सपा के PDA पर तावड़े का वार, राहुल के दखल से स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार
यूपी भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े ने PDA को कहा 'पराया धन अपना'। नीशू आज़ाद केस में राहुल गांधी के दखल के बाद गिरफ्तारी पर 'राजपथ' में प्रदीप सहगल का विश्लेषण।
Rajpath: उत्तर प्रदेश की चुनावी बिसात से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों तक सियासी पारा चढ़ चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने लखनऊ पहुंचते ही समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को निशाने पर लेकर 'पराया धन अपना' करार दिया। उधर दिल्ली में दलित छात्रा नीशू आज़ाद के पिता पर हुए जानलेवा हमले के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े रुख और छात्र-युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है।
डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक विश्लेषण शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने इन दोनों घटनाक्रमों, विपक्षी रणनीतियों और कानून-व्यवस्था के पीछे चल रही सियासी रस्साकशी की इनसाइड रिपोर्ट पेश की।
लखनऊ में तावड़े का वार: PDA को बताया 'पराया धन अपना'
उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। लखनऊ के पहले संगठनात्मक दौरे पर पहुंचे भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के प्रमुख सियासी समीकरण पर तीखा तंज कसा:
'पराया धन अपना' का जुमला: तावड़े ने दावा किया कि एनडीए आगामी चुनाव पूरी ताकत और एकजुटता से लड़ेगा। उन्होंने कहा, "सपा के लिए पीडीए का असली मतलब है 'पराया धन अपना'। एनडीए इसे हर हाल में नाकाम करेगा।"
10 साल का रिपोर्ट कार्ड बनाम चुनावी नारे: शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने सवाल उठाया कि एक दशक की डबल इंजन सरकार के बाद भाजपा रोजगार, कानून-व्यवस्था और प्राथमिक शिक्षा के ठोस आंकड़ों के बजाय विपक्षी नारों पर तंज और ऐतिहासिक प्रतीकों (जैसे औरंगजेब) के सहारे चुनावी विमर्श क्यों गढ़ रही है?
भागीदारी पर बहस: रिपोर्ट में रेखांकित किया गया कि यदि सपा का समीकरण गलत है, तो नीतिगत निर्णयों, भर्तियों और आरक्षण के वास्तविक क्रियान्वयन में दलित व पिछड़े वर्गों को कितनी ठोस हिस्सेदारी मिली है, यह मुख्य मुद्दा होना चाहिए। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए समीकरण को मिली सफलता के बाद भाजपा इस वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए आक्रामक रुख अपना रही है।
राहुल गांधी के दखल के बाद एक्शन: स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार
उधर राजधानी दिल्ली में दलित छात्रा नीशू आज़ाद के पिता संजय आज़ाद पर हुए हमले के मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा:
डेढ़ महीने की सुस्ती और वायरल वीडियो: पीड़ित परिवार हफ्तों तक न्याय के लिए थानों के चक्कर काटता रहा। मामला तब गरमाया जब आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वायरल हुआ, जिसमें वह बेखौफ होकर सिर फोड़ने (धारा 307) और राजनीतिक संरक्षण के चलते जेल न जाने की बात कहता नजर आया।
राहुल गांधी का सीधा प्रहार: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीड़िता नीशू आज़ाद को न्याय का भरोसा दिलाया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट लिखकर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा किया।
सड़कों पर उतरी सीजेपी: राहुल गांधी के बयान के बाद छात्र-युवा संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने संसद मार्ग (पार्लियामेंट स्ट्रीट) थाने का करीब 3 घंटे तक घेराव किया। चौतरफा दबाव के बाद पुलिस ने आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
क्रेडिट की होड़ और सियासी सवाल: 'राजपथ' में रेखांकित किया गया कि आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्षी खेमों में दलित और युवा मुद्दों पर बढ़त बनाने की होड़ मची है। वहीं कन्हैया कुमार को थप्पड़ मारने वाले दक्ष चौधरी जैसे दक्षिणपंथी चेहरों ने आरोपी के समर्थन में बयान देकर इसे नया मोड़ देने की कोशिश की।
निष्कर्ष: 'राजपथ' का बड़ा सवाल
शो 'राजपथ' में एंकर प्रदीप सहगल ने सवाल उठाया कि आखिर आम नागरिक की सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई के लिए देश के नेता प्रतिपक्ष के हस्तक्षेप और छात्रों के सड़क पर उतरने की नौबत क्यों आती है? चाहे यूपी में पीडीए के नाम पर सामाजिक समीकरणों की जंग हो या दिल्ली में दलित उत्पीड़न पर कानून-व्यवस्था की सुस्ती, दोनों ही मामलों से साफ है कि आने वाले चुनावों में दलित, पिछड़ा और युवा वर्ग ही राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।
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