x

'राजपथ': 90 करोड़ का साइकिल घोटाला, रामदेव बनाम कंगना और जौहर ट्रस्ट पर रेड

'राजपथ' में बड़ा विश्लेषण: 'जेन-ज़ी' पर कंगना-रामदेव विवाद, दिल्ली में 90 करोड़ के साइकिल घोटाले का आरोप और यूपी चुनाव से पहले जौहर यूनिवर्सिटी पर ED रेड।


Rajpath: उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक इस समय तीन बड़े घटनाक्रमों ने देश की राजनीति में भारी हलचल मचा रखी है। एक तरफ जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बाद नई पीढ़ी ('जेन-ज़ी' और 'जेन-अल्फा') की भूमिका को लेकर बीजेपी सांसद कंगना रनोट की विवादित टिप्पणी पर योग गुरु बाबा रामदेव के तीखे प्रहार ने उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति का पारा बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) ने रेखा गुप्ता सरकार पर 'विद्या वाहिनी योजना' के तहत साइकिल खरीद में लगभग 90 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है। इसी बीच, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से महज छह महीने पहले रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' और उनके ट्रस्ट पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 14 घंटे तक मैराथन छापेमारी कर राजनीतिक घेराबंदी तेज कर दी है।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन तीनों प्रमुख घटनाक्रमों पर गहन विश्लेष्ण किया है।

1. 'जेन-ज़ी' विवाद: कंगना के 'जेनरेशन गटर' बयान पर बाबा रामदेव का तीखा प्रहार
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की युवा पीढ़ी की राजनीतिक ताकत केंद्र में आ गई है। ऐसे माहौल में बीजेपी और सरकार के दो सबसे बड़े समर्थक चेहरे आपस में भिड़ गए हैं।

'जेनरेशन गटर' बनाम 'देश का भविष्य'
विवाद की शुरुआत बीजेपी सांसद कंगना रनोट के उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने 'जेन-ज़ी' की सोच और जीवनशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'जेनरेशन गटर' तक कह दिया।

रामदेव का कड़ा ऐतराज: बाबा रामदेव ने कंगना के बयान की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि देश के युवाओं के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा ही देश का भविष्य हैं और पार्टी नेतृत्व को ऐसी अनुशासनहीन बयानबाजी पर ध्यान देना चाहिए।

कंगना का पलटवार: कंगना रनोट ने भी शांत न बैठते हुए बाबा रामदेव के पुराने विवादों और भ्रामक विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार का जिक्र किया और कहा कि उन्हें किसी से "नैतिकता का पाठ" पढ़ने की जरूरत नहीं है।

क्या है इसके पीछे का राजनीतिक गणित?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बाबा रामदेव के इस आक्रामक रुख के पीछे उत्तराखंड के स्थानीय समीकरण हैं, जहां पतंजलि का मुख्य केंद्र है। दिल्ली और रांची में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान भी रामदेव ने युवाओं की मांगों का समर्थन किया था। उत्तराखंड में जनता के असंतोष को देखते हुए वे खुद को केवल एक राजनीतिक दल का समर्थक न दिखाकर अपनी सामाजिक व व्यापारिक रीढ़ यानी युवाओं और मध्यम वर्ग के साथ खड़े दिखना चाहते हैं।

2. दिल्ली में साइकिल घोटाला? 4,200 रुपये की साइकिल 6,957 में खरीदने का आरोप
दिल्ली सरकार की 'विद्या वाहिनी योजना' के तहत सरकारी स्कूलों की नौवीं क्लास की छात्राओं को बांटी गई 1 लाख 30 हजार साइकिलों की खरीद पर अब 'महाघोटाले' का साया मंडरा रहा है। आम आदमी पार्टी ने रेखा गुप्ता सरकार पर 90 करोड़ रुपये के घपले का आरोप लगाया है।

'आप' ने दिखाई रसीद और साइकिलें
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो साइकिलें और बाजार की पक्की रसीद दिखाते हुए कहा:

कीमत में भारी अंतर: जिस साइकिल की खुदरा बाजार में पक्की रसीद के साथ कीमत 4,200 रुपये है, उसे सरकार ने थोक खरीद के बावजूद 6,957 रुपये प्रति साइकिल के भाव पर खरीदा है।

टेंडर प्रक्रिया पर सवाल: आरोप है कि साइकिल बनाने वाली मूल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के बजाय ट्रेडिंग कंपनी (बिचौलियों) से खरीद की गई और टेंडर की शर्तें पसंदीदा वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गईं।

क्वालिटी में झोल: 'Hero High Class Skyler' बताकर बांटी जा रही साइकिलों में लोकल पार्ट्स और पुराने स्टिकर लगाए जाने का दावा किया गया है।

सरकार का पलटवार: "GeM पोर्टल से हुई पारदर्शी खरीद"
दूसरी तरफ, दिल्ली सरकार और बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पूरी खरीदारी केंद्र सरकार के सरकारी पोर्टल 'GeM' (Government e-Marketplace) के जरिए CVC गाइडलाइंस का पालन करते हुए L-1 (सबसे कम बोली लगाने वाले) वेंडर से की गई है और विपक्ष जनहित की योजना से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है।

3. UP चुनाव से 6 महीने पहले आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED की रेड
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। जेल में बंद समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की रामपुर स्थित 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' और उनके ट्रस्ट से जुड़े 10 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की।

14 घंटे चली मैराथन छापेमारी
सुबह 7 बजे ईडी की 15 अधिकारियों की टीम 6 गाड़ियों में सवार होकर यूनिवर्सिटी परिसर पहुंची और रात 9 बजे तक लगातार 14 घंटे तक दस्तावेज खंगाले गए।

संदिग्ध फंड्स का आरोप: जांच एजेंसियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के निर्माण में सरकारी पैसे और संदिग्ध फंड्स का इस्तेमाल किया गया था।

इमारतों पर बुलडोजर का विवाद: इससे पहले रामपुर डीएम ने यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को अवैध बताते हुए गिराने का आदेश दिया था, जिस पर फिलहाल कमिश्नर कोर्ट की रोक लगी हुई है।

टाइमिंग पर भड़के अखिलेश यादव
हाल ही में सपा नेता शिवपाल यादव ने बयान दिया था कि सरकार बनने पर वे आजम खान को गृह मंत्री बनाएंगे, जिसके तुरंत बाद हुई इस रेड पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला। अखिलेश ने सवाल उठाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर से लेकर एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोपों पर ED खामोश क्यों है, और केवल चुनाव से ठीक पहले विपक्षी नेताओं को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है?


Read More
Next Story