अभिजीत दीपके का नया दांव, पंचायत चुनाव का 'सेमीफाइनल' और 24 लाख वोटरों को नोटिस
NEET पेपर लीक के खिलाफ 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर अनशन कर सरकार को झुकाने के बाद, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नए राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं।
देश की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। एक तरफ जहां युवाओं और छात्रों के आंदोलन ने सरकार को नीतियां बदलने पर मजबूर किया है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चुनावी गणित को लेकर सियासी गलियारों में भारी सुगबुगाहट है। आइए गहराई से समझते हैं इन तीनों बड़े मुद्दों को।
1. NEET आंदोलन की सफलता के बाद CJP का नया मिशन: 'क्या बोलती पब्लिक'
कहानी की शुरुआत 20 जून से होती है, जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर के छात्रों में जबर्दस्त गुस्सा था। छात्रों के इस असंतोष को मंच देने के लिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके अपनी टीम के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठ गए। 36 दिनों तक चले इस लंबे आंदोलन में देश के हजारों छात्र, अभिभावक और मशहूर वैज्ञानिक व पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए।
संसद मार्च पर पुलिस की लाठियों के बावजूद छात्रों का हौसला नहीं टूटा। आखिरकार तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ 25 जुलाई को यह आंदोलन समाप्त हुआ। इस बड़ी सफलता के बाद अब अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर से अपना नया राष्ट्रव्यापी अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' शुरू करने जा रहे हैं।
इस अभियान के दो मुख्य बिंदु हैं:
देशव्यापी बेरोजगारी: देश की सबसे बड़ी समस्या पर राष्ट्रीय बहस खड़ी करना।
महंगी शिक्षा और कोचिंग माफिया: शिक्षा के बाजारीकरण को रोककर सरकारी और निजी संस्थानों में व्यापक सुधार लाना।
अभिजीत दीपके का कहना है कि वे पारंपरिक चुनावी ढर्रे में नहीं फंसेंगे, बल्कि जनता के मुद्दों को सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंचाएंगे। अब देखना होगा कि क्या यह नया अभियान देश के युवाओं के सुलगते गुस्से को एक नई राजनीतिक दिशा दे पाएगा।
2. यूपी में पंचायत चुनाव का बिगुल: हाईकोर्ट के डंडे से बदला 2027 का गणित
उत्तर प्रदेश की राजनीति के बारे में कहा जाता है कि लखनऊ के तख्त का रास्ता दिल्ली से नहीं, बल्कि राज्य के गांवों की चौपालों से होकर गुजरता है। इस समय यूपी के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में जबर्दस्त खलबली मची हुई है।
जिस पंचायत चुनाव को सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के डर से टालना चाहती थी, उस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का सख्त डंडा चला है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि समय सीमा (नवंबर 2026) के भीतर चुनाव कराना सरकार की वैधानिक और संवैधानिक बाध्यता है।
2027 का 'सेमीफाइनल' क्यों हैं ये चुनाव?
सरकारी योजनाओं का लिटमस टेस्ट: ग्रामीण मतदाता यह तय करेंगे कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य हुए हैं या नहीं।
कैडर निर्माण: ग्राम प्रधान, BDC और जिला पंचायत सदस्य के रूप में जो दल जीत हासिल करेगा, उसका 2027 के लिए हर बूथ पर मजबूत कैडर तैयार हो जाएगा।
विपक्ष के लिए मौका: विपक्षी दलों के लिए यह अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का सबसे मुफीद समय है।
हाईकोर्ट के इस फैसले ने सत्ता पक्ष की टालमटोल की रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है और राज्य में चुनावी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
3. उत्तराखंड में 'नोटिस बम': 24 लाख वोटरों की जांच और सुधार की पूरी प्रक्रिया
उत्तराखंड में इन दिनों वोटर लिस्ट को लेकर भारी असमंजस का माहौल है। चुनाव आयोग ने राज्य के लगभग 24 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे हैं, जिनमें से 20 लाख से अधिक नोटिस बांटे जा चुके हैं। इससे आम जनता में यह डर फैल गया कि कहीं उनका वोट कट तो नहीं जाएगा।
क्यों भेजे गए नोटिस?
चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट की गहन जांच के दौरान 8 बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं:
माता-पिता और बच्चों की दर्ज उम्र में महज 10 से 12 साल का अंतर दिखना।
एक ही मकान या एक वोटर के नाम पर 6 से अधिक लोगों का दर्ज होना।
यदि आपके पास नोटिस आया है, तो क्या करें?
घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। रिकॉर्ड सुधारने के 3 बेहद सरल तरीके हैं:
दस्तावेज जमा करें: नाम, उम्र या रिश्ते में सुधार हेतु जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट जैसे 11 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक अपने BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को सौंपें।
बिना कागजात के सत्यापन: यदि कोई पुराना दस्तावेज उपलब्ध न हो, तो BLO खुद घर आकर जांच करेगा और ग्राम प्रधान या सभासद की पुष्टि के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगा।
ऑनलाइन/ऑफलाइन फॉर्म प्रक्रिया:
फॉर्म-6: नया नाम जोड़ने के लिए।
फॉर्म-7: नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
फॉर्म-8: किसी भी प्रकार के संशोधन (Correction) के लिए। यह प्रक्रिया ECINet ऐप के जरिए ऑनलाइन भी पूरी की जा सकती है।
उत्तराखंड में 15 सितंबर को सभी प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद अंतिम (Final) मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी।

