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ज्ञानेश कुमार हटाओ, लोकतंत्र बचाओ: बाराखंभा पर बगावत, अड़ गया विपक्ष!

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में इंडिया ब्लॉक ने दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर सोमवार को बाराखंभा रोड पर राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से आए हजारों कार्यकर्ता इकट्ठा हुए।


देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को राजनीतिक माहौल उस समय बेहद गरमा गया, जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में हुई कथित धांधली को लेकर इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया। दिल्ली की सड़कें नारों से गूंज उठीं और विपक्षी दलों के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक का एक बड़ा हुजूम देश की राजधानी में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एकत्र हुआ।

इस बड़े विरोध प्रदर्शन का केंद्र बिंदु दिल्ली का व्यस्त और प्रमुख इलाका 'बाराखंभा रोड' बना, जहां सुबह से ही कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। यह प्रदर्शन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए उस स्पष्ट आह्वान का नतीजा था, जिसमें उन्होंने देश में चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को बचाने के लिए सड़कों पर उतरने की बात कही थी। राहुल गांधी के इस आह्वान का असर ऐसा हुआ कि इसमें कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ शामिल हुए।

देश के कोने-कोने से पहुंचे हजारों कार्यकर्ता, यमराज का रूप धर जताया विरोध

बाराखंभा रोड पर उमड़ी यह भीड़ केवल दिल्ली या आसपास के इलाकों तक ही सीमित नहीं थी। इस आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए देश के अलग-अलग कोनों से लोग दिल्ली पहुंचे थे। राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और यहां तक कि पूर्वोत्तर राज्यों से भी हजारों की संख्या में कार्यकर्ता ट्रेनों और बसों से दिल्ली पहुंचे। कार्यकर्ताओं के जोश का आलम यह था कि पूरा बाराखंभा रोड विपक्षी दलों के झंडों, पोस्टरों और बैनरों से पट गया।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में भारतीय संविधान की प्रतियां साफ दिखाई दे रही थीं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे देश के संविधान और आम नागरिक के वोट देने के अधिकार की रक्षा करने के लिए यहां आए हैं। प्रदर्शन के दौरान "वोट चोर" और "ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो" जैसे तीखे नारे लगातार गूंजते रहे। विरोध दर्ज कराने का तरीका भी काफी अनोखा और ध्यानाकर्षण करने वाला रहा; कई कार्यकर्ताओं ने 'यमराज' का रूप धारण कर हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर लोकतंत्र की हत्या किए जाने के रूपक दर्शाए गए थे।

SIR प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में धांधली का गंभीर आरोप

इस पूरे आंदोलन की मुख्य वजह एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूचियों (Voter List) में कथित तौर पर हुई अनियमितताएं हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और कई जगहों पर फर्जी नाम जोड़े गए हैं, जिससे सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। विपक्ष का कहना है कि एक निष्पक्ष चुनाव आयोग का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के वोट की सुरक्षा करे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण नजर आ रहा है।

विपक्षी नेताओं ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव ही भारत के लोकतंत्र की नींव हैं। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों, वोट चोरी और कथित धांधली के दावों की जमीनी हकीकत क्या है, इसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस मुद्दे ने देश की राजनीति में एक बड़ा तूफान जरूर खड़ा कर दिया है।

पुलिस छावनी में तब्दील हुई दिल्ली, बस में सवार होकर निकले शीर्ष नेता

प्रदर्शन के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गए थे। विरोध प्रदर्शन के स्थान को लेकर किए गए सुरक्षा बदलावों के बावजूद विपक्षी कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत पूरे इलाके में दिल्ली पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और अन्य अर्धसैनिक बलों के जवानों की भारी तैनाती की गई थी। सुप्रीम कोर्ट जाने वाले रास्तों पर मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

लेकिन इन तमाम बंदिशों के बीच विरोध प्रदर्शन उस वक्त अपने सबसे बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया, जब विपक्षी दलों के तमाम बड़े दिग्गज नेता एक साथ मैदान में उतरे। एक अभूतपूर्व राजनीतिक दृश्य में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता सुप्रिया सुले और कई अन्य वरिष्ठ विपक्षी सांसद एक ही बस में सवार हुए। यह बस बाराखंभा रोड से सीधे देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की दिशा में मार्च के लिए निकली।

'जब तक इस्तीफा नहीं, तब तक आंदोलन नहीं थमेगा'

बस में सवार दिग्गजों और सड़कों पर चल रहे हजारों कार्यकर्ताओं का संदेश बिल्कुल साफ था। विपक्षी नेताओं ने मंच और मीडिया से बात करते हुए दो टूक कहा कि यह लड़ाई किसी एक चुनाव को जीतने या हारने की नहीं है, बल्कि यह लड़ाई चुनाव आयोग की गिरती साख को बचाने की है।

नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े बुनियादी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और चुनाव आयोग ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो इस प्रदर्शन की आंच आने वाले दिनों में देश के हर राज्य और हर जिले तक पहुंचेगी। अब पूरी देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार इस बड़े सियासी दबाव और आरोपों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाते हैं।

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