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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अनोखा विरोध: 'वोट चोरी की रासलीला' नाटक मंचन के बाद फूंका पुतला

दिल्ली में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के छात्र नेताओं व कार्यकर्ताओं ने एक अनोखे और 'Gen-Z' स्टाइल में विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने 'वोट चोरी की रासलीला' नाम से एक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया और रावण दहन की तर्ज पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका।


विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में हुई कथित धांधली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध की आग लगातार भड़कती जा रही है। राजधानी दिल्ली में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के छात्र-युवा कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक बेहद अनोखे और रचनात्मक (Innovative) तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र और संविधान से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला।

'वोट चोरी की रासलीला' नुक्कड़ नाटक के जरिए कसा तंज

इस प्रदर्शन की सबसे खास बात इसका प्रस्तुतीकरण था, जिसे आयोजकों ने 'Gen-Z' स्टाइल का नाम दिया। मौके पर मौजूद छात्र कार्यकर्ताओं ने 'वोट चोरी की रासलीला' नाम से एक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। इस नाटक के जरिए यह दर्शाने की कोशिश की गई कि किस प्रकार पर्दे के पीछे से मतदाता सूची में से करोड़ों वैध नागरिकों के नाम हटाए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हेरफेर किया जा रहा है। प्रदर्शन स्थल पर रामलीला के पात्रों की तर्ज पर प्रतीकात्मक भूमिकाएं निभाई गईं और संदेश दिया गया कि असत्य पर सत्य की जीत तय है।

दशहरे की तर्ज पर फूंका ज्ञानेश कुमार का पुतला

नुक्कड़ नाटक के बाद कार्यकर्ताओं ने दशहरे पर रावण दहन की तर्ज पर एक विशाल पुतला जलाया। इस पुतले के शीर्ष पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर लगाई गई थी। जैसे ही पुतले में आग लगाई गई, पूरा इलाका "वोट चोर... गद्दी छोड़" और "ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो" के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं का कहना था कि जिस तरह पौराणिक काल में रावण का अहंकार और अधर्म समाप्त हुआ था, ठीक उसी तरह आज के कलयुग में लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियों का अंत निश्चित है।

13.5 करोड़ वोटरों के नाम काटने का आरोप

प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर देश भर में 13.5 करोड़ से ज्यादा नागरिकों के वोट कार्ड रद्द कर दिए गए हैं या उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। यूथ कांग्रेस के नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को वोट देने का मौलिक अधिकार देता है। लेकिन चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के कारण करोड़ों लोग अपने इस संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं।" नेताओं ने आगे कहा कि ऑनलाइन सर्वे और जनमत के आधार पर यह साबित हो चुका है कि देश का युवा और नागरिक चुनाव आयोग के इन फैसलों से बेहद आक्रोशित हैं।

"रावण चाहे जितना बलवान, जीतेगा जनता का संविधान"

प्रदर्शन स्थल पर लहरा रहे पोस्टरों और बैनरों ने भी सभी का ध्यान खींचा। एक बड़े पोस्टर पर लिखा था— "रावण चाहे जितना बलवान, जीतेगा जनता का संविधान!"

मीडिया से बातचीत करते हुए एक महिला कार्यकर्ता ने बताया कि युवा कांग्रेस ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से लोगों से राय मांगी थी कि आज के दौर में लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी बुराई कौन है, जिस पर अधिकांश लोगों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। इसी जनभावना को प्रदर्शित करने के लिए इस पुतला दहन और नाटक का आयोजन किया गया।

नेताओं का दावा: इस्तीफा और जेल जाने तक जारी रहेगा संघर्ष

यूथ कांग्रेस के प्रवक्ताओं और छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते या इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होकर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह आंदोलन देश के कोने-कोने में इसी तरह जारी रहेगा।

नेताओं ने कहा, "यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के संविधान, लोकतंत्र और हर नागरिक के मताधिकार को बचाने की लड़ाई है। राहुल गांधी के नेतृत्व में देश का युवा इस तानाशाही और वोट चोरी के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ता रहेगा।"

जहाँ एक तरफ वोटर लिस्ट और एसआईआर का यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) की चौखट तक पहुँच चुका है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर युवाओं का यह उग्र और अभिनव प्रदर्शन यह बताने के लिए काफी है कि चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा अब एक बड़ा जन-आंदोलन रूप लेता जा रहा है।

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