'बाल जैकेट में छिपाकर राइड करनी पड़ती है': बाइकर सिया ने बयां की ज़मीनी हकीकत
'सड़क पर लड़कियां आज भी महफूज़ नहीं': 13 सितंबर की सुबह का खौफनाक मंजर बयां करते हुए महिला बाइकर सिया ने गुरुग्राम पुलिस की ढीली कार्रवाई और सिस्टम पर उठाए सवाल।
Zamini Hakikat: गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर 13 सितंबर की सुबह महिला प्रोफेशनल बाइकर शिवानी (उर्फ सिया) के साथ हुई कथित रोड रेज और टक्कर की घटना ने दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे देश में महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने मुख्य आरोपी कल्याण बैसला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है।
डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के शो ज़मीनी हकीकत में पीड़ित बाइकर सिया ने 13 सितंबर की उस सुबह हुए पूरे घटनाक्रम, आरोपी पक्ष द्वारा सोशल मीडिया पर गढ़े जा रहे नैरेटिव, जातिगत आधार पर की जा रही महापंचायत और सड़कों पर महिलाओं के रोजमर्रा के संघर्ष पर बेबाकी से बात की।
13 सितंबर की सुबह: गोल्फ कोर्स रोड पर क्या हुआ था?
सिया ने बताया कि रविवार की सुबह करीब 6 बजे वे अपनी नियमित संडे राइड के लिए निकली थीं। सुबह करीब 7 बजे जब वे गोल्फ कोर्स रोड पर थीं, तभी एक गाड़ी में सवार चार युवक लगातार उनकी बाइक का पीछा करने लगे और अनुचित इशारे करने लगे।
लगातार पीछा और कट मारना: सिया के अनुसार, उन्होंने कई बार दूरी बनाने का प्रयास किया और अपनी बाइक को सबसे बाईं (थर्ड लेन) पर रखा। आगे ऑटो खड़े होने के कारण उनकी गति लगभग 40 किमी प्रति घंटा थी और उन्होंने ब्रेक ले रखी थी।
लापरवाह ड्राइविंग और टक्कर: आरोपी ने पहली लेन से सीधे बिना किसी इंडिकेटर के 100 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार में तीसरी लेन में गाड़ी घुसा दी और बाईं तरफ से गलत तरीके से ओवरटेक करते हुए जानबूझकर उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
रोकने पर अनहोनी का डर: सिया ने कहा कि गाड़ी में सवार चारों युवकों ने शराब पी रखी थी। यदि वे डर के कारण बाइक रोक देतीं या डिवाइडर से टकरा जातीं, तो उनके साथ कोई भी गंभीर अनहोनी हो सकती थी।
जातिगत महापंचायत और 'विक्टिम शेमिंग' पर तीखा जवाब
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे अभियानों और प्रस्तावित महापंचायत को लेकर सिया ने कड़ा विरोध जताया:
अपराध को जाति से जोड़ना गलत: सिया ने कहा कि सड़क पर चलने वाली हर महिला किसी की बेटी और बहन होती है। कोई भी बेटी जाति देखकर जन्म नहीं लेती। यदि इस हादसे में उनकी जान चली जाती, तो क्या तब भी आरोपी के समर्थन में महापंचायत बुलाई जाती?
राजनीतिक नैरेटिव की कोशिश बेबुनियाद: आरोपी पक्ष द्वारा उनके पुराने राजनीतिक संदर्भों (आम आदमी पार्टी से जुड़ाव) को घसीटने पर सिया ने स्पष्ट किया कि जब वे सुबह राइड पर निकली थीं, तब कोई राजनीतिक इरादा नहीं था। वे अपने चेहरे को ढककर राइड करती थीं ताकि उनकी निजी और सोशल मीडिया ज़िंदगी अलग रह सके। किसी महिला के साथ सड़क पर होने वाले अपराध को राजनीतिक रंग देना बेहद शर्मनाक है।
'बाल अंदर छुपाकर करनी पड़ती है राइड'
सिया ने सड़कों पर महिला बाइकर्स के साथ होने वाले रोजमर्रा के उत्पीड़न का दर्द साझा करते हुए बताया:
जब राइडिंग जैकेट और पैड पहने होते हैं, तो दूर से पता नहीं चलता कि राइडर महिला है या पुरुष। लेकिन जैसे ही बाल बाहर दिखते हैं, सड़कों पर मनचले गाड़ियों और बाइकों से कट मारने लगते हैं, आगे आकर अचानक ब्रेक लगाते हैं और पीछा करते हैं।
कई बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए उन्हें अपने बाल जैकेट के भीतर छिपाकर राइड करनी पड़ी है। आज भी देश में ऐसी कोई सुरक्षित सड़क नहीं बची है जहाँ महिला बिना किसी फब्ती या पीछा किए जाने के डर के स्वतंत्र रूप से चल सके।
सिस्टम और पुलिसिंग पर सवाल: '50 घंटे बाद हुई गिरफ्तारी'
पुलिस की कार्रवाई पर बात करते हुए सिया ने कहा कि भले ही अब धाराएं बढ़ाई गई हैं और एसआईटी गठित हुई है, लेकिन मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी घटना के करीब 50 घंटे बाद हुई, जब तक वह मीडिया में इंटरव्यू दे रहा था।
उन्होंने मांग की कि गाड़ी में मौजूद चारों युवकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे मामलों में आसानी से जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि दिल्ली-एनसीआर में पुलिस बूथ केवल शोपीस बनकर न रहें, बल्कि सड़कों पर नियमित पुलिस पेट्रोलिंग हो ताकि हुड़दंगियों और मनचलों के मन में कानून का वास्तविक खौफ पैदा हो सके।
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