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UP में UCC की आहट, क्या बिहार में NDA छोड़ेंगे नीतीश कुमार?

शो 'राजपथ' में प्रदीप सहगल का विश्लेषण: यूपी में UCC के प्रभाव, बिहार में JDU-RJD के ऑफर और अखिलेश यादव के 'वॉटर एक्सप्रेस-वे' के आरोपों की ज़मीनी हकीकत।


Rajpath: देश की राजनीति इस समय उस मोड़ पर खड़ी है, जहां हर एक बयान और हर एक फैसले के तार सीधे 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों से जुड़ रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है जिसमें उन्होंने 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का ऐलान किया है।

एक तरफ उत्तर प्रदेश में UCC लागू होने की सुगबुगाहट तेज़ हो गई है, तो दूसरी तरफ बिहार में इसी UCC के नाम पर सत्ता पलटने का खेल शुरू हो गया है। वहीं, यूपी में अखिलेश यादव ने बुनियादी ढांचे और 'पेपर लीक' को लेकर सीधे योगी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। 'द फ़ेडरल देश' के खास शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन तीनों सियासी तूफानों की 'ज़मीनी हकीकत' का कड़ा विश्लेषण किया है:

1. उत्तर प्रदेश: UCC से शादी, तलाक और 'लिव-इन' में क्या बदलेगा?

उत्तराखंड के बाद अब सबकी नज़रें देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश पर हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में UCC लागू करने की तैयारी राजनीतिक रूप से एक मास्टरस्ट्रोक हो सकती है। अगर उत्तराखंड के मॉडल को यूपी में अपनाया जाता है, तो आम आदमी की ज़िंदगी में चार बड़े बदलाव होंगे:

विवाह और तलाक: धर्म के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ खत्म होंगे। विवाह की न्यूनतम उम्र, पंजीकरण और तलाक के आधार (तथा गुज़ारा भत्ता) के लिए सभी धर्मों पर एक समान कानूनी प्रक्रिया लागू होगी।

विरासत और गोद लेना (Adoption): संपत्ति में बेटे-बेटियों और पति-पत्नी के अधिकारों को समान ढांचे में लाया जाएगा। गोद लेने के नियम भी सभी के लिए एक जैसे होंगे।

लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship): यह सबसे विवादास्पद हिस्सा है। उत्तराखंड की तर्ज़ पर यूपी में भी दो बालिगों के बिना शादी साथ रहने (लिव-इन) का सरकारी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो सकता है। यह सीधे तौर पर नागरिकों की 'निजता बनाम सरकारी दखल' की एक बड़ी बहस को जन्म देगा।

चुनावी विमर्श: भाजपा इसे 'समान अधिकार और महिला सशक्तिकरण' के रूप में पेश करेगी, जबकि विपक्ष इसे 'धार्मिक स्वतंत्रता और ध्रुवीकरण' का नाम देगा। असली परीक्षा इस बात की होगी कि ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद जैसे NDA के सहयोगी दल मसौदा (Draft) सामने आने पर क्या स्टैंड लेते हैं।

2. बिहार की सियासत: UCC पर JDU की बगावत और RJD का 'ऑफर'

अमित शाह के मुंबई में दिए गए UCC के बयान की गूंज सबसे तेज़ पटना में सुनाई दी है।

गठबंधन में दो सुर: बिहार में भाजपा की सहयोगी JDU के नेता श्याम रजक ने साफ कर दिया है कि बिहार में UCC लागू नहीं होने दिया जाएगा। कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी संभलकर बोलते हुए पहले 'ड्राफ्ट' देखने की बात कही है।

RJD का खुला निमंत्रण: JDU और BJP की इस दरार को देखते हुए RJD नेता भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार को वापस 'महागठबंधन' में आकर सरकार बनाने का खुला न्योता दे दिया है।

असली गणित: आरजेडी जानती है कि वह अकेले सत्ता में नहीं आ सकती। नीतीश कुमार उसके लिए सत्ता की चाबी हैं। दूसरी तरफ JDU में नीतीश कुमार के बाद नेतृत्व (निशांत कुमार) को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है।

18 सितंबर की बैठक: 18 सितंबर को पटना में JDU की एक बेहद अहम बैठक है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या JDU औपचारिक रूप से UCC का विरोध करती है? बिहार की राजनीति में फिलहाल सरकार गिरने से ज़्यादा, आरजेडी द्वारा खोले गए दरवाज़े से कौन अंदर आता है, यह देखना अहम होगा।

3. यूपी का संग्राम: अखिलेश का 'एक्सप्रेस-वे' और 'पेपर लीक' पर वार

2027 के यूपी चुनावों की ज़मीन अभी से तैयार हो रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बुनियादी ढांचे और युवाओं के मुद्दे पर सीधे सरकार को घेरा है:

'वॉटर' एक्सप्रेस-वे की हकीकत: अखिलेश ने बुंदेलखंड, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए गंगा एक्सप्रेस-वे को पहली बारिश में ही 'वॉटर एक्सप्रेस-वे' करार दिया। 'द फ़ेडरल देश' का मानना है कि सड़क की गुणवत्ता राजनीतिक दावों से नहीं, बल्कि ऑडिट, मरम्मत लागत और डेटा से तय होनी चाहिए।

पेपर लीक— युवाओं के भविष्य से खिलवाड़: बीस से अधिक भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने का दावा करते हुए अखिलेश ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाया। पेपर लीक सिर्फ एक कागज़ का लीक होना नहीं है, यह एक छात्र के दो-तीन साल, कमरे का किराया, कोचिंग की फीस और उसकी उम्र का बर्बाद होना है।

'चुंगीजीवी' और करोड़ों पौधों का सच: अखिलेश ने UPI पर लगने वाले चार्जेज को लेकर सरकार को 'चुंगीजीवी' (टोल वसूलने वाली) कहा। साथ ही सरकार के 200 करोड़ पौधे लगाने के दावे पर पूछा कि इनमें से कितने पौधे आज ज़िंदा हैं?

कानून-व्यवस्था: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को 'लेन-देन एजेंसी' बताकर और शाहजहांपुर के वायरल वीडियो का हवाला देकर अखिलेश ने भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार किया।

लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल पूछना और सरकार का काम जवाब देना है। लेकिन आम जनता को सिर्फ राजनीतिक नारों पर नहीं, बल्कि डेटा, ज़मीनी हकीकत और जवाबदेही के तराजू पर इन वादों को तौलना होगा।

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