UP से पंजाब तक बड़ा सियासी भूचाल: मायावती ने भतीजे को दिखाया बाहर का रास्ता, राहुल ने दिखाई अफसरों को सड़क
उत्तर भारत की राजनीति में इस समय तीन बड़ी खबरें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहली खबर रायबरेली की 'दिशा' बैठक से है, जहाँ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अधिकारियों और बीजेपी मंत्रियों के सामने अपनी जेब से स्मार्टफोन निकालकर टूटी-फूटी सड़कों और गड्ढों के वीडियो चला दिए। उनके इस 'डिजिटल अटैक' से PWD के अधिकारी और प्रशासन बग़लें झांकते नजर आए।
उत्तर भारत की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ उत्तर प्रदेश के रायबरेली में सरकारी समीक्षा बैठक के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला, तो वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) के अंदर पारिवारिक और राजनीतिक ड्रामा चरम पर पहुंच गया है। दूसरी तरफ, पंजाब कांग्रेस की पुरानी गुटबाजी में सचिन पायलट के आते ही बड़ा मोड़ आ गया है। आइए समझते हैं इन तीनों बड़ी खबरों की पूरी इनसाइड स्टोरी।
बीएसपी में फिर बड़ा भूचाल: ससुर ने लिया संन्यास, फिर भी मायावती ने आकाश आनंद को दिखाया बाहर का रास्ता
बहुजन समाज पार्टी यानी BSP के अंदर की कहानी किसी हाई-वोल्टेज पारिवारिक और पॉलिटिकल थ्रिलर से कम नहीं लग रही है। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में वापस लाने के लिए एक शर्त रखी थी कि उनके ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को राजनीति छोड़नी होगी।
मायावती का मानना था कि अशोक सिद्धार्थ ही आकाश आनंद के फैसलों को प्रभावित करते हैं। इस फरमान के महज 17 घंटे बाद अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक पोस्ट लिखा। उन्होंने लिखा, "संन्यास तो बहुत छोटी बात है, मैं बहनजी के लिए जान भी दे सकता हूं। उनके आदेश के आगे परिवार और रिश्ते सब छोटे हैं।"
दो घंटे बाद मायावती के ट्वीट से हड़कंप
अशोक सिद्धार्थ की इस घोषणा के बाद समर्थकों को लगा कि आकाश आनंद का 'वनवास' खत्म हो जाएगा। लेकिन दो घंटे बाद ही मायावती के एक ट्वीट ने सबको चौंका दिया। मायावती ने लिखा कि आकाश आनंद को अपने ससुर से ज्यादा लगाव है और वह पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आकाश अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से आजाद किया जाता है।
पर्दे के पीछे की अंदरूनी जंग
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विवाद के पीछे बीएसपी के अंदर चल रही वर्चस्व की लड़ाई भी एक बड़ी वजह है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं और अशोक सिद्धार्थ के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। आरोप है कि वरिष्ठ नेताओं ने मायावती को यह समझाया कि अशोक सिद्धार्थ, आकाश के जरिए पार्टी पर नियंत्रण करना चाहते हैं।
अगर आकाश आनंद के राजनीतिक ग्राफ को देखें, तो पिछले तीन सालों में उन्हें कई बार पद सौंपे गए और फिर हटाया गया:
10 दिसंबर 2023: मायावती ने आकाश आनंद को आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित किया।
07 मई 2024: बयानबाजी के चलते 'अपरिपक्व' बताकर पद से हटाया।
23 जून 2024: 47 दिन बाद फिर नेशनल को-ऑर्डिनेटर बनाया।
02 मार्च 2025: फिर से सभी जिम्मेदारियां छीन ली गईं।
03 मार्च 2025: पहली बार पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया।
18 मई 2025: माफी के बाद दोबारा चीफ नेशनल को-ऑर्डिनेटर बनाया।
29 अगस्त 2025: 'राष्ट्रीय संयोजक' का नया पद सौंपा।
03 सितंबर 2026: 'कम परिपक्व' बताकर पद से फिर हटाया।
10 सितंबर 2026: पार्टी से हमेशा के लिए पूरी तरह बेदखल कर दिया।
बार-बार के इस फेरबदल से न सिर्फ आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।
रायबरेली में राहुल गांधी का 'डिजिटल अटैक': जब अफसरों के सामने जेब से निकाला स्मार्टफोन
