प्रह्लाद जोशी पर प्रियंका का वार, बिहार-दिल्ली में सियासी बवाल!
दे फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल की रिपोर्ट: प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री पर साधे निशाने, तेजस्वी का बिहार पर हमला और दिल्ली जलभराव विवाद।
Rajpath: "चेहरे बदले, नाम बदले, पर न बदली कहानी,
धर्मेंद्र प्रधान गए, प्रह्लाद जोशी आए, फिर से खड़ी हुई परेशानी!"
नीट (NEET) स्कैम की आंच में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश को लगा था कि नए नेतृत्व के साथ शिक्षा मंत्रालय में सुधार की नई बयार बहेगी। लेकिन विवादों का साया अभी भी पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। 'दे फ़ेडरल देश' के प्रमुख शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने संसद से लेकर राज्यों के सियासी घमासान, बिहार में 100 दिनों के रिपोर्टकार्ड और दिल्ली के ढांचागत संकट का तीखा और बेबाक विश्लेषण किया।
1. संसद में प्रियंका गांधी के दो बड़े प्रहार: नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी कठघरे में
धर्मेंद्र प्रधान की विदाई के बाद पद संभालने वाले नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी कुर्सी पर ठीक से बैठ भी नहीं पाए थे कि उनके पुराने राजनीतिक विवादों ने उन्हें घेर लिया। संसद के पटल पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नए मंत्री और सरकार पर तीखे हमले बोले:
बिलकिस बानो मामले का संदर्भ: प्रियंका गांधी ने संसद में सीधा सवाल खड़ा किया कि देश के लाखों बच्चों का भविष्य और शिक्षा नीति ऐसे नेतृत्व के हाथ में सौंपी गई है, जिनका नाम बिलकिस बानो मामले के दोषियों की रिहाई से जुड़े विवादों से जोड़ा जाता रहा है।
कथनी और करनी का अंतर: संसद के बाहर भी हमला बोलते हुए प्रियंका ने कहा कि एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के नारे देती है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं की सुरक्षा और संवेदनाओं से जुड़े मामलों पर मौन साध लेती है।
'राजपथ' का सवाल: क्या इतने गंभीर सियासी विवादों और आरोपों से घिरे नेतृत्व के हाथों में देश के छात्र-छात्राओं का भविष्य सुरक्षित है? क्या सरकार हर बार की तरह इस बार भी सवालों से मुंह मोड़ लेगी?
2. बिहार में 100 दिन का रिपोर्टकार्ड: तेजस्वी का 'पुलिसिया गुंडाराज' का आरोप
बिहार में नई सरकार के 100 दिन पूरे होने पर राजद (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी सरकार का आक्रामक 'रिपोर्ट कार्ड' जारी कर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
'नाम बड़े और दर्शन छोटे': तेजस्वी ने आरोप लगाया कि 100 दिनों में विकास का कोई काम नहीं दिखा, उल्टा बिहार में कानून के राज के नाम पर 'पुलिसिया गुंडाराज' स्थापित हो चुका है। नीट आंदोलन कर रहे युवाओं पर AK-47 तानने, लाठियां भांजने और उन पर संगीन धाराएं लगाने का मुद्दा फिर से गर्मा गया है।
प्रोटोकॉल और लाल बत्ती विवाद: तेजस्वी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी द्वारा बिना किसी संवैधानिक पद या आधिकारिक प्रोटोकॉल के लाल बत्ती के बड़े काफिले के साथ जिलों का मुआयना करने का मामला उठाकर सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया।
चुनावी आहट: बांकीपुर चुनाव से ठीक पहले तेजस्वी यादव के इन हमलों ने बिहार की सत्ता में बैठे नेताओं के पसीने छुड़ा दिए हैं।
3. दिल्ली: ₹2,500 की 'रेवड़ी' बनाम डूबती राजधानी का इंफ्रास्ट्रक्चर
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट द्वारा 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' के तहत 1 अगस्त से महिलाओं को हर महीने ₹2,500 देने का ऐलान तो कर दिया गया, लेकिन मानसून की पहली ही बारिश ने इस मॉडल की धज्जियां उड़ा दीं।
जलमग्न मेट्रो और सड़कें: राजधानी की चकाचौंध के बीच मेट्रो स्टेशनों के अंदर पानी भर गया, डीटीसी बसों के फर्श पर पानी बहता दिखा और सदर बाजार व कनॉट प्लेस जैसी प्रमुख व्यापारिक जगहों पर दुकानों में पानी घुसने से लाखों का नुकसान हुआ।
टैक्सपेयर्स का पैसा कहां गया? जनता से सवाल पूछा जा रहा है कि हर साल ड्रेनेज सफाई के नाम पर पास होने वाला बजट आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
रेवड़ी बनाम बुनियादी सुविधाएं: क्या दिल्ली की जनता को बुनियादी जल निकासी और सुरक्षित सड़कें चाहिए या फिर बदहाल व्यवस्था के बीच मुफ्त योजनाओं का लॉलीपॉप?
'दे फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने स्पष्ट किया कि चाहे संसद में शिक्षा मंत्रालय से जुड़े विवादों से भागना हो, बिहार में हक मांगते युवाओं पर पुलिसिया सख्ती हो या दिल्ली में करदाताओं के पैसों की अनदेखी, जनता अब केवल बयानों और योजनाओं के दावों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकारें इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती हैं।
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