
बंगाल : दुर्गा पूजा का ‘BJP मेकओवर’, ममता का कार्निवल खत्म; महालया पर मोदी का मेगा शो
बंगाल में नई सरकार के दौर में दुर्गा पूजा से जुड़े आयोजनों का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। महालया के बड़े आयोजन और अंतरराष्ट्रीय पूजा प्रीव्यू के जरिए संस्कृति, पर्यटन और राजनीति का नया मेल सामने आ रहा है।
सत्ता में अपने पहले ही साल में, BJP सरकार पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा की परंपरा पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार कई पहल कर रही है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईडन गार्डन्स में 'महालय' कार्यक्रम की भव्य शुरुआत और अडानी ग्रुप द्वारा राजनयिकों, कलाकारों और दूसरे विदेशी मेहमानों के लिए पूजा का इंटरनेशनल प्रीव्यू शामिल है।
ये कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं जब सरकार राज्य भर की हज़ारों पूजा कमेटियों के साथ अपने संबंध बनाना चाहती है। यह एक ऐसा नेटवर्क है जिसे पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने ग्रांट, छूट, मंत्रियों के संरक्षण और सालाना 'रेड रोड कार्निवल' के ज़रिए बहुत मेहनत से तैयार किया था।
BJP सरकार ने पूजा कमेटियों के लिए आर्थिक मदद तो जारी रखी है, लेकिन TMC सरकार द्वारा 2016 में शुरू किए गए कार्निवल को खत्म कर दिया है। साथ ही, सरकार ने महालया, पारंपरिक रीति-रिवाजों और त्योहार के हिंदू धार्मिक स्वरूप पर ज़्यादा ज़ोर दिया है।
महालया मुख्य आकर्षण होगा
10 अक्टूबर को होने वाला महालया कार्यक्रम, राज्य सरकार द्वारा आयोजित सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा। यह कार्यक्रम 'देवी पक्ष' की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह 15 दिनों का चंद्र पखवाड़ा दुर्गा पूजा से पहले आता है और बंगाल में इसे पारंपरिक रूप से देवी दुर्गा के अपने मायके आने के समय के तौर पर मनाया जाता है।
राज्य सरकार पहली बार महालया के मौके पर एक खास सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रही है। महालया पारंपरिक रूप से दुर्गा पूजा की उल्टी गिनती शुरू होने का संकेत देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ईडन गार्डन्स में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहाँ गायिका कौशिकी चक्रवर्ती, संगीतकार शांतनु मोइत्रा, पार्श्व गायक शान और लोक संगीत बैंड 'दोहर' अपनी प्रस्तुति देंगे। दुर्गा पूजा के जश्न का अहम हिस्सा माने जाने वाले पारंपरिक ढोल वादक, जिन्हें 'ढाकी' कहा जाता है, उनमें से लगभग 15,000 कलाकार भी इसमें हिस्सा लेंगे।
इस कार्यक्रम में बंगाल के अलग-अलग हिस्सों से लोक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी, साथ ही ड्रोन शो और बड़े पैमाने पर विज़ुअल डिस्प्ले भी दिखाए जाएँगे।
‘महालया’ कोलकाता से आगे बढ़ा
सरकार कोलकाता के बाहर भी महालया कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है, जिसमें सिलीगुड़ी, बहरामपुर, दुर्गापुर, दीघा, बिष्णुपुर, मालदा और नंदीग्राम शामिल हैं। इस कार्यक्रम को त्योहार के दौरान बीजेपी सरकार के एक बड़े शोपीस के तौर पर देखा जा रहा है, ठीक वैसे ही जैसे पिछली टीएमसी सरकार के समय पूजा कार्निवल हुआ करता था।
उम्मीद है कि ईडन गार्डन्स के कार्यक्रम का इस्तेमाल राज्य भर में हज़ारों पूजा समारोहों के वर्चुअल उद्घाटन के लिए किया जाएगा, जिससे बीजेपी सरकार को सत्ता में रहते हुए अपनी पहली दुर्गा पूजा के लिए एक ही बार में बड़े पैमाने पर लॉन्च का मौका मिलेगा।
कार्निवल का समापन
ममता बनर्जी के कार्यकाल में, त्योहार के दौरान राज्य सरकार का सबसे प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रम कार्निवल हुआ करता था, जिसमें चुनिंदा पूजा समितियां विसर्जन से पहले एक रंग-बिरंगे जुलूस में भाग लेती थीं।
भारी भीड़ को आकर्षित करने वाले इस कार्यक्रम को अब रद्द कर दिया गया है। इसके बजाय, भाजपा सरकार ने फैसला किया है कि आधिकारिक राज्य उत्सव की शुरुआत महालया से होगी।
प्रशासन ने पूजा समितियों से यह भी कहा है कि वे महालया से पहले उद्घाटन न करें और इस बात पर जोर दिया है कि त्योहार पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह भी महालया से पहले किसी पूजा का उद्घाटन नहीं करेंगे।
आर्थिक मदद जारी है
