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बृजभूषण सिंह का अगला दांव, अखिलेश का PDA+पंडित कार्ड और JPSC विवाद

द फ़ेडरल देश के शो 'राजपथ' में प्रदीप सहगल के साथ देखिए बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने के बाद पूर्वांचल के समीकरण, अखिलेश यादव के 'पंडित और पीड़ित' कार्ड और झारखंड JPSC छात्र आंदोलन का विस्तृत विश्लेषण।


Rajpath: उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड तक राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है। एक तरफ दिल्ली की अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद पूर्व WFI अध्यक्ष और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह के अगले राजनीतिक दांव को लेकर कयासों का बाज़ार गर्म है। वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने 'PDA' फॉर्मूले में बड़ा बदलाव करते हुए 'पंडित और पीड़ित' का नया नारा बुलंद किया है। उधर झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर छात्र सड़कों पर हैं और हेमंत सोरेन सरकार बैकफ़ुट पर नज़र आ रही है।


डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन तीनों बड़े घटनाक्रमों और उनके दूरगामी राजनीतिक प्रभावों का बिंदुवार और गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है।

1. कोर्ट से निर्दोष बरी बृजभूषण शरण सिंह: क्या सपा का हाथ थामकर बिगाड़ेंगे बीजेपी का खेल?
मई 2023 में महिला पहलवानों के आरोपों के बाद "अगर मेरे खिलाफ एक भी आरोप साबित हो गया, तो मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा" कहने वाले बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद उनके स्वागत में जिस तरह से जश्न मनाया गया, उससे साफ है कि पूर्वांचल की राजनीति में उनका दबदबा बरकरार है।

देवीपाटन मंडल के अनताज बादशाह: गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और अयोध्या के देवीपाटन मंडल में बृजभूषण का दबदबा किसी पार्टी या जाति की सीमा से ऊपर है। पूर्वांचल की कम से कम 25 विधानसभा सीटों पर वे सीधा असर रखते हैं।

2007 चुनाव: बीजेपी ने बृजभूषण की अनदेखी की; नतीजा—25 में से बीजेपी सिर्फ 3 सीटें जीत पाई।

2012 चुनाव: बृजभूषण सपा के साथ गए; सपा को 18 सीटें मिलीं और बीजेपी 4 पर सिमट गई।

2017 व 2022 चुनाव
: बृजभूषण बीजेपी के साथ लौटे और पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज की।

बीजेपी से मनभेद और अखिलेश का अहसान: महिला पहलवानों के विवाद के बाद 2024 में टिकट कटना, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में बुलावा न मिलना और भागलपुर में "उपयोगिता साबित कर देंगे" जैसी चेतावनी देना उनके अंदरूनी असंतोष को दर्शाता है। दूसरी तरफ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा आरोपों के दौरान उनके खिलाफ एक शब्द न बोलने को बृजभूषण अपना बड़ा अहसान मानते हैं।

2027 और 2029 का गणित: यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी देवीपाटन मंडल की सीटों पर बृजभूषण कैडर की अनदेखी करती है, तो क्षत्रिय वोट बैंक का बड़ा हिस्सा छिटक सकता है। 2002 में जिस तरह कल्याण सिंह ने बीजेपी छोड़कर 97 उम्मीदवारों का खेल बिगाड़ा था, बृजभूषण भी पूर्वांचल की 70-100 सीटों पर बीजेपी के लिए वही चुनौती बन सकते हैं।

2. अखिलेश यादव का 'PDA+पंडित' दांव: "PDA में अब पंडित और पीड़ित सब साथ!"
लोकसभा चुनाव में 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की सफलता के बाद अखिलेश यादव ने 2027 के लिए बड़ा राजनीतिक ट्विस्ट दिया है। अब उनकी नज़र यूपी के निर्णायक ब्राह्मण वोट बैंक पर टिक गई है।

'छोटे लोहिया' की जयंती और प्रबुद्धजन सम्मेलन: पंडित जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर सपा मुख्यालय में 'प्रबुद्धजन सम्मेलन' का आयोजन किया गया, जहाँ से अखिलेश ने स्पष्ट संदेश दिया कि सपा ब्राह्मण समाज को पूरा मान-सम्मान देने जा रही है।

शंकराचार्य विवाद पर बीजेपी पर सीधा हमला: अखिलेश ने सम्मेलन के मंच से कहा, "इतिहास में किसी सरकार ने शंकराचार्य जी को स्नान करने से नहीं रोका, लेकिन इस सरकार में त्रिवेणी में उन्हें रोका गया, बटुकों का अपमान हुआ और पॉक्सो एक्ट तक में केस दर्ज कराने की कोशिश हुई।" उन्होंने बीजेपी के 'सबका साथ सबका विकास' के नारे को झूठा बताते हुए 'बंधु राष्ट्र' का संकल्प दोहराया।

CM योगी और GenZ/Gen Alpha पर तंज: अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि "हमारे मुख्यमंत्री जी को लैपटॉप के बारे में कुछ नहीं पता। जब तक वे Gen Z समझ पाते, तब तक फतेहपुर में Gen Alpha ने बड़ा आंदोलन कर दिया!"

पुरानी गलतियों का सुधार: अखिलेश ने वादा किया कि 2027 में चुनाव लड़ने से चूके ब्राह्मण नेताओं को पार्टी और धार्मिक/सामाजिक ट्रस्टों में उच्च सम्मान व जगह दी जाएगी।

3. झारखंड में JPSC और JSSC धांधली पर छात्रों का आंदोलन: बैकफ़ुट पर हेमंत सोरेन सरकार
झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का गुस्सा उफान पर है।

सीएम हाउस के न्योते को छात्रों ने ठुकराया: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर SDM कुमार रजत और ADM धनंजय कुमार जब छात्रों के 5 प्रतिनिधियों को सीएम हाउस बातचीत के लिए बुलाने पहुँचे, तो छात्रों ने साफ़ कह दिया कि "बंद कमरे में नहीं, जो बात होगी सब छात्रों के सामने मैदान में होगी।"

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल: गुरुवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से ठीक पहले अनशन पर बैठने वाले छात्रों की संख्या बढ़कर 6 (जिसमें दो महिलाएं शामिल हैं) हो गई है।

छात्रों की 3 प्रमुख मांगें:

14वीं JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) की परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए।

JSSC (कर्मचारी चयन आयोग) के पूरे परीक्षा ढाँचे में व्यापक सुधार हो।

भर्ती परीक्षाओं की धांधली की जाँच CBI या हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की निष्पक्ष टीम से कराई जाए।

सरकार का रुख: सीएम सोरेन ने आश्वासन दिया है कि छात्रों के मुद्दों को सरकार पूरी गंभीरता से सुन रही है, लेकिन गतिरोध अभी भी बना हुआ है।


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