राजपथ: चंदा विवाद के बीच योगी की 'आम' सियासत, पंजाब कांग्रेस में रार
चंदा चोरी के आरोपों पर सियासी घमासान, लखनऊ में चारपाई पर बनी 2027 की रणनीति और पंजाब कांग्रेस में छिड़ा आपसी महासंग्राम।
Rajpath: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात के बीच, अयोध्या में रामलला के चढ़ावे और चंदे में हुई कथित हेराफेरी ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। द फेडरल देश के चर्चित शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इस महाघोटाले को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। शो में जहां एक तरफ यूपी के रसूखदारों पर पुलिसिया कार्रवाई न होने पर तीखी रिपोर्ट पेश की गई, वहीं देश को झकझोरने वाले इस चंदा विवाद के साथ-साथ यूपी की 'आम' डिप्लोमेसी और पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह का भी पूरा सच उजागर किया गया।
1. अयोध्या चंदा विवाद: छोटे प्यादों की बलि, बड़े मगरमच्छ कानून से दूर क्यों?
एंकर प्रदीप सहगल ने शो की शुरुआत में राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका पर सीधे सवाल खड़े किए। अयोध्या में रामलला के चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस ने आठ छोटे कर्मचारियों को तो गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा अभी तक पुलिस कार्रवाई की जद से बाहर हैं।
तारीखों का जादुई खेल और लीपापोती के आरोप
शो 'राजपथ' में कानूनी जानकारों के हवाले से बताया गया कि ट्रस्ट के बड़े हुक्मरानों को इस चोरी की भनक 4 जून को ही लग गई थी और 5 जून को कुछ संदिग्धों के घर से कैश भी बरामद हो गया था। इसके बावजूद, 7 जून को चंपत राय कैमरे के सामने आकर कहते हैं कि 'ऑडिट में कोई भी उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है।'
पानी सर से ऊपर गुजरने के बाद, घटना के करीब 20 दिन बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज कराई गई। कानून के मुताबिक, अपराध की जानकारी छिपाने और पुलिस को समय पर सूचना न देने के कारण ट्रस्टी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (अपराधिक साजिश) के तहत सीधे आरोपी बनते हैं, लेकिन उन पर कोई नकेल नहीं कसी गई है।
महंत नृत्य गोपाल दास का पत्र
इसी बीच ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक पत्र जारी कर इस चोरी पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वह इस कृत्य से आहत हैं और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताया है कि वे इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे।
2. यूपी में 'आम' डिप्लोमेसी: चारपाई बैठक से 'मिशन 2027' की घेराबंदी
जब देश में चंदा चोरी को लेकर विपक्ष हमलावर था, तब लखनऊ से एक अलग ही नजारा सामने आया, जिसे प्रदीप सहगल ने अपने शो में प्रमुखता से दिखाया। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेता नितिन नवीन चारपाई पर बैठकर देसी अंदाज में आम चूसते हुए नजर आए। विपक्ष ने इसे जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली 'आम...की गुठली' करार दिया।
हालांकि, इस चारपाई बैठक के पीछे 'मिशन 2027' का बड़ा सियासी संदेश छिपा था। नितिन नवीन ने साफ किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही भाजपा का सीएम चेहरा होंगे। वहीं, पिछले कुछ समय से दिल्ली के चक्कर काट रहे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सुर भी बदले नजर आए और उन्होंने कार्यकर्ताओं से योगी जी को तीसरी बार सीएम बनाना का आह्वान किया, जिससे भाजपा ने अपने आंतरिक डैमेज कंट्रोल का संदेश दे दिया है।
3. पंजाब कांग्रेस में 'लठम-लट्ठा': 2027 से पहले ही तलवारें खिंचीं
यूपी के बाद शो 'राजपथ' में पंजाब कांग्रेस की कलह पर भी बड़ी रिपोर्ट दिखाई गई। पंजाब में साल 2027 के चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने आपस में ही बगावत का बिगुल फूंक दिया है।
प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने जैसे ही अपनी नई कोर टीम की घोषणा की, पार्टी के 10 से 15 बड़े दिग्गजों के तेवर लाल हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की जोड़ी ने राजा वडिंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रंधावा को शांत करने के लिए पार्टी ने उन्हें टिकट बांटने वाली कोर टीम का चेयरमैन बनाया, लेकिन राजा वडिंग के खिलाफ उनकी अंदरूनी आग ठंडी नहीं हुई है।
पंजाब कांग्रेस के भीतर ठीक वैसा ही माहौल बनता दिख रहा है, जैसा 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू ने तैयार किया था। इस बार कैप्टन की जगह राजा वडिंग निशाने पर हैं और सिद्धू की भूमिका में चन्नी और रंधावा नजर आ रहे हैं।
जनता की अदालत में दल
एंकर प्रदीप सहगल ने शो के अंत में यह साफ संदेश दिया कि चाहे यूपी में आस्था के केंद्र पर हुए घपलों को 'हिंदू विरोधी' का ठप्पा लगाकर रफा-दफा करने की कोशिश हो, यूपी की 'आम' सियासत हो, या पंजाब में कांग्रेस की पुरानी गुटबाजी हो 2027 के चुनावी रण में जनता इन सभी मुद्दों का बारीकी से हिसाब चुकता करने के लिए तैयार बैठी है।
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