'राजपथ': पुलिस बर्बरता पर SC सख्त, ओवैसी का दांव और डूबी दिल्ली!
'दे फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल की रिपोर्ट: NEET प्रदर्शन पर SC की टिप्पणी, UP में ओवैसी के ऑफर पर अखिलेश का रुख और बारिश में डूबी दिल्ली।
Rajpath: 20 जुलाई की तारीख देश का युवा शायद ही कभी भूल पाए। जंतर-मंतर पर नीट (NEET) धांधली के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे भावी डॉक्टरों और इंजीनियरों पर जिस तरह लाठियां भांजी गईं, आंसू गैस के गोले दागे गए और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
'दे फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवरों, उत्तर प्रदेश के 2027 सियासी चक्रव्यूह और दिल्ली-NCR में पहली ही बारिश में खुले इंफ्रास्ट्रक्चर के पोल का तीखा विश्लेषण किया।
1. 20 जुलाई की पुलिसिया बर्बरता: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई क्लास
NEET धांधली के खिलाफ उठती आवाज़ों और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इस मामले की गूंज देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनाई दी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच में जब पुलिस कार्रवाई का मुद्दा पहुंचा, तो अदालत ने सरकार और पुलिस की जमकर क्लास लगाई।
संवैधानिक अधिकार की ढाल: सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि "शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। आंदोलन के नाम पर पुलिस की बर्बरता को किसी भी कीमत पर सही नहीं ठहराया जा सकता।"
सिक्के का दूसरा पहलू: हालांकि, CJI ने यह भी साफ किया कि प्रदर्शन की आड़ में पुलिसकर्मियों पर हमला होना भी गंभीर चिंता का विषय है और नियम सबके लिए बराबर हैं।
बड़ा सवाल: जिन पुलिस अधिकारियों ने नेताओं की शह पर छात्रों पर अंधाधुंध पैलेट गन चलाई और लाठियां भांजी, क्या अब उन पर कार्रवाई होगी? या फिर कानून-व्यवस्था का पाठ सिर्फ आम जनता को ही पढ़ाया जाएगा?
2. यूपी 2027 का चक्रव्यूह: ओवैसी ने बढ़ाया हाथ, अखिलेश का 'ना हां-ना ना'
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद से लखनऊ पहुंचकर समाजवादी पार्टी के सामने गठबंधन की पेशकश रखी।
अखिलेश की सियासी 'मुस्कान': राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी अखिलेश यादव ने ओवैसी के ऑफर पर सीधे तौर पर न तो 'हां' कहा और न ही 'ना'। अखिलेश ने मुस्कुराते हुए संदेश दे दिया कि "हमारा 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला ही काफी है।"
ना इनकार, ना इकरार: अखिलेश जानते हैं कि ओवैसी को साथ लेने से हिंदू वोट बैंक छिटक सकता है और खारिज करने से मुस्लिम वोटों में बिखराव का खतरा है। इसलिए उन्होंने ओवैसी को बिना घर में एंट्री दिए, अपने PDA कुनबे पर भरोसा जताया।
सियासी सवाल: क्या यूपी का मुस्लिम मतदाता ओवैसी के इस पैंतरे में फंसेगा, या अखिलेश का यह टालमटोल वाला दांव 2027 में गेमचेंजर साबित होगा?
3. दिल्ली बनी 'वेनिस': गाढ़ी कमाई का टैक्स पानी में बहा!
करोड़ों का टैक्स भरने वाले दिल्ली और NCR के नागरिकों के लिए 2026 का मानसून भी नारकीय मुसीबत लेकर आया है। पहली ही बारिश में पूरी राजधानी का इंफ्रास्ट्रक्चर पानी में डूब गया।
लंदन-पेरिस का दावा, बना दिया 'वेनिस': चुनावी रैलियों में दिल्ली को लंदन और पेरिस बनाने का दावा करने वाले हुक्मरानों की पोल खुल गई है। सड़कें जलमग्न हैं, गाड़ियां डूब रही हैं और घंटों तक पहिए थमे हुए हैं।
फाइलों में बजट की सफाई: नाले साफ हुए थे या सिर्फ अफसरों की फाइलों में कागजी बजट पास हुआ था? मिंटों का सफर तय करने में लोगों के पसीने छूट रहे हैं।
नागरिकों का दर्द: आम नागरिक की गाढ़ी कमाई का टैक्स आखिर कहां जा रहा है? ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी का हर्जाना आखिर आम जनता गाड़ियों की मरम्मत और ट्रैफिक की प्रताड़ना झेलकर क्यों चुकाए?
'दे फ़ेडरल देश' के शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने साफ किया कि चाहे सड़कों पर हक मांगते छात्रों पर लाठी-पैलेट गन चलाने वाले अफसर हों, यूपी चुनाव में शह-मात का खेल खेलने वाले नेता हों या फिर दिल्ली की जनता को पानी में डूबने के लिए छोड़ने वाले प्रशासनिक अधिकारी - अब जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। कोर्ट के सख्त रुख और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच देखना होगा कि सिस्टम में कितना सुधार आता है।

