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'राजपथ': धंसा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, रांची छात्र आंदोलन व AMU रिपोर्ट

'द फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में प्रदीप सहगल की रिपोर्ट। धंसा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, रांची में JSSC-CGL छात्र आंदोलन और उत्तराखंड पर AMU की खौफनाक रिपोर्ट।


Rajpath: देश के अलग-अलग हिस्सों में ढांचागत विकास के दावों, युवाओं के भविष्य से जुड़ी प्रशासनिक विफलताओं और पर्यावरण के सामने खड़े गंभीर संकटों को लेकर सियासत गरमा गई है। 'द फ़ेडरल देश' के विशेष विश्लेषण कार्यक्रम 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने तीन बड़े और संवेदनशील मुद्दों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया उद्घाटन के महज 30 दिनों के भीतर धंसने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, रांची में JSSC-CGL परीक्षा धांधली को लेकर 22 दिनों से सड़कों पर उतरे छात्र, और AMU की रिसर्च में उत्तराखंड के पहाड़ों पर 13 गुना बढ़े कंक्रीट के कारण बर्फबारी में आई 11% की भयानक गिरावट।


1. लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का 'कलेजा' धंसा: विकास मॉडल या टैक्सपेयर्स के पैसे की डकैती?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में जिस 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का भव्य उद्घाटन किया गया था, वह एक महीने के भीतर ही भ्रष्टाचार और खराब गुणवत्ता का उदाहरण बन गया है।

उद्घाटन के 30 दिन में 60 जगह धंसी सड़क
पंखा चलाकर सड़क सुखाने का 'अजूबा': बारिश के बाद जब बेस की मिट्टी धंसने लगी, तो निर्माण एजेंसी द्वारा सड़क को सुखाने के लिए पेडेस्टल फैन (बड़े पंखे) लगाए गए, जिसे लेकर सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

विपक्ष का तीखा प्रहार: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ताना कसते हुए कहा— "चल कम, धंस ज्यादा: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे!" वहीं बीएसपी प्रमुख मायावती ने यमुना एक्सप्रेस-वे की मजबूती का उदाहरण देते हुए इसे 'कमीशनखोरी का मास्टरपीस' बताया।

प्रशासनिक डैमेज कंट्रोल: फजीहत बढ़ने पर NHAI और राज्य सरकार ने निर्माण कंपनी PNC इन्फ्राटेक को 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित कर 3 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस थमाया है। फिलहाल टोल वसूली रोक दी गई है और IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम से जांच कराई जा रही है।

राजपथ का सवाल:

आम नागरिक पेट्रोल से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक भारी टैक्स भरते हैं। जब करोड़ों-अरबों रुपये पानी की तरह बहाकर ऐसी धंसती सड़कें मिलती हैं, तो इसे सुशासन कहें या टैक्सपेयर्स के पैसों पर सरेआम डकैती?

2. रांची में 22 दिनों से सड़कों पर छात्र: JSSC-CGL धांधली, सरकार का दावा और 'कानूनी लाचारी' का सच
झारखंड की राजधानी रांची की सड़कों पर पिछले 22 दिनों से हज़ारों युवा कड़कती धूप और ठंड में लाठियां, वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले झेलकर आंदोलन कर रहे हैं।

क्या है JSSC-CGL परीक्षा विवाद?
ग्रुप 'बी' और 'सी' की इस सबसे बड़ी परीक्षा में लगभग 6.40 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

जनवरी 2024: पहली बार आयोजित परीक्षा का पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

सितंबर 2024: राज्य भर में इंटरनेट बंद करके दोबारा परीक्षा कराई गई, लेकिन फिर से टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर उत्तर तैरने तथा बीरगंज (नेपाल) की लोकेशन से धांधली के आरोप उठे।

सरकार का तर्क बनाम पूर्व महाधिवक्ता की राय
सरकार का रुख: राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि 98% मांगें और न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) स्वीकार कर ली गई हैं, लेकिन परीक्षा रद्द करना संभव नहीं है क्योंकि प्रक्रिया हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हुई है और कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।

पूर्व महाधिवक्ता (Ex-Advocate General) का स्पष्टीकरण: जानकारों और पूर्व महाधिवक्ता के अनुसार, यदि किसी परीक्षा में व्यापक स्तर पर धांधली के साक्ष्य हैं, तो सरकार के पास उसे रद्द करने और नया विज्ञापन जारी करने का पूरा कानूनी अधिकार है। कोर्ट का कोई भी आदेश धांधली को संरक्षण नहीं देता।

3. AMU की खौफनाक रिसर्च: कंक्रीट की भट्टी बना उत्तराखंड, 11% घटी बर्फबारी!
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के शोधकर्ताओं द्वारा पिछले 30 सालों (1992 से 2022) के सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण से 'देवभूमि' उत्तराखंड के पर्यावरण को लेकर हिला देने वाला सच सामने आया है।

13 गुना बढ़ा कंक्रीट, गायब हो रही बर्फ
सीमेंट का जंगल: देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में इमारतों और डामर का निर्माण 3 दशकों में 13 गुना बढ़ गया है। डामर और कंक्रीट द्वारा सूरज की गर्मी सोखने के कारण पहाड़ों का तापमान बढ़ रहा है, जिससे बर्फबारी में 11% की गिरावट आई है।

औली का संकट: चमोली के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल 'औली' में बर्फ न गिरने के कारण पूरा विंटर सीजन सूखा निकल गया और राष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिताएं रद्द करनी पड़ीं।

जलस्रोत और पलायन: पहाड़ों में अनियंत्रित खुदाई और निर्माण से प्राकृतिक जलस्रोत ('नौले' और 'धारे') सूख रहे हैं। अल्मोड़ा और पौड़ी जैसे जिलों के सैकड़ों गांव 'भूतिया गांव' में तब्दील हो चुके हैं, जहां पीने के पानी और खेती के संकट के कारण लोग पलायन को मजबूर हैं।


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