राम मंदिर ट्रस्ट: चंपत राय OUT, राघव चड्ढा की वोटर लिस्ट पर रार!
राजपथ: राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव बने स्वामी गोविंद देव गिरि। राघव चड्ढा का नाम मोहाली वोटर लिस्ट से शिफ्टेड, मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को फिर हटाया।
Rajpath: द फ़ेडरल देश के चर्चित शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने देश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में मचे तीन बड़े भूचालों का विस्तृत और तीखा विश्लेषण किया है। पहले खंड में अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय के हटने के बाद पूर्व कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को महासचिव बनाए जाने और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की बतौर CEO नियुक्ति पर उठे सवालों की पड़ताल की गई। दूसरे खंड में पंजाब की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम 'शिफ्टेड' दर्ज होने के बाद बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच भड़की सियासी जंग का विश्लेषण हुआ। वहीं, तीसरे खंड में बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती द्वारा तीसरी बार अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाकर छोटे भाई ईशान आनंद को मंच पर लाने के दूरगामी राजनीतिक संकेतों की परतें खोली गईं।
1. राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: चंपत राय OUT, खजांची रहे गोविंद देव गिरि नए सर्वेसर्वा
अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर उठे सवालों के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। चंपत राय को महासचिव पद से हटाए जाने के बाद ट्रस्ट ने जो नई व्यवस्था बनाई है, उसने पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं:
कोषाध्यक्ष से सीधा प्रमोशन: ट्रस्ट ने चंपत राय की जगह स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को नया महासचिव (सर्वेसर्वा) नियुक्त किया है। विपक्ष (कांग्रेस और सपा) ने इसे 'बिल्ली को दूध की रखवाली' सौंपने जैसा करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि जिस खजांची के कार्यकाल में चंदा चोरी और हिसाब-किताब के आरोप लगे, उन्हें जवाबदेही तय करने के बजाय प्रमोट कर दिया गया।
दिल्ली दरबार से नजदीकी: स्वामी गोविंद देव गिरि की राजनीतिक और आध्यात्मिक ताकत 22 जनवरी 2024 को रामलला प्राण प्रतिष्ठा के दौरान दिखी थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिनों का उपवास उन्हीं के हाथों से जूस पीकर तोड़ा था।
कॉर्पोरेट मॉडल या 'बली का बकरा'?: ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। प्रशासनिक कामकाज अफसर संभालेंगे और संत धर्म-कर्म देखेंगे। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में किसी भी वित्तीय जांच या SIT रिपोर्ट में संतों को बचाने और ठीकरा अफसर के सिर फोड़ने के लिए यह नया प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया गया है।
2. पंजाब SIR वोटर लिस्ट विवाद: राघव चड्ढा हुए 'Shifted', AAP और BJP में ठनी
पंजाब में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक सियासी घमासान छेड़ दिया है:
मोहाली वोटर लिस्ट में 'शिफ्टेड' मार्क: पंजाब से बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम मोहाली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 'शिफ्टेड' श्रेणी में डाल दिया गया है, जिसका अर्थ है कि वे अब मोहाली के स्थायी निवासी नहीं रहे।
राघव चड्ढा का आरोप: चड्ढा ने आरोप लगाया कि जब से उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी है, आप सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। निचले स्तर के BLO से लेकर ERO/DEO तक पंजाब कैडर के अधिकारी हैं, जिन पर सरकार का दबाव है। उन्होंने चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के पैराग्राफ 4(d) का हवाला देते हुए कहा कि सांसदों, विधायकों और जजों के नाम 'प्रोटेक्टेड लिस्ट' में होते हैं, जिसका खुला उल्लंघन किया गया है।
आम आदमी पार्टी का पलटवार: 'आप' के मुख्य प्रवक्ता अनुराग ढांडा और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR सीधे ECI के अधीन है। 'आप' ने दावा किया कि चड्ढा वास्तव में दिल्ली में रहते हैं और चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार वे दिल्ली के राजेंद्र नगर से बैकडेट में वोटर आईडी बनवाने की अवैध कोशिश कर रहे हैं। अक्टूबर 2026 में अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले यह टकराव चरम पर पहुंच गया है।
3. बसपा में फिर चला बुआ का बुलडोज़र: आकाश आनंद तीसरी बार OUT, छोटे भाई ईशान IN?
लखनऊ में गुरुवार को 350 बड़े नेताओं की मौजूदगी में हुई बसपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संगठन में कोई भी नंबर-2 स्थायी नहीं हो सकता:
आकाश आनंद का फिर डिमोशन: मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को तीसरी बार राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया। मायावती की दलील है कि 2027 के यूपी, पंजाब और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के मद्देनजर विरोधियों के साम-दाम-दंड-भेद का मुकाबला करने के लिए आकाश में अभी राजनीतिक परिपक्वता (maturity) की कमी है।
बयानों की टाइमिंग बनी वजह: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हाथरस रैली में राहुल गांधी पर तंज ("50 साल के व्यक्ति को अंकल न कहूं तो क्या कहूं?") और केंद्र पर तीखे हमलों ने पार्टी नेतृत्व को असहज किया।
ईशान आनंद का नया सियासी उदय?: बैठक में जहां आकाश अनुपस्थित रहे, वहीं उनके छोटे भाई ईशान आनंद नीले पटके के साथ मंच पर मायावती और आनंद कुमार के बगल में नजर आए। राजनीतिक गलियारों में कयास हैं कि क्या बसपा में नए चेहरे की ताजपोशी की तैयारी हो रही है या यह महज पारिवारिक संतुलन है। बार-बार नेतृत्व बदलने से जमीनी कैडर और 2027 की चुनावी तैयारियों पर बड़ा असर पड़ना तय है।

