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सियासत: फॉर्म 6 विवाद में फंसे CEC ज्ञानेश कुमार, EC में बगावत

ECI में फॉर्म 6 और SIR को लेकर विवाद। चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट वाले दावे पर उठे सवाल। मायावती ने की बैलेट पेपर की मांग, INDIA गठबंधन भी आक्रामक।


Siyasat: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच अधिकारों, मतदाता सूची संशोधन और फॉर्म 6 को लेकर टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। 26 सितंबर को आयोग की हुई अहम बैठक के बाद जारी दो पन्नों की प्रेस रिलीज में दावा किया गया कि 'फॉर्म 6' के साथ जुड़े नए घोषणापत्र (Declaration) को सुप्रीम कोर्ट ने मई में बिहार एसआईआर (SIR) मामले में सही ठहराया था। हालांकि, कानूनी रिपोर्टों और कानूनी जानकारों के खुलासे के बाद आयोग के इस दावे की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक विश्लेषण शो 'सियासत' में वरिष्ठ पत्रकार मनीष कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के वास्तविक आदेश, फॉर्म 6 में जोड़े गए विवादित क्लॉज, चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और राजनीतिक दलों की लामबंदी पर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की।

क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया?
चुनाव आयोग ने अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में बिहार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर सुनवाई के दौरान फॉर्म 6 के डिक्लेरेशन को मंजूरी दी थी।

लाइव लॉ (Live Law) का बड़ा खुलासा: कानूनी रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मई में जिस घोषणापत्र पर विचार किया था, वह जून 2025 के आदेश के 'एनेक्सर डी' में शामिल पुराना डिक्लेरेशन था, जिसमें केवल उम्र, पता और नागरिकता जैसी बुनियादी जानकारियां शामिल थीं।

जुलाई में जोड़ा गया नया क्लॉज: मौजूदा विवादित फॉर्म में जुलाई महीने में एक नई शर्त जोड़ी गई, जिसमें नए मतदाता से यह पूछा जा रहा है कि क्या उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2002-03 के पिछले एसआईआर रिकॉर्ड में था या नहीं।

कानूनी सवाल: विशेषज्ञों का कहना है कि जिस नए क्लॉज को जुलाई में बिना नियम बदले लागू किया गया, उस पर मई के अदालती फैसले की मुहर होने का दावा करना देश को भ्रमित करने जैसा है।

दोनों चुनाव आयुक्तों का कड़ा विरोध: 'अवैध और अनधिकृत'
आयोग के भीतर ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है:

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

संधू ने 13 अगस्त को फॉर्म 6 में बिना वैधानिक नियम बदले किए गए इस बदलाव को सीधे तौर पर "अनधिकृत और अवैध" करार दिया था।

दोनों आयुक्तों का तर्क है कि 18 साल के नए मतदाताओं से 25 साल पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड मांगना मतदाता पंजीकरण को सरल बनाने के बजाय उसे बेहद जटिल और गैर-पारदर्शी बनाता है।

Gen-Z और पहली बार वोट देने वालों पर असर
सालाना स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) पर रोक लगे होने और फॉर्म 6 में जटिल शर्तें जोड़े जाने से उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड और गोवा जैसे चुनावी राज्यों के 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे नए युवा मतदाताओं (Gen-Z) का नाम मतदाता सूची में जुड़ना अधर में लटक गया है।

मायावती की बैलेट पेपर वापसी की मांग, विपक्ष लामबंद
चुनाव आयोग में मचे इस घमासान के बाद विपक्षी दल पूरी तरह आक्रामक हो गए हैं:

मायावती का बयान: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर जनता का भरोसा बहाल करने के लिए ईवीएम (EVM) को तुरंत बंद कर फिर से बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं और मतदाता सूची संशोधन (SIR) की भ्रांतियों को दूर किया जाए।

CWC और INDIA ब्लॉक की बैठकें: इस मुद्दे पर मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) और बुधवार 30 सितंबर को विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक की आपात बैठकें बुलाई गई हैं, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ बड़े आंदोलन की रणनीति बनेगी।


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