Jio IPO के नाम रिकॉर्ड ही रिकॉर्ड! 100 मिनट में भर गया 30,213 करोड़ रुपये वाला IPO, क्या मिलेगा निवेशकों को बंपर रिटर्न?
जियो प्लेटफॉर्म्स ने सेबी के पास आईपीओ लाने के लिए ड्रॉफ्ट पेपर दाखिल किया तभी से निवेशकों में इस आईपीओ को लेकर काफी उत्साह है. सोमवार को एंकर इंवेस्टर्स से आईपीओ को तगड़ा रेस्पॉंस मिला था.
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ खुल चुका है. 21 अक्तूबर से 23 अक्तूबर तक इस आईपीओ में आप पैसा लगा सकते हैं. 30,213 करोड़ रुपये कंपनी आईपीओ के जरिए जुटाने जा रही है. 1065 से 1119 रुपये प्रति शेयर कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड फिक्स किया है. कोई भी रिटेल निवेशक 12 शेयरों के एक लॉट साइज के लिए आवेदन कर सकता है. 28 अक्तूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स की स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग होगी. इस आईपीओ की लिस्टिंग कैसी होगी ये कहना मुश्किल हैं लेकिन कई वेबसाइट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट में 253 रुपये के प्रीमियम पर आईपीओ ट्रेड कर रहा है. यानि आज के जीएमपी के हिसाब से 1372 रुपये पर जियो प्लेटफॉर्म्स की स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग हो सकती है जो कि इश्यू प्राइस से 22 फीसदी से ज्यादा है.
कंपनी ने जो आईपीओ का प्राइस बैंड फिक्स किया है उसमें 1119 रुपये के अपर प्राइस के हिसाब से लिस्टिंग के पहले ही जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी कंपनी कै वैल्यू 10 लाख करोड़ के पार, 10 लाख 30 हजार,490 करोड़ रुपये आंका जा रहा है. और आपको ये जानकार हैरानी होगी कि भारतीय शेयर बाजार में केवल 3 ही ऐसी कंपनियां हैं जिनका मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.
इसमें पहला नंबर रिलायंस इंडस्ट्रीज का आता है जिसका मर्केट कैप 16.28 लाख करोड़ रुपये है. दूसरे स्थान पर टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल है जिसका मार्केट कैप 11.69 लाख करोड़ रुपये है और तीसरे स्थान पर एचडीएफसी बैंक है जिसका मार्केट कैप 10.97 लाख करोड़ रुपये है. यानि जियो प्लेटफॉर्म्स नई इतिहास रचने के कगार पर है.
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में सभी नए शेयर्स जारी किया जा रहा है. कंपनी करीब 27 करोड़ नए शेयर पेश कर रही है. जुटाए जाने वाले रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने या कम करने में किया जाएगा. यानी निवेशकों से जुटाया गया पैसा कंपनी के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने में भी काम आएगा. इस आईपीओ में कोई निवेशक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहा है जो कि अमूमन बाकी आईपीओ में देखने को मिलता है. मेटा और गूगल की भी जियो प्लेटफॉर्म्स में हिस्सेदारी है.
बहरहाल जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO सिर्फ एक बड़ी कंपनी के शेयर बाजार में उतरने की कहानी नहीं है. यह रिलायंस समूह के उस कारोबारी सफर का नया अध्याय है, जिसने पिछले चार दशकों में भारतीय शेयर बाजार में कई बार निवेशकों की किस्मत बदली है. धीरूभाई अंबानी के दौर से शुरू हुई यह कहानी मुकेश अंबानी के नेतृत्व में पेट्रोकेमिकल्स, रिफाइनिंग, रिटेल, टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार तक पहुंच चुकी है. और टेलीकॉम कारोबार में जो मुकेश अंबानी ने 2016 में कदम रखा था और जियो आज सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है. साल 2016 में जियो ने टेलीकॉम बाजार में कदम रखा तो मोबाइल इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव आ गया. सस्ती डेटा सेवाओं और मुफ्त वॉयस कॉलिंग ने इंटरनेट को बड़ी आबादी तक पहुंचाया. दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी अपनी कीमतों, डेटा पैक और नेटवर्क रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ा. आज जियो सिर्फ मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है. इसका कारोबार डिजिटल सर्विसेज, 5G, होम ब्रॉडबैंड, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जैसे क्षेत्रों में भी फैला है. जून 2026 तक इसके ग्राहकों की संख्या लगभग 53.33 करोड़ बताई गई है और देश के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में इसकी हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है.