हालांकि, बीजेपी सरकार ने ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई पूजा कमेटियों को आर्थिक मदद देने की व्यवस्था को जारी रखा है।
सरकार ने इस साल के लिए ग्रांट की रकम 1 लाख रुपये तय की है और बड़ी व आर्थिक रूप से मजबूत कमेटियों से अपील की है कि वे यह मदद न लें, ताकि इसे छोटे आयोजकों को दिया जा सके।
ममता ने 2018 में पूजा कमेटियों को ग्रांट देना शुरू किया था। शुरुआत में उन्होंने करीब 28,000 कमेटियों को 10,000-10,000 रुपये दिए थे। बाद में यह रकम कई बार बढ़ाई गई और पिछले साल यह 1.10 लाख रुपये तक पहुंच गई, जबकि मदद पाने वाली कमेटियों की संख्या 40,000 से ज़्यादा हो गई। सरकार ने बिजली बिल और दूसरे खर्चों में भी छूट दी थी।
ये ग्रांट पूजा नेटवर्क के साथ राजनीतिक संबंध बनाने की ममता की कोशिश का ही एक हिस्सा थे।
राजनीति में एक नई मौजूदगी
वे हर साल खुद कई पूजा कार्यक्रमों का उद्घाटन करती थीं, जबकि मंत्री और TMC नेता प्रमुख पूजा कमेटियों से गहराई से जुड़े हुए थे। सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं और दूसरी पहलों के प्रचार के लिए भी पूजा कार्यक्रमों का इस्तेमाल करने लगी थी।
चुनाव में जीत के बाद, BJP अब इनमें से कुछ जगहों पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।
यह बदलाव 'सुरुचि संघ' जैसी कमेटियों में साफ़ दिखता है, जो पहले मंत्री अरूप बिस्वास से गहराई से जुड़ी हुई थीं। इस साल BJP विधायक सौरव सिकदार ने इस कमेटी में एक अहम जगह बना ली है। साथ ही, BJP नेताओं से जुड़े पूजा आयोजकों का एक बड़ा नेटवर्क बनाने की कोशिशें भी की जा रही हैं।
अडानी ग्रुप की एंट्री
अडानी ग्रुप की एंट्री बीजेपी सरकार की एक और अहम पहल है और इसे सरकार के कार्यकाल में दुर्गा पूजा में कॉर्पोरेट की ज़्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने के तौर पर देखा जा रहा है।
गुरुवार (24 सितंबर) को राज्य सरकार ने अडानी एंटरप्राइजेज के साथ दो MoU पर साइन किए। इनमें से एक 'राइटर्स बिल्डिंग' के जीर्णोद्धार और संरक्षण से जुड़ा है, जबकि दूसरा दुर्गा पूजा और बंगाल की कलात्मक विरासत से जुड़ी सांस्कृतिक पहलों से संबंधित है।
इस व्यवस्था के तहत, अडानी ग्रुप 10 से 12 अक्टूबर तक अपना पहला दुर्गा पूजा प्रीव्यू टूर आयोजित करेगा। त्योहार के दौरान आम लोगों की भीड़ आने से पहले, चुने हुए मेहमानों—जिनमें राजनयिक, विदेशी पर्यटक, कलाकार, शिक्षाविद और कॉर्पोरेट प्रतिनिधि शामिल होंगे—को कोलकाता में पूजा के चुनिंदा पंडालों का खास टूर कराया जाएगा।
बंगाल की पूजा को ग्लोबल बनाना
ये विज़िट शाम 6 बजे से सुबह करीब 4 बजे तक होंगी और एंट्री इनविटेशन और QR-बेस्ड रजिस्ट्रेशन के ज़रिए मैनेज की जाएगी।
इस पहल की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, “इस प्रीव्यू में आठ से 10 पूजा शामिल होने की उम्मीद है। इसका मकसद बंगाल की पूजा, उसके कलाकारों, कारीगरों और पारंपरिक कलाओं को इंटरनेशनल दर्शकों के सामने पेश करना है। उम्मीद है कि अडानी फ़ाउंडेशन कुछ पूजा कमेटियों और त्योहार से जुड़े लोकल बिज़नेस को भी सपोर्ट करेगा।”
दुर्गा पूजा पहले ही बंगाल के सबसे बड़े आर्थिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बन चुकी है। राज्य सरकार की ओर से ब्रिटिश काउंसिल की एक स्टडी में 2019 में इस त्योहार से जुड़ी क्रिएटिव इकॉनमी का अनुमान 32,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा लगाया गया था। हाल के अनुमानों में पूजा से जुड़ी कुल इकॉनमी को लगभग 65,000 करोड़ रुपये आंका गया है।
पूजा की पहचान पर बहस
बीजेपी का पूजा से जुड़ा यह अभियान ऐसे समय में चल रहा है जब बंगाल की दुर्गा पूजा के सार्वजनिक स्वरूप के बदलने को लेकर बहस छिड़ी हुई है। त्योहार के दौरान शाकाहारी और मांसाहारी खाने को लेकर विवाद और सनातन परंपराओं पर ज़्यादा ज़ोर देने की मांगों के कारण आलोचकों का आरोप है कि इस त्योहार को एक स्पष्ट हिंदू पहचान देने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, बंगाल में बीजेपी नेतृत्व ने ऐसी पाबंदियों का एक जैसा समर्थन नहीं किया है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने खुद मछली को प्रसाद के तौर पर इस्तेमाल करने की बंगाली परंपरा का बचाव किया है, जबकि राज्य बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा है कि बंगालियों को क्या खाना चाहिए, यह किसी को तय नहीं करना चाहिए।

