मध्य प्रदेश में युवा बने सियासत का नया मैदान, आमने-सामने बीजेपी-संघ और राहुल गांधी?
19 सितंबर को इंदौर का मैदान केवल राहुल गांधी की छात्रों की गूंज का मैदान नहीं होगा. यह इस बात का भी टेस्ट होगा कि मध्य प्रदेश के युवाओं की ‘गूंज’ आखिर किस सियासी खेमे में सुनाई पड़ती है.
क्या युवा और छात्र मध्य प्रदेश की राजनीति में बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में आ चुके हैं. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम करने जा रहे हैं. अब तक वे राजस्थान के कोटा, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, उत्तर प्रदेश में प्रयागराज और महाराष्ट्र के पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिए युवाओं से मुखातिब हुए थे. छात्रों की गूंज का पाँचवाँ कार्यक्रम इंदौर में होने जा रहा है. लेकिन राहुल गांधी के युवाओं छात्रों के साथ संवाद को लेकर पहले से ही मध्य प्रदेश में सियासी तलवार खिंची हुई है. लेकिन राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले मध्य प्रदेश में बीजेपी और संघ भी एक्टिव हो गई है.
17 सितंबर ... जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है उस दिन इंदौर, मंदसौर और उज्जैन में नितिन नबीन का कार्यक्रम प्रस्वावित है. तो संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मध्य प्रदेश के उज्जैन आ रहे हैं जहां वे युवा धर्म संसद में युवाओं से संवाद करेंगे. तो सवाल उठता है क्यों बीजेपी और संघ को राहुल के छात्रों के साथ संवाद से पहले मध्य प्रदेश में दनादन कार्यक्रम बनाना पड़ गया जिसे उसने हिंदुत्व की लैब्रोटरी बना रखा है.
ये हफ्ता देश की राजनीति और खासतौर से मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद रोमांचक रहने वाला है. युवा और छात्र मध्य प्रदेश में अब सियासी लड़ाई का नया मैदान बनने जा रहे हैं. ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम की अगली कड़ी करने जा रहे हैं. लेकिन राहुल के इंदौर में कार्यक्रम से पहले मध्य प्रदेश में बीजेपी और संघ ने अपने कार्यक्रमों का मेगा प्लान बना लिया है. राहुल के इंदौर आने से पहले 17 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन मध्य प्रदेश पहुंच रहे हैं. इंदौर, मंदसौर और उज्जैन में उनके कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. वहीं RSS प्रमुख मोहन भागवत भी 17 और 18 सितंबर को उज्जैन में रहेंगे. खास बात यह है कि 18 सितंबर को भागवत ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं से संवाद करेंगे और इसके ठीक अगले दिन राहुल गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों के बीच पहुंचेंगे.
यह महज कार्यक्रमों का संयोग है या मध्य प्रदेश में युवाओं को लेकर बीजेपी-संघ और कांग्रेस के बीच एक नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है? इस कहानी का दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण पहलू राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर चला वेन्यू और अनुमति का विवाद है. कांग्रेस पहले 12 सितंबर को इंदौर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में राहुल गांधी का कार्यक्रम करना चाहती थी, लेकिन प्रशासन ने स्टेडियम में छात्रों की गूंज करने की इजाजत नहीं दी. कार्यक्रम टला और तारीख बदलकर 19 सितंबर करनी पड़ी. इसके बाद कांग्रेस ने वैकल्पिक मैदान तलाशे और आखिरकार रीजनल पार्क के सामने आईडीए मैदान तक बात पहुंची. कांग्रेस ने मैदान के लिए करीब 10 लाख रुपये से ज्यादा रकम जमा किए. कांग्रेस का दावा है कि ‘छात्रों की गूंज’ के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है. कार्यक्रम स्थल पर करीब पांच एकड़ में विशाल वॉटरप्रूफ डोम तैयार किया जा रहा है. पार्टी का दावा है कि इसमें करीब एक लाख छात्रों के बैठने की व्यवस्था होगी.
लेकिन कांग्रेस इस कार्यक्रम को सामान्य राजनीतिक रैली की तरह पेश नहीं करना चाहती. पार्टी का दावा है कि मैदान में पार्टी कार्यकर्ताओं की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी. फोकस केवल छात्रों और राहुल गांधी के बीच सीधे संवाद पर रखा जाएगा. लेकिन यहीं से राजनीतिक सवाल बड़ा हो जाता है. आखिर राहुल गांधी मध्य प्रदेश के युवाओं से ऐसा क्या संवाद करने जा रहे हैं कि कार्यक्रम से पहले ही उसकी तारीख, मैदान और अनुमति सियासी चर्चा का विषय बन गई?
और इससे भी बड़ा सवाल ....राहुल के पहुंचने से ठीक पहले बीजेपी और संघ भी युवाओं के बीच सक्रिय क्यों दिखाई दे रही है? आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 18 सितंबर को ‘युवा धर्म संसद’ में राष्ट्र, समाज, संस्कृति और युवाओं की भूमिका पर संवाद करेंगे. दूसरी तरफ राहुल गांधी अगले ही दिन छात्रों के सवाल, उनकी समस्याएं और चुनौतियां सुनने वाले हैं. आपको याद होगा संघ प्रमुख मुंबई में भी जेन-जी के साथ एक संवाद कर चुके हैं. इसलिए मध्य प्रदेश में मुकाबला केवल कांग्रेस बनाम बीजेपी का नहीं दिखता है. इसके केंद्र में ये भी सवाल है कि युवा किसकी बात सुने? युवा किसके नैरेटिव पर भरोसा करे?

