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'आर्थिक सुनामी' और खाद संकट: क्या सच साबित होगी राहुल-जयशंकर की चेतावनी?

द फ़ेडरल देश 'सियासत' (मनीष कुमार): कमजोर मानसून और युद्ध से गहराया खाद संकट। त्योहारों से पहले उछलीं दाल की कीमतें, RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट।


Siyasat: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। एक तरफ मानसून की बेरुखी और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया व यूरोप में गहराता युद्ध इन दोनों संकटों ने देश में 'आर्थिक सुनामी' और 'खाद्य संकट' की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। द फ़ेडरल देश के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने इन्हीं विषयों का विश्लेष्ण किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'आर्थिक सुनामी' वाली पुरानी चेतावनी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच पर व्यक्त की गई 'बड़े फूड क्राइसिस' की चिंता अब एक ही दिशा की ओर इशारा कर रही हैं। भले ही हालिया जीडीपी डेटा को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बधाई दी हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कमजोर मानसून और महंगी ऊर्जा-उर्वरक आपूर्ति आम जनता की जेब पर भारी पड़ने वाली है।


2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून: कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मार
मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2015 के बाद इस वर्ष देश में सबसे कमजोर मानसून दर्ज किया गया है। जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य (868.6 मिमी) से करीब 12.6 फीसदी कम यानी महज 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई है। इसका सीधा असर खरीफ की फसलों—धान, दाल, तिलहन और गन्ने पर पड़ा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख कृषि राज्यों ने कई इलाकों में सूखा घोषित कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माना कि कई हिस्सों में बारिश असमान रही है और सरकार राज्यवार नीतियों पर काम कर रही है। हालांकि, जलाशयों में पानी की कमी का असर रबी फसल (गेहूं, सरसों, चना) की बुआई और सिंचाई पर पड़ना तय माना जा रहा है।

त्योहारों से पहले थाली हुई महंगी: दालों के दाम में 11% तक का उछाल
कमजोर बारिश का असर अब रसोई के बजट पर दिखने लगा है। इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, अल-नीनो के असर से पिछले एक महीने में:

चना दाल: 11% तक महंगी हुई।

मूंग दाल: 10.6% का उछाल दर्ज किया गया।

अरहर (तुअर) दाल: 6.5% महंगी हुई।

मटर: 6% तक महंगी हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी महीनों में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो आगामी त्योहारी सीजन में आम आदमी पर महंगाई की दोहरी मार पड़ेगी।

जयशंकर की चेतावनी: ऊर्जा, उर्वरक और ब्लैक सी ट्रेड का संकट
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने वाले बड़े खाद्य और ऊर्जा संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया और रूस जैसे प्रमुख वैश्विक उर्वरक उत्पादकों में युद्ध के चलते उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, दुनिया के बड़े अनाज निर्यातक 'ब्लैक सी' (Black Sea) के रास्ते आपूर्ति भेजने में असमर्थ हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी तनाव ने कच्चे तेल और फ्रेट चार्ज (भाड़ा) को बढ़ाकर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

महंगाई दर 4.82% पर पहुँची: क्या RBI बढ़ाएगा रेपो रेट?
अगस्त महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुँच गई, जो जुलाई में 4.45 फीसदी थी। यद्यपि यह आंकड़ा आरबीआई के 6% के ऊपरी दायरे से नीचे है, लेकिन यह 4% के मध्यम लक्ष्य को पार कर चुका है। खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी मॉनिटरी पॉलिसी (MPC) बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो फरवरी 2023 के बाद होम लोन और अन्य कर्ज पहली बार महंगे होंगे।


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