SRCC में PM मोदी के भाषण पर क्या बोले छात्र: ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा
SRCC शताब्दी समारोह में PM मोदी के संबोधन के बाद छात्रों से खास बातचीत। रोजगार, 'दिमागी नक्सल' बयान और E20 पेट्रोल पर 'द फ़ेडरल देश' की ग्राउंड रिपोर्ट।
Siyasat: दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद परिसर के छात्रों में उत्साह और समीक्षा का मिला-जुला माहौल देखने को मिला। शिक्षक दिवस के अवसर पर 13 साल बाद एसआरसीसी पहुंचे प्रधानमंत्री ने छात्रों से 'जेन-जी' (Gen-Z) शैली में संवाद किया, 100 रुपये के विशेष स्मारक सिक्के का अनावरण किया और लाल किले की प्राचीर से चर्चित हुए 'दिमागी नक्सल' शब्द सहित अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर बात की।
कार्यक्रम की समाप्ति के बाद डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के संवाददाता प्रदीप सहगल ने कार्यक्रम में मौजूद छात्रों से सीधे बातचीत की और जाना कि देश में चल रहे छात्र आंदोलनों, रोजगार के संकट और सरकारी नीतियों पर आज का युवा क्या सोचता है।
रोजगार के सवाल पर सीधा नहीं, पर अप्रत्यक्ष संदेश
देशभर में चल रहे छात्र असंतोष और नौकरियों के अवसरों पर जब छात्रों से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने माना कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में रोजगार को लेकर कोई सीधी घोषणा नहीं की।
छात्रों का कहना था कि प्रधानमंत्री ने टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर बिक्री में बढ़ोतरी जैसे आर्थिक आंकड़ों के जरिए यह समझाने का प्रयास किया कि जब अर्थव्यवस्था में खपत और उत्पादन बढ़ता है, तो रोजगार के नए अवसर अपने आप सृजित होते हैं।
एक छात्र ने कहा कि सीधे रोजगार की गारंटी न मिलने के बावजूद देश के आर्थिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से भविष्य में सुधार की उम्मीद दिखाई देती है।
'दिमागी नक्सल' और जेन-जी को साधने की कोशिश
लाल किले से दिए गए 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर छात्रों ने अपनी राय रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन युवाओं को देश निर्माण के उनके कर्तव्यों की याद दिलाने और नकारात्मक नैरेटिव से दूर रखने पर केंद्रित था। छात्रों के अनुसार, पीएम ने अपने पिछले 12 वर्षों के कार्यों का ब्योरा देकर यह बताने की कोशिश की कि सरकार युवाओं के लिए किस तरह काम कर रही है।
शिक्षा व्यवस्था पर सरकार की रेटिंग
जब छात्रों से पूछा गया कि वे पिछले 12 वर्षों में शिक्षा और युवा नीतियों के आधार पर केंद्र सरकार को 10 में से कितने अंक देंगे, तो अधिकांश छात्रों ने सरकार को 10 में से 7 से 8 अंक दिए।
छात्रों का मानना था कि किसी भी व्यवस्था के दो पहलू होते हैं। इस सरकार ने कई क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है, लेकिन साथ ही कई बुनियादी समस्याएं भी हैं जिनमें सुधार की सख्त जरूरत है।
E20 पेट्रोल ब्लेंडिंग पर छात्रों की तकनीकी समझ
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान छात्रों ने सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि रोजमर्रा की आर्थिक नीतियों पर भी खुलकर बात की। 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर छात्रों ने गंभीर बिंदु उठाए:
एक छात्र ने तर्क दिया कि सरकार को बिना जनता से व्यापक संवाद किए E20 लागू नहीं करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि 100% शुद्ध पेट्रोल का विकल्प हर पेट्रोल पंप पर उचित मूल्य पर उपलब्ध होना चाहिए, जबकि अभी वह लगभग 170 रुपये प्रति लीटर मिलता है और आसानी से नहीं मिलता।
छात्र का यह भी कहना था कि चूंकि 2023 के बाद की गाड़ियां ही पूरी तरह E20 के अनुकूल हैं, इसलिए इस नीति को चरणबद्ध तरीके से 2030-32 तक पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए था, न कि इसे समय से पहले लागू कर जनता पर बोझ डाला जाए।
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