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कंगना-रामदेव सुलह, तेज प्रताप का शो और UP का PDA विवाद: राजपथ शो

द फ़ेडरल के 'राजपथ' शो में एंकर प्रदीप सहगल का विश्लेषण: कंगना-रामदेव की सुलह का सच, तेज प्रताप का रिएलिटी शो और यूपी के अजगर-मजगर बनाम PDA की पूरी कहानी।


Rajptah: द फ़ेडरल देश के विशेष शो राजपथ में एंकर प्रदीप सहगल ने देश के तीन सबसे चर्चित और गरमाए राजनीतिक मुद्दों का सिलसिलेवार विश्लेषण किया है।


1. कंगना रनौत बनाम बाबा रामदेव: तीखी जंग के बाद 'रक्षाबंधन' पर फिल्मी सुलह
बॉलीवुड की 'क्वीन' व बीजेपी सांसद कंगना रनौत और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच पिछले कुछ दिनों से जारी जुबानी जंग अचानक एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुई।

विवाद की शुरुआत: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शनों पर कंगना रनौत ने तंज कसते हुए उन्हें 'जनरेशन गटर' कह दिया था। बाबा रामदेव ने कंगना के इस बयान की सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना की।

कंगना का पलटवार: कंगना ने बाबा रामदेव को महज़ एक कारोबारी करार दिया, पतंजलि से जुड़े विवादों को उछाला और उत्तराखंड में ज़मीन हड़पने तक के गंभीर आरोप मढ़ दिए।

रक्षाबंधन पर सुलह: बाबा रामदेव ने मीडिया के सामने मिठाई, राखी और 500-500 रुपये की गड्डी लिफाफे में रखकर कंगना को बाय पोस्ट भिजवाई। उन्होंने संदेश दिया कि "विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए।"

कंगना का जवाब: कंगना ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर बड़े भाई के प्रेम और मिठाई दोनों को स्वीकार करते हुए विवाद खत्म करने का ऐलान किया।

राजनीतिक कोण: एक ही विचारधारा के दो बड़े चेहरों की जंग से बीजेपी की छवि को नुकसान हो रहा था। चर्चा है कि पर्दे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक रणनीतिकार के हस्तक्षेप के बाद ही यह सुलह संभव हुई है।

2. बिहार राजनीति का नया स्प्लिट स्क्रीन: सड़क पर छात्र, शो में तेज प्रताप
बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राजनीति का एक नया और अजीबोगरीब 'स्प्लिट स्क्रीन' देखने को मिल रहा है।

सड़क बनाम सेट: एक तरफ पटना की सड़कों पर आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस लाठियां और आंसू गैस के गोले बरसा रही है, जहाँ तेजस्वी यादव छात्रों के समर्थन में रैलियां कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, अपनी अलग पार्टी बना चुके लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ओटीटी शो 'भोजपुरी बवाल' में मल्लिका शेरावत के साथ रिएलिटी शो शूट कर रहे हैं।

विरासत और विश्वसनीयता: राजनीति में नेताओं के बॉलीवुड में जाने के उदाहरण (जैसे मनोज तिवारी, रवि किशन) आम हैं, लेकिन किसी स्थापित राजनीतिक घराने के वारिस का राजनीति छोड़कर ग्लैमर की दुनिया में पहचान तलाशना अनोखा है।

बड़ा सवाल: जब छात्र और जनता सड़कों पर संघर्ष कर रही हो, तब किसी राजनेता की प्राथमिकता सड़क होनी चाहिए या शूटिंग सेट? सोशल मीडिया की पब्लिसिटी और व्यूज कभी वोट बैंक में तब्दील नहीं हो सकते।

3. यूपी में 'PDA' बनाम 'अजगर-मजगर': असीम अरुण का अखिलेश पर निशाना
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले पर सियासत गरमा गई है।

असीम अरुण का हमला: योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने अखिलेश के PDA फार्मूले को पूरी तरह 'फर्जी' और 'फ्लॉप' करार दिया है।

इतिहास का हवाला (अजगर और मजगर):

AJGAR (अजगर): 1970-80 के दशक में चौधरी चरण सिंह ने किसानों और ग्रामीण वर्ग को एकजुट करने के लिए अहीर (यादव), जाट, गुर्जर और राजपूत का समीकरण बनाया था।

MAJGAR (मजगर): बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के दौर में इसमें मुस्लिम समाज को जोड़कर 'मजगर' बनाया गया।

सपा का पलटवार: असीम अरुण का तर्क है कि इतिहास गवाह है कि जातीय समीकरण (अजगर और मजगर) समय के साथ बिखर गए, और अखिलेश के PDA का हश्र भी यही होगा क्योंकि जनता अब विकास के नाम पर वोट देती है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इस पर पलटवार करते हुए इसे सामाजिक न्याय का मजबूत आधार बताया है।


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