राजनीति में आपने अक्सर नेताओं को बड़े-बड़े दावों वाली फाइलें लहराते और लंबे भाषण देते देखा होगा। लेकिन रायबरेली की जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति यानी 'दिशा' (DISHA) की बैठक में जो हुआ, उसकी उम्मीद किसी भी अफसर या मंत्री को नहीं थी।
बैठक में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, यूपी के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग (PWD) के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद थे। सब यही सोच रहे थे कि मीटिंग हमेशा की तरह कागजी आंकड़ों और औपचारिकताओं के साथ खत्म हो जाएगी। लेकिन राहुल गांधी पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे।
कागज़ों के बजाय मोबाइल पर दिखाए सबूत
राहुल गांधी ने PWD के अफसरों से रायबरेली की सड़कों की स्थिति पर जवाब मांगा। जब अफसरों ने जवाब देना शुरू किया, तो राहुल गांधी ने अपनी जेब से स्मार्टफोन निकाला। उन्होंने स्क्रीन पर रायबरेली की बदहाल सड़कों, जानलेवा गड्ढों और हिचकोले खाती गाड़ियों के वीडियो और फोटो प्ले कर दिए।
राहुल ने फोन की स्क्रीन सीधे मंत्रियों और अफसरों के सामने कर दी। वीडियो देखते ही बंद कमरे में सन्नाटा पसर गया। PWD के अधिकारियों के पास ऑन-स्क्रीन सबूतों का कोई जवाब नहीं था। राहुल गांधी ने तीखे लहजे में सवाल किया, "जब सरकार विकास के नाम पर फंड दे रही है, तो यह पैसा जा कहां रहा है? धरातल पर सड़कें खस्ताहाल क्यों हैं?"
बजट 2400 करोड़ का, लेकिन सड़कें टूटी
बैठक के बाद बाहर निकले समाजवादी पार्टी के विधायक राहुल लोधी ने भी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रायबरेली के लिए 2400 करोड़ रुपये का बजट देने का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन यह पैसा जमीन तक पहुंच ही नहीं रहा है। राहुल गांधी के इस 'डिजिटल अटैक' ने यह साफ कर दिया कि अब सिर्फ बयानों से काम नहीं चलेगा, बल्कि अधिकारियों को धरातल पर जवाब देना होगा।
पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव: सचिन पायलट की एंट्री से विरोधियों के सुर पड़े नरम
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी में अचानक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद जब पंजाब कांग्रेस बिखर रही थी, तब आलाकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। राजा वड़िंग ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को 13 में से 7 सीटें जिताकर अपनी उपयोगिता साबित की।
हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव पास आते ही पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। चन्नी गुट की मांग थी कि राज्य में किसी दलित चेहरे को आगे करके चुनाव लड़ा जाए।
सचिन पायलट के आते ही बदला माहौल
बढ़ते विवाद को देखते हुए आलाकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया। सचिन पायलट के पद संभालते ही विरोधी खेमे के सुर अचानक बदल गए। जो रंधावा कुछ दिन पहले तक राजा वड़िंग को हटाने की मांग कर रहे थे, उन्होंने दिल्ली में सचिन पायलट से मुलाकात के बाद कहा, "किसने कहा कि अध्यक्ष को बदला जाना चाहिए? न तो मैंने ऐसा कहा और न ही किसी वरिष्ठ नेता ने।" वहीं चन्नी ने भी पायलट की तारीफ करते हुए उन्हें एक ऊर्जावान नेता बताया।
पंजाब का जातीय और राजनीतिक समीकरण
पंजाब में लगभग 32 फीसदी दलित आबादी है। 2022 में कांग्रेस ने चन्नी को सीएम चेहरा बनाकर दलित कार्ड खेला था, लेकिन पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा और जाट सिख वोट बैंक छिटक गया। इतिहास गवाह है कि जब-जब कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे जाट सिख चेहरे को आगे रखा, पार्टी को सफलता मिली। यही वजह है कि 2024 में राजा वड़िंग (जाट सिख) के नेतृत्व में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया।
फिलहाल राहुल गांधी के आगामी पंजाब दौरे को देखते हुए आलाकमान ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बयानबाजी तुरंत बंद की जाए। सचिन पायलट के आने से गुटबाजी पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है, लेकिन देखना होगा कि यह शांति कब तक बनी रहती है।

