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हिरासत में राहुल गांधी और अखिलेश यादव, क्या विपक्ष की एकजुटता से डरी सरकार!

नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया, जहां कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया गया।


देशभर में नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। परीक्षा में धांधली से परेशान होकर जब छात्र अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे, तो उन पर पुलिस का लाठीचार्ज हुआ और आंसू गैस के गोले दागे गए। इस पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ अब राजनीति गरमा गई है।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने 7, लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास) के बाहर जोरदार धरना दिया। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर हुई बर्बर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को इस मुद्दे पर बोलने नहीं दिया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और कन्हैया कुमार जैसे नेताओं को हिरासत में ले लिया। हालांकि, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी को संसद में चर्चा कराने का आश्वासन दिया है।

मध्य प्रदेश में आंकड़ों की जादूगरी

दूसरा बड़ा मामला मध्य प्रदेश का है, जहां रोजगार के आंकड़ों में हैरान कर देने वाला 'चमत्कार' सामने आया है। दिसंबर 2025 में एमपी के रोजगार पोर्टल पर 25 लाख 95 हजार युवा पंजीकृत थे। लेकिन जून 2026 आते-आते यह आंकड़ा घटकर केवल 17 लाख 71 हजार रह गया।

यानी कागजों पर महज 6 महीने में 8 लाख युवाओं को रोजगार मिल गया! लेकिन जब सरकार से पूछा जाता है कि इसमें OBC, SC, ST और सामान्य वर्ग के कितने लोग थे, तो कोई जवाब नहीं मिलता। जमीनी हकीकत यह है कि डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के जिले रीवा और रोजगार राज्य मंत्री गौतम टेटवाल के जिले राजगढ़ में आज भी हजारों युवा भटक रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या यह वाकई रोजगार मिला है या फिर चुनाव से पहले आंकड़ों की कागजी हेराफेरी की गई है?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट सख्त

तीसरी बड़ी खबर आस्था और व्यवस्था से जुड़ी है। अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान में धांधली की खबरों पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति बंद होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब मामले की जांच किसी सीनियर IPS अफसर की अगुआई में नई SIT बनाकर कराई जाए। अदालत में चार याचिकाएं दर्ज हैं, जिनमें पूरे दान प्रबंधन का विशेषज्ञ कमेटी से ऑडिट कराने और CBI जांच कराने की मांग की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार को अब 27 जुलाई तक योग्य IPS अफसरों के नाम कोर्ट को सौंपने हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद अब यूपी सरकार के सामने 'जीरो टॉलरेंस' के दावे को साबित करने की अग्निपरीक्षा है।

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