दिल्ली में जलभराव से लेकर बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी तक बड़ा सियासी घमासान
राजपथ' में बड़ा खुलासा; पहली बारिश में डूबा दिल्ली-NCR, E20 पेट्रोल पर केजरीवाल का दांव, यूपी में सपा नेता पर ED की रेड और बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे पर मचे बवाल की पूरी रिपोर्ट।
Rajpath: देश की सियासत में इस समय प्रशासनिक लापरवाही, आर्थिक नीतियां और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। 'द फेडरल देश' के खास शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने देश की चार सबसे बड़ी खबरों का विस्तृत विश्लेषण किया, जिसने दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक हड़कंप मचा दिया है।
1. पहली ही बारिश में डूबी दिल्ली-NCR: 'स्मार्ट सिटी' के दावों की खुली पोल
मानसून की एंट्री तो देश में बड़े गाजे-बाजे के साथ हुई थी, लेकिन पहली ही कड़क बारिश ने दिल्ली-NCR का जो हाल किया है, उसे देखकर जनता यही कह रही है - 'ऊंची दुकान, फीका पकवान!' जगह-जगह भारी जलभराव और मीलों लंबे ट्रैफिक जाम ने राजधानी की कमर तोड़ दी है। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक तीन मंजिला निर्माणाधीन मकान भरभरा कर ढह गया, जिससे कई लोग मलबे में फंस गए और प्रशासनिक अमले की नींद टूटी।
करोड़ों रुपये का टैक्स देने वाले लोग सड़कों पर घंटों भयंकर जाम में रेंगने को मजबूर रहे। हर साल मानसून से पहले अफ़सर दावे करते हैं कि सारी तैयारियां पूरी हैं और नालों की सफाई हो चुकी है, लेकिन पहली ही बारिश आते ही अफ़सरों को 'सांप सूंघ जाता है'। जनता का सीधा आरोप है कि करोड़ों रुपये का ड्रेनेज बजट जमीन पर दिखने के बजाय बारिश के पानी के साथ ही बह जाता है। अब सवाल यह उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अफ़सरों पर सख्त कार्रवाई कब होगी?
2. ईंधन में मिलावट का नया दस्तूर: E20 पेट्रोल पर केजरीवाल का बड़ा हमला
एक तरफ जनता जलभराव से त्रस्त है, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार की आर्थिक और पर्यावरण नीतियों ने आम आदमी की जेब खाली कर दी है। सरकार ने पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने (E20 Fuel) का फैसला तो लागू कर दिया, लेकिन जमीन पर इसका विपरीत असर दिख रहा है। गाड़ियों का माइलेज बुरी तरह घट गया है और इंजन आधे रास्ते में ही हांफ रहे हैं।
सस्ता ईंधन और पर्यावरण बचाने के नाम पर शुरू हुए इस खेल से अब आम आदमी त्रस्त है। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने सरकार को चौतरफा घेरने का मन बना लिया है। केजरीवाल खुद दिल्ली के पेट्रोल पंपों, ऑटो शोरूम और सर्विस सेंटरों का जमीनी दौरा करेंगे। वे सीधे आम जनता, ऑटो चालकों और मैकेनिकों से बात करके उनकी परेशानियां समझेंगे। केजरीवाल का सीधा आरोप है कि बिना पर्याप्त तैयारी और व्यापक परीक्षण के यह नीति थोप दी गई, जिसका हर्जाना जनता भुगत रही है। विपक्ष इसे 'बहती गंगा में हाथ धोना' कह रहा है, लेकिन जनता पूछ रही है कि पर्यावरण बचाने की कीमत सिर्फ उनकी जेब से ही क्यों वसूली जा रही है?
3. यूपी की राजनीति में सियासी धमाका: सपा नेता पर ED की दस्तक
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय घटनाएं इतनी तेजी से बदल रही हैं कि एक मुद्दे की गूंज खत्म भी नहीं होती कि दूसरा सियासी धमाका हो जाता है। एक तरफ अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला उठाकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार योगी सरकार और केंद्र को कटघरे में खड़ा कर रही हैं। इसी बीच, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के झांसी और लखनऊ समेत सात ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी हो जाती है।
ED का दावा है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और कथित अवैध संपत्तियों की जांच के सिलसिले में की गई है। लेकिन अखिलेश यादव ने बिना देर किए सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए पूछा कि जहां 'चढ़ावा चोरी' का मामला उठ रहा है, वहां ED के अधिकारी दस्तक क्यों नहीं देते? विपक्ष का आरोप है कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता खत्म हो चुकी है और सरकार से सवाल पूछने की कीमत ED-CBI की दस्तक बन गई है। हालांकि भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि एजेंसियां स्वतंत्र हैं, लेकिन जनता के मन में यह संदेह लाजिमी है कि सत्ता और विपक्ष के मामलों में कार्रवाई की रफ्तार अलग-अलग क्यों है?
4. उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे में 'खेल': भड़के CM धामी
अभी अयोध्या का विवाद थमा भी नहीं था कि उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम से आस्था को चोट पहुंचाने वाली खबर सामने आ गई। जहां देश-दुनिया के श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध आस्था के साथ मन्नतें मांगने आते हैं, उसी बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में हेरफेर का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। बाहर से चमचमाती व्यवस्थाओं के बीच अंदरूनी स्तर पर ऐसा खेल चल रहा था कि बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज करनी पड़ी।
मामला इतना संगीन है कि खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने एक हाई लेवल कमेटी बनाकर 15 दिनों में इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि यह 'गौहत्या' जैसा अक्षम्य पाप है, जैसे कोई अपने मां-बाप की हत्या कर दे। अब जांच का सबसे बड़ा पेच इस बात पर फंसा है कि अध्यक्ष कार्यालय का एक साधारण कर्मचारी, प्रमोद नौटियाल आखिर इतना ताकतवर कैसे हो गया कि नियमों को ताक पर रखकर उसे चढ़ावा गिनने और वीआईपी प्रोटोकॉल जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंप दी गईं? क्या निगरानी प्रक्रिया में जानबूझकर ढील दी गई थी ताकि 'बहती गंगा' में सब हाथ धो सकें? 'राजपथ' में इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाते रहेंगे।
Next Story

