सियासत: ECI में टकराव, 2027 चुनाव से पहले Gen-Z वोटर्स पर संकट
'सियासत' में मनीष कुमार का खुलासा: ECI में टकराव के कारण वोटर लिस्ट से बाहर हो रहे नए युवा मतदाता। ममता बनर्जी ने की CEC की गिरफ्तारी की मांग।
Siyasat: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच अधिकारों और प्रक्रियाओं को लेकर गहराया मतभेद अब देश के नए (Gen-Z) मतदाताओं के मताधिकार पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। सालाना होने वाले 'समरी स्पेशल रिवीजन' (SSR) के ठप होने के चलते 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले लाखों युवाओं के नाम मतदाता सूची में जुड़ने की प्रक्रिया लटक गई है।
डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक विश्लेषण शो 'सियासत' में पत्रकार मनीष कुमार ने चुनाव आयोग के अंदरूनी टकराव, 1958 से चली आ रही परंपरा पर लगे ब्रेक, फॉर्म-6 में हुए विवादित बदलावों और विपक्ष के तीखे हमलों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
1958 से चली आ रही परंपरा पर ब्रेक: SSR क्यों है ठप?
आमतौर पर चुनाव आयोग हर साल मई के अंत या जून की शुरुआत में राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को समरी स्पेशल रिवीजन (SSR) के औपचारिक निर्देश भेजता है। इसके तहत अगस्त से अक्टूबर के बीच ड्राफ्ट सूची जारी होती है और जनवरी के पहले हफ्ते में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाती है।
18 साल के नए वोटर्स पर असर: SSR के जरिए साल में 4 कट-ऑफ तारीखों (1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर) के आधार पर 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं को वोटर लिस्ट में शामिल किया जाता है।
2024 के बाद प्रक्रिया बंद: रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 के बाद से सालाना SSR हुआ ही नहीं है। 2025 में बिहार में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) शुरू होने के बाद इसे रोक दिया गया।
आयुक्तों की असहमति: दोनों चुनाव आयुक्तों (संधू और जोशी) ने SSR को तुरंत बहाल करने की मांग की, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कानूनी राय मांगे जाने और सहमति न बनने के चलते यह पूरी प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
2027 के विधानसभा चुनावों पर सीधा असर
इस गतिरोध का सबसे बड़ा असर उन राज्यों पर पड़ने जा रहा है जहाँ 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं:
उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा: उत्तर प्रदेश और गोवा में एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि पंजाब और उत्तराखंड में यह जारी है। 2027 के चुनाव से पहले यदि सालाना समरी रिवीजन नहीं हुआ, तो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लाखों युवा मतदाता अपने पहले वोट के अधिकार से वंचित रह सकते हैं।
'फॉर्म 6' में बदलाव और ERO के अधिकारों पर विवाद
रिपोर्ट में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर दो और गंभीर आरोप सामने रखे गए:
फॉर्म-6 में नया क्लॉज: नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए भरे जाने वाले 'फॉर्म-6' में एक नया हिस्सा जोड़ दिया गया है, जिसमें आवेदक से पूछा जा रहा है कि उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2002 की मतदाता सूची में था या नहीं। तकनीकी रूप से अनिवार्य न दिखने के बावजूद इसके बिना ऑनलाइन आवेदन प्रोसेस नहीं हो रहा है, जिस पर दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई है।
ईआरओ (ERO) के अधिकार छीनना: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), जो जमीनी स्तर पर वोटर लिस्ट तैयार करने के लिए संवैधानिक रूप से जिम्मेदार होता है, उसके अधिकारों को सीमित कर ईसीआई-नेट (ECI-Net) के जरिए डाटा के केंद्रीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं।
विपक्ष का तीखा हमला और CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम
इस खुलासे के बाद राजनीतिक घमासान मच गया है:
कांग्रेस का आरोप: कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि सरकार युवाओं (Gen-Z) के असंतोष से घबराई हुई है, इसलिए चुनाव आयोग के जरिए नए युवाओं के वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश रची जा रही है। वायनाड सांसद प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रक्रियाओं से छेड़छाड़ को 'देशद्रोह' बताते हुए सीईसी के खिलाफ कानूनी जवाबदेही तय करने की मांग की।
ममता बनर्जी का बयान: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे देश का सबसे बड़ा चुनावी स्कैंडल बताते हुए ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी तक की मांग कर दी।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP): छात्र-युवा संगठन सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस्तीफा नहीं दिया, तो वे देशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
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