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'राजपथ': यूपी में सुनवाई पर राजस्थान में बैन, राम मंदिर और E20 का सच

'राजपथ' में प्रदीप सहगल का बड़ा विश्लेषण: Gen-Z छात्र आंदोलनों पर दोहरी नीतियां, राम मंदिर चढ़ावा चोरी की SIT रिपोर्ट और E-20 पेट्रोल से तबाही का सच।


Rajpath: उत्तर प्रदेश और राजस्थान के स्कूलों में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी मछलियों के बचने और E-20 एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से 8 करोड़ पुरानी गाड़ियों के इंजनों पर छाए संकट— इन तीन बड़े घटनाक्रमों ने देश के प्रशासनिक मॉडल, जवाबदेही और नीतिगत प्राथमिकताओं की पोल खोलकर रख दी है।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने नई पीढ़ी (Gen-Z और Gen-Alpha) के तेवरों से घबराई सरकारों, आस्था के नाम पर हुए घपले में अफसरों के बचाव और 'ग्रीन फ्यूल' के नाम पर आम नागरिक की जेब पर पड़ रही मार का गहराई से विश्लेषण किया।

1. एक पार्टी, दो राज्य और दो पैंतरे: UP में सुनवाई, तो राजस्थान में मीडिया पर बैन
आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z और Gen-Alpha) केवल सोशल मीडिया पर रील बनाना नहीं जानती, बल्कि अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर शासन-प्रशासन के पसीने छुड़ाना भी जानती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस नई पीढ़ी के मिजाज को समझ पा रही है?

उत्तर प्रदेश (लखनऊ और आजमगढ़): 'जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय' की लगभग 250 छात्राएं भारी बारिश के बीच सड़कों पर उतरीं और 8 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की। वजह थी एक साल से साइंस के स्थाई शिक्षकों का न होना। नतीजा यह हुआ कि 2027 के विधानसभा चुनावों के दबाव में बैठा प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आया। अफसरों ने मौके पर पहुंचकर शिक्षकों और इंटरनेट व्यवस्था का लिखित आश्वासन दिया, पंखे लगवाए और सड़क निर्माण के प्रस्ताव पास किए।

राजस्थान का 'तुगलकी फरमान': दूसरी तरफ, राजस्थान के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की बदहाली छिपाने के लिए मीडिया की एंट्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी। बिना प्रिंसिपल की इजाजत के पत्रकार अंदर नहीं जा सकते, फोटो/वीडियो नहीं बना सकते और न ही बच्चों का इंटरव्यू ले सकते हैं।

चुनावी कैलेंडर का खेल
उत्तर प्रदेश में 2024 के चुनाव नतीजों के बाद भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सरकार जानती है कि बच्चों का गुस्सा उनके माता-पिता के वोटों पर सीधा असर डालेगा, इसलिए तुरंत मांगें मानी जा रही हैं। वहीं, राजस्थान में नई सरकार होने के कारण चुनाव बहुत दूर हैं, इसलिए वहां समस्याओं का समाधान करने के बजाय खबरों को दबाने और तानाशाही का रास्ता अपनाया जा रहा है।

2. राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT की पहली रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा बेदाग, छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज
अयोध्या में राम मंदिर की तिजोरी से महीनों तक करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब होता रहा। कर्मचारियों ने 70 से अधिक बार चोरी की वारदात को अंजाम दिया। लेकिन यूपी सरकार द्वारा गठित पहली 3-सदस्यीय एसआईटी (SIT) की फाइनल रिपोर्ट ने बड़े प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह बेदाग साबित कर दिया है।

बड़े चेहरे बचे, छोटे फंसे
: एसआईटी रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का नाम तक नहीं है। सारा दोष उन 8 छोटे कर्मचारियों पर मढ़ दिया गया है, जो पैसों की गिनती में लगे थे।

लापरवाही पर चुप्पी: एसआईटी जांच में यह माना गया कि गिनती के लिए बने नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं और कर्मचारियों की तलाशी तक नहीं ली जाती थी। इसके बावजूद लचर व्यवस्था के जिम्मेदार बड़े पदाधिकारियों पर कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।

दूसरी SIT से उम्मीद: सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस के नेतृत्व में गठित नई एसआईटी (जिसमें आईपीएस और फाइनेंस एक्सपर्ट्स शामिल हैं) अब इस मामले की व्यापक जांच कर रही है। देखना होगा कि क्या दूसरी एसआईटी सिर्फ प्यादों तक सीमित रहेगी या बड़े चेहरों की जवाबदेही भी तय करेगी।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: घटनाक्रम का टाइमलाइन
7 जून: सपा के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये चोरी का आरोप लगाया।

8-9 जून: अखिलेश यादव ने स्वतः संज्ञान की मांग की; बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने PMO को चिट्ठी लिखी।

10 जून: PMO ने ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी; चंपत राय ने आरोपों को खारिज किया।

13-19 जून: 3-सदस्यीय SIT का गठन; 100 से ज्यादा कर्मचारियों से पूछताछ और 8 कर्मियों पर FIR।

20 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई एसआईटी गठित।

3. E-20 पेट्रोल का सच: 8 करोड़ गाड़ियों का इंजन कबाड़, मुख्य आर्थिक सलाहकार की चेतावनी
सरकार जिस E-20 (20% एथेनॉल-ब्लेंडेड) पेट्रोल को 'ग्रीन फ्यूल' और 'क्रांतिकारी कदम' बताकर प्रचारित कर रही है, वह देश की सड़कों पर दौड़ रही 8 करोड़ पुरानी कार्बोरेटर मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के लिए 'स्लो पॉइजन' बन चुका है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की चेतावनी
सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने आगाह किया है कि E-20 पेट्रोल में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने के कारण पुरानी गाड़ियों के इंजन ओवरहीट हो रहे हैं और उनके रबर व प्लास्टिक के पार्ट्स सड़ रहे हैं। जब तक इन पुरानी गाड़ियों में सुधार नहीं होता, तब तक पेट्रोल पंपों पर E10 पेट्रोल का विकल्प भी मिलना चाहिए।

रसोई के बजट और पर्यावरण पर दोहरी मार
खाद्य महंगाई का खतरा: एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का, गन्ना और चावल को फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है। मक्का महंगा होने से पोल्ट्री फीड और डेयरी चारा महंगा हो रहा है, जिससे दूध, अंडे और चिकन के दाम बढ़ रहे हैं।

चीनी का संकट: चालू सीजन में देश की 10% चीनी (लगभग 30 लाख टन) एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो गई, जिससे चीनी की कीमतें उछल रही हैं।

भूजल और जमीन का दोहन: 20% ब्लेंडिंग का लक्ष्य पूरा करने के लिए 5 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त उपजाऊ जमीन और अरबों लीटर भूजल की जरूरत होगी, जो गेहूं और धान की खेती से छीनी जाएगी। भूजल खींचने के लिए कोयला जलाकर बिजली बनाई जा रही है, जो 'ग्रीन फ्यूल' के दावों पर सवाल खड़े करती है।

सरकार लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ने का हवाला देकर पंपों पर E10 पेट्रोल बेचने से इनकार कर रही है, यानी सरकारी खर्च बचाने के चक्कर में आम जनता की गाड़ियों के इंजन और रसोई के बजट की जिम्मेदारी लेने से मुंह मोड़ा जा रहा है।


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