिर्फ़ बदलाव का प्रस्ताव रखा है, न कि इस चरण में CCTV निगरानी लागू करने का आदेश दिया है।
यह नोटिफ़िकेशन एक ड्राफ़्ट है और मंत्रालय ने संबंधित लोगों और आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मंगाए हैं। सुझाव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी (ड्रग्स) को भेजे जा सकते हैं।
इस बातचीत की प्रक्रिया से फ़ार्मेसी, फ़ार्मास्युटिकल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों, हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स और आम जनता को यह मौका मिलता है कि वे प्रस्तावित बदलाव को अंतिम रूप दिए जाने से पहले अपनी चिंताएं ज़ाहिर कर सकें या बदलाव का सुझाव दे सकें।
सरकार नियम बनाने की प्रक्रिया के तहत मिले फीडबैक पर विचार करेगी। अगर संशोधन को आखिरकार मंज़ूरी मिल जाती है और उसकी सूचना जारी की जाती है, तो उस अंतिम सूचना में सटीक ज़रूरतों और उस तारीख़ के बारे में बताया जाएगा, जब से नए नियम लागू होंगे।

