BSP का 2027 ब्लूप्रिंट, बृजभूषण बरी और बांकीपुर में PK की जीत
द फ़ेडरल देश के शो 'राजपथ' में प्रदीप सहगल के साथ देखिए BSP की नई रणनीति, बृजभूषण शरण सिंह के कोर्ट फैसले और बिहार-एमपी उपचुनावों के राजनीतिक विश्लेषण पर विस्तृत रिपोर्ट।
Rajpath: उत्तर प्रदेश की राजनीति, न्यायपालिका के बड़े फैसलों और देश के चुनावी मैदान से इस वक्त कई बेहद अहम और चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आए हैं। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के लोकप्रिय कार्यक्रम 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने तीन सबसे बड़े राजनीतिक और कानूनी मुद्दों पर गहराई से चर्चा की है; पहला, 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी (BSP) की नई रणनीति; दूसरा, महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व कुश्ती महासंघ प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह का बरी होना; और तीसरा, बिहार के बांकेपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीटों के उपचुनावों के चौंकाने वाले नतीजे।
1. BSP का 2027 ब्लूप्रिंट: क्या अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही मायावती का 'सोशल इंजीनियरिंग 2.0' काम आएगा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यदि किसी एक दल के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव सबसे बड़ी अस्तित्व की लड़ाई है, तो वह बहुजन समाज पार्टी (BSP) है। 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली बीएसपी 2022 में सिर्फ 1 विधायक पर सिमट गई और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला।
टिकट बिक्री के आरोपों पर लगाम और इंटरव्यू आधारित चयन: मायावती ने अपनी पुरानी शैली बदलते हुए इस बार 24 संभावित विधानसभा प्रभारियों का चयन खुद उनका 'इंटरव्यू' लेकर किया है। राजनीतिक गलियारों में बीएसपी पर हमेशा टिकट वितरण में आर्थिक क्षमता के प्रभाव का आरोप लगता रहा है, ऐसे में यह कदम पार्टी की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और संगठन-आधारित दिखाने की कोशिश है।
आकाश आनंद की फ्रंटलाइन एंट्री: हाथरस के सादाबाद और गौतम बुद्ध नगर के जेवर में आकाश आनंद की सभाएं इस बात का संकेत हैं कि बीएसपी दलित युवाओं और GenZ को फिर से पार्टी से जोड़ने के लिए आक्रामक रूप से मैदान में उतर चुकी है।
पश्चिमी यूपी और चंद्रशेखर आजाद की चुनौती: पश्चिमी उत्तर प्रदेश बीएसपी का गढ़ रहा है, लेकिन अब वहाँ चंद्रशेखर आजाद जाटव और मुस्लिम युवाओं के बीच मजबूत पहचान बना रहे हैं। इसे चुनौती देते हुए बीएसपी ने सादाबाद से ब्राह्मण चेहरे (डॉ. अरविंद शर्मा) और जेवर से गुर्जर नेता (सतवीर सिंह नागर) को उतारकर 'सोशल इंजीनियरिंग 2.0' का दांव चला है।
2. बृजभूषण शरण सिंह बरी: न्यायपालिका का फैसला, साक्ष्यों का अभाव और कानूनी-सामाजिक बहस
करीब 3 साल तक देश की राजनीति, खेल और न्याय व्यवस्था के केंद्र में रहे बहुचर्चित महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कुश्ती महासंघ (WFS) के अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है।
अदालत का फैसला: अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) आरोपों को संदेह से परे (Beyond reasonable doubt) साबित करने के लिए पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रहा। शिकायकर्ताओं के बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों के अभाव को आधार बनाया गया।
पॉक्सो मामला और जांच की प्रक्रिया: इस मामले की शुरुआत जनवरी 2023 में जंतर-मंतर पर साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के प्रदर्शन से हुई थी। शुरुआती दौर में नाबालिग पहलवान से जुड़ा 'पॉक्सो' (POCSO) का गंभीर मामला तब कमजोर हुआ जब खुद नाबालिग और उसके परिवार ने बयान बदल लिए, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
आगे की कानूनी राह: बृजभूषण शरण सिंह ने इस फैसले को अपनी सत्यता की जीत बताया है, वहीं शिकायतकर्ता महिला पहलवानों ने साफ किया है कि वे इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देंगी। इस तरह इस मामले का कानूनी अध्याय अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
3. उपचुनावों के झटके: बांकेपुर में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत और दतिया में बीजेपी को मात
बिहार की बांकेपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों के उपचुनाव के परिणाम आ चुके हैं। ऊपरी तौर पर गुजरात की मांजलपुर सीट भारी अंतर से जीतकर बीजेपी ने अपना गढ़ बचा लिया है, लेकिन बिहार और मध्य प्रदेश के नतीजे भगवा पार्टी के लिए गंभीर चेतावनी बन गए हैं।
बांकेपुर में प्रशांत किशोर (जन सुराज) का धमाका: 1995 से लगातार बीजेपी के अभेद किले मानी जाने वाली बांकेपुर सीट पर नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है। 2025 के विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद यह जीत प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य और 'रणनीतिकार' से 'जननेता' बनने की राह में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है। यह जीत यह भी दर्शाती है कि पारंपरिक जातीय समीकरणों के साथ-साथ अब विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी जनता विकल्प तलाश रही है।
दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट और बीजेपी की हार: मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद स्थानीय असंतोष और संगठनात्मक समन्वय की कमी के कारण बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी के जोखिम को उजागर करता है।
Next Story

