'राजपथ': 12 साल में 'क्योटो' न बना बनारस, IIT दिल्ली में छात्र सुसाइड
'राजपथ' में प्रदीप सहगल का विश्लेषण: वाराणसी के क्योटो मॉडल का सच, UP में अखिलेश-योगी के कैश वादे और IIT दिल्ली में छात्र खुदकुशी पर भारी बवाल।
Rajpath: देश में बुनियादी विकास के दावों, चुनावी लोक-लुभावन घोषणाओं और शीर्ष शिक्षा संस्थानों के गिरते मानसिक स्वास्थ्य व प्रशासनिक ढांचे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 'द फ़ेडरल देश' के खास शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन तीन प्रमुख राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत इनसाइट एनालिसिस पेश किया।
1. 12 साल बाद भी 'क्योटो' न बना बनारस: 'वाटर पार्क' बनी स्मार्ट सिटी काशी
तारीख: 3 सितंबर 2014 - ठीक 12 साल पहले बनारस के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के साथ वाराणसी के विकास को लेकर एक बड़ा समझौता (MoU) किया था। तब मीडिया और चुनावी भाषणों में दावा किया गया था कि काशी को जापान के 'क्योटो' की तर्ज़ पर विकसित किया जाएगा।
अस्पताल के लिए तैरते स्ट्रेचर: 12 साल बाद काशी की ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि मूसलाधार बारिश में सड़कें लबालब भरी हैं, ज़्यादातर घाट पानी में समा चुके हैं और पूरा शहर तालाब बन गया है। अस्पताल जाने के लिए बीमार मरीजों को स्ट्रेचर पर लादकर घुटने भर गंदे और सीवर के पानी के बीच से घसीटकर ले जाया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी का सच और बजट का सवाल: अरबों-खरबों रुपये के फंड और स्मार्ट सिटी का बजट किस गटर में बह गया, इसका प्रशासनिक स्तर पर कोई जवाब नहीं है।
सवाल पूछने पर 'लेबल' का खेल: शो में सवाल उठाया गया कि यदि आम नागरिक बुनियादी सुविधाओं, सीवर और 12 साल के विकास का हिसाब मांगता है, तो प्रशासन व सत्ता पक्ष की ओर से जवाब देने के बजाय नागरिक को 'दिमागी नक्सल', 'जिहादी', 'पाकिस्तानी' या 'हिंदू विरोधी' जैसे ठप्पों और लेबल से नवाज दिया जाता है।
वीवीआईपी मूवमेंट बनाम आम बनारसी: चुनाव के वक्त फूलों की बारिश और रोड शो देखने वाले बनारस में वीवीआईपी दौरों के लिए तो मिनटों में रास्ते साफ हो जाते हैं, लेकिन आम नागरिक हर दिन उसी सीवर के पानी से गुजरने और जलभराव झेलने को मजबूर है।
2. उत्तर प्रदेश में 'कैश ट्रांसफर' की सियासत: डीबीटी (DBT) बनाम बुनियादी सेवाएँ
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच महिलाओं को साधने के लिए नकद सहायता (Direct Benefit Transfer) देने और रेवड़ी बाँटने की होड़ मच गई है।
अखिलेश यादव बनाम योगी सरकार: योगी सरकार द्वारा महिलाओं को 50 हज़ार रुपये देने के विचार की खबरों और बुजुर्ग महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा ऐलान किया है। अखिलेश ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर हर महिला को 40 हज़ार रुपये सालाना दिए जाएंगे और 12वीं पास बेटियों को लैपटॉप मिलेगा। अखिलेश ने तंज कसा कि सरकार उनकी योजनाएं चुरा रही है, इसलिए उन्हें अपना ऑफिस सील रखना पड़ेगा।
टैक्सपेयर्स का पैसा और बुनियादी सुविधाओं का सवाल: शो में विश्लेषण किया गया कि यह नकद राशि किसी नेता की निजी संपत्ति से नहीं, बल्कि आम जनता के टैक्स से भरे सरकारी खजाने से आती है।
क्या नकद सहायता बुनियादी सेवाओं का विकल्प है?: राजनीति के लिए स्कूल सुधारना, अस्पताल बनाना, रोजगार पैदा करना और कानून-व्यवस्था संभालना कठिन काम है, जबकि खाते में पैसे भेजना आसान औजार है। लेकिन सवाल यह है कि यदि सरकारी स्कूल जर्जर हैं, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं और सड़कें टूटी हैं, तो क्या खाते में 40 हजार रुपये आ जाने से नागरिक जीवन का स्तर सुधर जाएगा?
3. IIT दिल्ली में 30 महीनों में 8वीं खुदकुशी: कैंपस में छात्रों का आर-पार का संग्राम
देश के सबसे नामी शिक्षण संस्थान IIT दिल्ली के अंदर 31 वर्षीय एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश की दर्दनाक खुदकुशी के बाद भारी आक्रोश और बवाल मच गया है।
30 महीनों में 8 मौतें: छात्र सड़कों पर हैं, क्लासरूम खाली हैं और कैंपस में नारेबाजी गूंज रही है। बीते 30 महीनों के भीतर IIT दिल्ली में 8 छात्र अपनी जान दे चुके हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट : 'द फ़ेडरल देश' के संवाददाता अभिषेक रावत की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस इसे बीमारी और डिप्रेशन बता रही है, लेकिन छात्रों का आरोप है कि ऋषिकेश के बीमार होने पर उन्हें जबरन हॉस्टल खाली करने के लिए मजबूर किया गया, जिससे उनका मानसिक तनाव जानलेवा स्तर तक बढ़ गया।
प्रशासन से तीखे सवाल: आक्रोशित छात्र एसोसिएट डीन और विभागाध्यक्ष के इस्तीफे तथा पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आईआईटी प्रशासन कैमरे पर आने से बच रहा है और केवल लिखित जवाब में जांच कमेटी बनाने की बात कह रहा है। लेकिन सवाल वही है कि क्या सिर्फ एक कमेटी बना देने से 30 महीने में हुई 8 मौतों का हिसाब पूरा हो जाएगा?
Next Story

