दिल्ली को 'पेरिस' बनाने का सच! गड्ढों में तब्दील न्यू रोहतक रोड
द फ़ेडरल देश के शो 'ज़मीनी हकीकत' में न्यू रोहतक रोड का रियलिटी चेक। देखें कैसे गड्ढों, धूल और जाम की मार झेल रहे हैं आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र के लोग व चालक।
Zamini Hakikat: राजधानी दिल्ली को 'पेरिस' और विश्वस्तरीय शहर बनाने के दावे हर चुनावी मौसम में जोर-शोर से किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। 'द फ़ेडरल देश' के खास कार्यक्रम ‘ज़मीनी हकीकत’ के तहत संवाददाता अभिषेक रावत ने दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली प्रमुख सड़कों में से एक न्यू रोहतक रोड और आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र का जायजा लिया। ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि दिल्ली से हरियाणा को जोड़ने वाला यह व्यस्ततम मार्ग प्रशासनिक उपेक्षा, बदहाली और भारी जाम की मार झेल रहा है।
1.8 किमी का सफर और आधे घंटे की बर्बादी
ग्राउंड पड़ताल की शुरुआत ऐतिहासिक लिबर्टी सिनेमा से हुई।
समय की भारी बर्बादी: लिबर्टी सिनेमा से आनंद पर्वत तक की दूरी महज 1.8 किलोमीटर है। सामान्य दिनों में इस दूरी को तय करने में 2 से 3 मिनट का समय लगना चाहिए, लेकिन सड़क पर फैले जानलेवा गड्ढों, उड़ती धूल और अव्यवस्थित ट्रैफिक के कारण इस छोटे से हिस्से को पार करने में 25 से 30 मिनट लग रहे हैं।
पीक आवर्स में हालात बेकाबू: सुबह 8 से 11 बजे और शाम 6 से रात 10 बजे के दौरान स्थिति भयानक जाम में बदल जाती है, जिससे दफ्तर और कारोबार के सिलसिले में निकलने वाले लोगों का बुरा हाल है।
स्थानीय लोगों व चालकों का छलका दर्द
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सड़क का दैनिक इस्तेमाल करने वाले स्थानीय लोगों, दुकानदारों और ड्राइवरों ने अपनी परेशानियां साझा कीं:
गंगाराम (स्थानीय मैकेनिक): पिछले 40 वर्षों से इलाके में काम कर रहे गंगाराम ने बताया कि सड़क की यह बदहाली पिछले एक-डेढ़ साल से लगातार बनी हुई है। गड्ढों की वजह से आए दिन दोपहिया व तिपहिया वाहन पलटते हैं और लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं।
अमरजीत (कमर्शियल वाहन चालक): अमरजीत के अनुसार, महीने भर पहले बिछाई गई इंटरलॉकिंग टाइलें पहली बारिश में ही उखड़ गईं। जाम और गड्ढों के कारण सीएनजी की खपत दोगुनी हो गई है। ढलान और चढ़ाई पर गाड़ियां फंस जाती हैं, जिन्हें धक्का लगाकर निकालना पड़ता है।
शिवकुमार पाल (ई-रिक्शा चालक): करोल बाग से माल ढोने वाले शिवकुमार ने बताया कि गहरे गड्ढे में ई-रिक्शा पलटने से उनका भारी आर्थिक नुकसान हुआ। हल्की बारिश में भी सड़क के गड्ढे छिप जाते हैं, जिससे जान का जोखिम बढ़ जाता है।
कविंदर तिवारी (स्थानीय दुकानदार): पिछले चार दशकों से दिल्ली में रह रहे कविंदर तिवारी का गुस्सा फूटा। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले केबल और पाइपलाइन डालने के नाम पर खुदाई की गई, लेकिन उसके बाद सड़क को यूं ही छोड़ दिया गया। पहली ही बरसात में सड़क तालाब की शक्ल अख्तियार कर लेती है।
धूल, प्रदूषण और स्वास्थ्य पर दोहरा संकट
सड़क की गिट्टियां उखड़ने और लगातार भारी वाहनों के गुजरने से हवा में चौबीसों घंटे धूल का गुबार छाया रहता है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का सांस लेना दूभर हो गया है। प्रशासन की तरफ से कभी-कभार खानापूरी के लिए गड्ढों में कच्ची मिट्टी या मलबा डाल दिया जाता है, जो सूखने पर धूल बनकर प्रदूषण बढ़ाता है और बारिश में दलदल का रूप ले लेता है।
अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी और प्रशासनिक लापरवाही
न्यू रोहतक रोड सिर्फ एक स्थानीय सड़क नहीं, बल्कि दिल्ली से हरियाणा (रोहतक, बहादुरगढ़) और आगे पंजाब व जम्मू-कश्मीर तक जाने वाले ट्रैफिक के लिए एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन है। इसके बावजूद:
लावारिस छोड़ दिया गया मार्ग: पीडब्ल्यूडी (PWD) और स्थानीय एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के चलते सड़क का मेंटेनेंस पूरी तरह ठप है।
बुनियादी ढांचे की नाकामी: उद्योग और व्यापार का बड़ा केंद्र होने के बावजूद आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र तक पहुंचना किसी जंग जीतने जैसा बन चुका है।

