UPI पर MDR को लेकर घमासान, जयराम रमेश का ‘NOTA’ तंज; RBI ने बताया क्यों जरूरी
UPI के कुछ बड़े बिजनेस ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं RBI ने सरकार के फैसले का बचाव किया है।
UPI से भुगतान करने वालों के लिए अब 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ कारोबारी UPI भुगतान पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने का फैसला सरकार ने लिया है। इसी फैसले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अमेरिकी दबाव में UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था खत्म की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए MDR को लेकर ‘NOTA’ का नया अर्थ भी बताया। वहीं आरबीआई ने इस फैसले का यह कहते इसके पक्ष में कई तर्क दिए हैं।
क्या बदला है UPI में?
नई व्यवस्था के मुताबिक 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लगाया जाएगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है।
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि -MDR सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला UPI चार्ज नहीं है। - यह Merchant यानी कारोबारी और पेमेंट इकोसिस्टम के बीच लगने वाला शुल्क है।
सरकार ने साफ किया है कि आम ग्राहक के Person-to-Person यानी P2P लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। छोटे भुगतान भी चार्ज से बाहर रहेंगे। यानी किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर UPI के लिए अलग से फीस नहीं देनी होगी।
कांग्रेस ने क्यों उठाए सवाल?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश का आरोप है कि अमेरिका लंबे समय से भारत की जीरो-MDR UPI व्यवस्था पर सवाल उठाता रहा है। उनका दावा है कि अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि ने UPI के फ्री मॉडल को Visa और Mastercard जैसी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती के तौर पर देखा था।
इसी संदर्भ को आधार बनाकर कांग्रेस ने सवाल किया है कि क्या UPI पर MDR लगाने का फैसला अमेरिकी कार्ड कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का मौका देने के लिए किया गया है।
जयराम रमेश ने यह भी सवाल उठाया कि 0.4 फीसदी MDR की दर क्यों तय की गई और क्या इसका संबंध डेबिट कार्ड पर लागू MDR से है।
‘NOTA’ पर जयराम रमेश का तंज
इसी मुद्दे पर जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि उन्होंने ‘NOTA’ का अर्थ ही बदल दिया है।
कांग्रेस नेता ने NOTA को ‘Narendra's Ongoing Trump Appeasement’ के तौर पर पेश किया। यानी यह कोई आधिकारिक सरकारी शब्दावली नहीं, बल्कि कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पर किया गया राजनीतिक तंज है।
कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका के साथ व्यापार और दूसरे मुद्दों पर दबाव के बीच UPI पर MDR का फैसला किया गया है।
RBI की दलील क्या है?
RBI ने ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू करने के फैसले का समर्थन किया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, MDR से पेमेंट सिस्टम में शामिल बैंकों और दूसरी कंपनियों को टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और पेमेंट नेटवर्क में निवेश के लिए संसाधन मिलेंगे, जिससे UPI की लंबे समय तक टिकाऊ वृद्धि में मदद होगी।
RBI ने साथ ही साफ किया है कि आम यूजर्स के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और सभी Person-to-Person ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा। नया MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा और इसका मकसद UPI की लागत और उसके विस्तार के बीच संतुलन बनाना बताया गया है।
असली सवाल: बोझ आखिर किस पर पड़ेगा?
कानूनी तौर पर MDR व्यापारी पर लगाया जाता है, ग्राहक पर नहीं। लेकिन कारोबारी इस लागत को अपनी कीमतों या दूसरे कारोबारी फैसलों के जरिए आगे बढ़ाते हैं या नहीं, यह अलग सवाल है।
यानी फिलहाल सरकार की तरफ से ग्राहक पर सीधे UPI चार्ज की बात नहीं है, लेकिन MDR का कारोबारी असर किस तरह सामने आता है, यह आगे देखने वाली बात होगी।
UPI अब सिर्फ भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का बड़ा हिस्सा बन चुका है। इसलिए MDR में बदलाव का असर केवल बैंकों और पेमेंट कंपनियों तक सीमित नहीं माना जा रहा।

