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यूपी में वाह, बिहार में आह? भोजपुर एनकाउंटर से लेकर मंदिर चंदा चोरी तक सियासी घमासान

बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर की है, जिसने एनडीए गठबंधन के भीतर ही दोफाड़ कर दी है। वहीं अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की है, जिस पर बीजेपी नेता विनय कटियार के आरोपों के बाद आरएसएस को भी अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी है।


देश की राजनीति में कानून का तराजू अक्सर सियासी नफा-नुकसान देखकर झुकता है। बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद सूबे की सियासत का पारा अचानक गर्म हो गया है। उत्तर प्रदेश में जिस पुलिस एनकाउंटर मॉडल को अपराध के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' कहकर खूब वाहवाही बटोरी जाती है, बिहार की सीमा में दाखिल होते ही उस पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

हैरानी की बात यह है कि पटना से भोजपुर की दूरी महज 100 किलोमीटर है, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अब तक पीड़ित परिवार का दर्द बांटने नहीं पहुंचे हैं। दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान दिल्ली से हवाई जहाज पकड़कर सीधे भोजपुर लैंड कर गए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठा दी। मजेदार बात यह है कि सम्राट चौधरी और चिराग पासवान दोनों एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर एक ही घटना पर यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि यहाँ न्याय की नहीं, बल्कि अपने-अपने वोट बैंक को साधने की राजनीति चल रही है।

बगल में छुरी, मुख में राम: अयोध्या मंदिर में चंदा चोरी पर घमासान

बिहार के इस सियासी सर्कस के बीच उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक ऐसी खबर आई जिसने देश के करोड़ों राम भक्तों को झकझोर कर रख दिया। देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं ने पाई-पाई जोड़कर जो चढ़ावा रामलला के चरणों में अर्पित किया, उसमें चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस महा-घोटाले पर करीब एक महीने तक कुंभकर्णी नींद सोए रहने के बाद आखिरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की नींद टूटी।

संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सार्वजनिक रूप से बयान जारी कर ट्रस्ट में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की नसीहत दी है। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट बीजेपी के ही फायरब्रांड नेता विनय कटियार की एंट्री से आया। उन्होंने सीधे गबन के आरोप मढ़ते हुए ट्रस्ट के कुछ खास नुमाइंदों पर उंगली उठा दी। अपनी ही बिरादरी से उठे इन तीखे सवालों के बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत समेत पूरा विपक्ष अब सरकार पर हमलावर है। सवाल यह है कि क्या संघ का यह बयान वाकई इंसाफ के लिए है या सिर्फ अपनी साख बचाने का आखिरी डैमेज कंट्रोल?

अब बद्रीनाथ धाम निशाना: 'जहाँ मौका मिले, वहीं हाथ साफ़'

अभी अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे की हेराफेरी की गूंज शांत भी नहीं हुई थी कि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम से भी ऐसी ही सनसनीखेज खबर सामने आ गई। मानो इन घोटालेबाजों ने कसम खा रखी है कि जहाँ मौका मिले, वहीं आस्था का सौदा कर लो।

हिंदूवादी संगठन भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के सीईओ को एक शिकायती पत्र सौंपा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि 2 जुलाई की सुबह करीब 8:30 बजे चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी की यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन सोशल मीडिया पर मामला गरमाने के बाद मंदिर समिति ने तुरंत निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं।

ये तीनों ही मामले यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या कानून की परिभाषा अब अपराध देखकर नहीं, बल्कि चुनावी गणित देखकर तय होगी? और यदि भगवान के पवित्र धाम भी इन इंसानी भेड़ियों से सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का भरोसा कहाँ टिकेगा?

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