इंसाफ मांग रहे मां-बाप पर पुलिस का एक्शन! आधी रात को इंडिया गेट पर क्या हुआ?
इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता और कांग्रेस नेताओं की हिरासत पर सियासी घमासान तेज, कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग फिर उठी।
नई दिल्ली: उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड में इंसाफ की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर बुधवार को शुरू हुआ धरना गुरुवार तड़के पुलिस कार्रवाई के बाद खत्म हो गया। सुबह करीब चार बजे पुलिस ने अंकिता के माता-पिता और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया। सभी को बाद में छोड़ दिया गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने बुधवार शाम परिवार से मुलाकात कर समर्थन दिया था।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर विरोध
विवाद की वजह बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति है। अंकिता के परिवार ने राष्ट्रपति से मांग की है कि कथित वीआईपी कनेक्शन की सीबीआई जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। गौतम ने अपने खिलाफ आरोपों से इनकार किया है।
माता-पिता का 24 घंटे का अल्टीमेटम
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सरकार को 24 घंटे में नियुक्ति रद्द करने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गई तो देशव्यापी आंदोलन होगा। मां सोनी देवी ने कहा कि धरने की अनुमति नहीं मिली तो वह घर से भूख हड़ताल करेंगी।
राहुल गांधी और कांग्रेस का हमला
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चार साल बाद भी परिवार को पूरा न्याय नहीं मिला, जबकि कथित वीआईपी आरोपी को संवैधानिक पद दिया गया। गुरुवार को उन्होंने तड़के हुई हिरासत की कार्रवाई की भी आलोचना की।पवन खेड़ा ने पुलिस कार्रवाई को बर्बरता बताया। सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठाया कि न्याय मांग रहे माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। काजी निजामुद्दीन ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
दीपके ने बताया शर्मनाक
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस कार्रवाई का वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता ऐसे अमानवीय व्यवहार के हकदार नहीं हैं। उन्होंने सरकार पर नागरिकों के साथ क्रूरता करने का आरोप लगाया।
क्या है पूरा मामला?
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि अंकिता पर कथित तौर पर रिजॉर्ट में आने वाले एक वीआईपी मेहमान को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उन्होंने विरोध किया था। 18 सितंबर को अंकिता लापता हुईं और 24 सितंबर को उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ।
मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया। मई 2025 में अदालत ने तीनों को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि परिवार शुरू से ही कथित वीआईपी की पहचान उजागर करने और उसकी भूमिका की जांच की मांग करता रहा है।
दिसंबर 2025 में सामने आए कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप के बाद वीआईपी की पहचान को लेकर विवाद फिर बढ़ा। इनमें बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम का नाम जोड़ा गया, हालांकि उन्होंने आरोपों को खारिज किया है। जनवरी 2026 में उत्तराखंड सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की और केंद्रीय एजेंसी ने मामले की जांच शुरू की। परिवार चाहता है कि जांच खास तौर पर कथित वीआईपी की भूमिका और हत्या के मकसद पर केंद्रित हो। अभी तक गौतम को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है।

