मायावती का RSS पर वार, दिल्ली में राशन विवाद और हमीरपुर में छात्र क्रांति
'द फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल के साथ देखिए मायावती का नया नैरेटिव, दिल्ली का 3 करोड़ किलो चावल विवाद और हमीरपुर में स्कूली छात्रों का प्रदर्शन।
Rajpath: उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में इस वक्त सियासी बिसात पर नए समीकरण गढ़े जा रहे हैं। एक तरफ जहां बहुजन समाज पार्टी (BSP) के युवा नेता आकाश आनंद मैदान में उतरकर विपक्षी दिग्गजों को निशाने पर ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), बीजेपी, कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला बोला है। 'द फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल की इस विस्तृत रिपोर्ट में देश के तीन प्रमुख घटनाक्रमों का गहन विश्लेषण किया गया है। बसपा का नया 'Gen-Z' दांव, दिल्ली विधानसभा में सब्सिडी राशन पर मचा घमासान और हमीरपुर में स्कूली बच्चों का तिरंगा प्रदर्शन।
1. बसपा का नया 'Gen-Z' दांव और कोर वोट बैंक बचाने की रणनीति
मायावती ने देश के युवाओं और 'Gen-Z' पीढ़ी से अपील करते हुए कहा है कि वे राजनीतिक दलों की शतरंज का मोहरा न बनें। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बसपा सुप्रीमो का यह आक्रामक रुख अपनी खिसकती ज़मीन और अस्तित्व को बचाने की रणनीतिक पहल है।
आंकड़ों में BSP का राजनीतिक सफर और वोट गणित
दलित समुदाय उत्तर प्रदेश की कुल आबादी का लगभग 22% है, जिसमें 66 उपजातियां शामिल हैं। इनमें अकेले जाटव बिरादरी की हिस्सेदारी 50% के करीब है। 2022 के विधानसभा चुनावों में बसपा को मिले 12.88% वोट बैंक में करीब 8% हिस्सेदारी अकेले जाटव समुदाय की ही थी। यदि यह कोर वोट बैंक खिसकता है, तो पार्टी के लिए वापसी की राहें कठिन हो जाएंगी।
दो दशकों में BSP का वोट शेयर और सीटें:
2007 विधानसभा: 30.43% वोट शेयर (206 सीटें - पूर्ण बहुमत)
2012 विधानसभा: 25.91% वोट शेयर (80 सीटें)
2017 विधानसभा: 22.23% वोट शेयर (19 सीटें)
2022 विधानसभा: 12.88% वोट शेयर (केवल 01 सीट)
लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन:
2004 लोकसभा: 24.67% वोट शेयर (19 सीटें)
2009 लोकसभा: 27.20% वोट शेयर (21 सीटें)
2014 लोकसभा: 19.77% वोट शेयर (00 सीट)
2019 लोकसभा: 19.43% वोट शेयर (10 सीटें - सपा के साथ गठबंधन)
आरक्षण और छात्र आंदोलनों पर मायावती का रुख
मायावती ने आरएसएस और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों व पब्लिक सेक्टर के निजीकरण के जरिए आरक्षण को निष्प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में भी गरीबों और पिछड़ों के लिए आरक्षण की मांग की।
छात्र आंदोलनों पर बोलते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों को कांग्रेस ने अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल किया, जबकि रांची (झारखंड) के JPSC-JSSC प्रदर्शनों में बीजेपी राजनीति चमकाने पहुंच गई। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे नेताओं के हाथों की कठपुतली बनने के बजाय स्वयं अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठाएं।
2. दिल्ली: 3 करोड़ किलो चावल के मुद्दे पर AAP और BJP आमने-सामने
देश की राजनीति में जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली में सब्सिडी वाले राशन को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और दिल्ली सरकार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
31,000 मीट्रिक टन राशन वितरण पर विवाद
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को 31,000 मीट्रिक टन (लगभग 3 करोड़ 10 लाख किलो) सब्सिडी का चावल आबंटित किया गया था। 'आप' ने सवाल उठाया कि बिना पिछले आबंटन का रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए, अगले ही महीने दोबारा नया प्रस्ताव क्यों आगे बढ़ा दिया गया?
सौरभ भारद्वाज ने तीन प्रमुख सवाल खड़े किए:
फ़ाइल की रफ्तार: जो फ़ाइल महीनों से लंबित थी, उसे एक ही दिन में मंजूरी देकर एफसीआई (FCI) को कैसे भेज दिया गया?
नियमों की अनदेखी: वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर जूनियर अफसरों के जरिए प्रस्ताव क्यों आगे बढ़ाया गया?
गोपनीयता: सब्सिडी राशन वितरण की योजना को पारदर्शी बनाने के बजाय गुपचुप तरीके से क्यों लागू किया जा रहा है?
दूसरी तरफ, कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विधिक कार्रवाई (कोर्ट जाने) की बात कही है।
3. हमीरपुर: 6 किलोमीटर सड़क के लिए हाथों में तिरंगा लिए भटके स्कूली बच्चे
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से प्रशासनिक उपेक्षा की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। चंदूपुर ग्राम पंचायत के आसपास स्थित प्राइमरी स्कूल और गर्ल्स इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राएं अपनी 6 किलोमीटर लंबी जर्जर और कीचड़ से भरी सड़क के निर्माण की मांग को लेकर हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर सड़कों पर उतर आए।
कलेक्ट्रेट के बाहर पुलिस का रवैया
रोज़ाना स्कूल यूनिफॉर्म खराब होने से परेशान बच्चे जब अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचे, तो कलेक्ट्रेट गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा बच्चों को खदेड़े जाने पर प्रशासनिक संवेदनहीनता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जो बच्चे बेहतर भविष्य के लिए केवल बुनियादी सड़क की मांग कर रहे थे, उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया?
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