जियो के IPO को समझने के लिए रिलायंस के इतिहास पर नजर डालना जरूरी है. इसकी शुरुआत 1977 में शेयर बाजार में लिस्टिंग के साथ हुई थी. उस समय रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के IPO में शेयर की कीमत 10 रुपये थी और कंपनी का इश्यू करीब सात गुना सब्सक्राइब हुआ था. उस समय शेयर बाजार में निवेश आज की तरह मोबाइल ऐप से नहीं होता था. कागजी शेयर सर्टिफिकेट्स का दौर था, निवेशकों की संख्या सीमित थी और कंपनियों के शेयर खरीदना-बेचना आज के मुकाबले अधिक जटिल था. धीरूभाई अंबानी ने छोटे निवेशकों को कंपनी की विकास यात्रा का हिस्सा बनाने पर जोर दिया और रिलायंस ने समय के साथ टेक्सटाईल इंडस्ट्री से आगे बढ़कर पेट्रोकेमिकल्स, रिफाइनिंग, एनर्जी, टेलीकॉम और रिटेल तक अपने कारोबार को फैलाया. रिलायंस के शेयरधारकों को 1983, 1997, 2009, 2017 और 2024 में बोनस शेयर जारी किए गए. द इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, रिलायंस के 1977 के IPO में लगाए गए 1,000 रुपये का वैल्यू आज लगभग 52 लाख रुपये है. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डीमर्जर से मिले शेयरों का वैल्यू भी इसमें शामिल है. यह आंकड़ा बताता है कि लंबे समय तक कंपनी के साथ बने रहने वाले शुरुआती निवेशकों के लिए रिलायंस की यात्रा कितनी बड़ी संपत्ति बनाने वाली साबित हुई है.
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जियो में पैसा लगाने वाले निवेशकों को भी वैसा ही रिटर्न मिल पाएगा, जैसा रिलायंस के शुरुआती निवेशकों को मिला था?
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के जरिएओ 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने जा रही है. लेकिन भारत के प्राइमरी मार्केट में अभी तक जितनी भी कंपनियां बड़े टिकट-साइज वाला आईपीओ लेकर आई हैं उसने स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग पर अपने शेयरधारकों निवेशकों को निराश किया है. ये लगातार देखने को मिला है बड़े साइज का आईपीओ लेकर आईपीओ लाने वाली बेहतरीन कंपनियों का स्टॉक एक्सचेंज पर प्रदर्शन बेहद फीका रहा है. और ये हम ऐसे ही नहीं कह कह रहे हैं बल्कि हमारे सामने कई उदाहरण हैं. क्या जियो प्लेटफॉर्म्स भी इसी कड़ी में शामिल होगा या वो अपनी लिए एक नई कहानी लिखेगा.
लेकिन भारत के प्राइमरी मार्केट में 13 ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम आईपीओ के जरिए जुटाये. इस कड़ी में सबसे बात कर लेते हैं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आईपीओ की जिसने 1785 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर 22563 करोड़ रुपये आईपीओ के जरिए जुटाये. फिलहाल एनएसई का शेयर 1709 रुपये यानी अपने इश्यू प्राइस के नीचे कारोबार कर रहा है.
हुंडे मोटर इंडिया की जिसने 1960 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर 27,858 करोड़ रुपये आईपीओ के जरिए जुटाये. इसकी लिस्टिंग इश्यू प्राइस के नीचे हुई और अभी भी ये अपने इश्यू प्राइस के नीचे 1940 रुपये पर कारोबार कर रहा है. सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी ने साल 2022 में 949 रुपये के इश्यू प्राइस पर 20,557 करोड़ रुपये आईपीओ के जरिए जुटाये. लिस्टिंग पर स्टॉक 9 फीसदी के करीब नीचे जा लुढ़का. कंपनी ने 2026 में एक शेयर के बदले एक शेयर बोनस के तौर पर दिया था. इसके बावजूद कंपनी औसतन अपने 475 रुपये के इश्यू प्राइस से नीचे 391 रुपये पर कारोबार कर रही है. वन 97 कम्यूनिकेशन यानी पेटीएम 2021 में 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ लेकर आई 2150 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर. पेटीएम ने तो अपने शेयरधारकों को बहुत बुरे दिन दिखाये. फिलहाल पेटीएम का शेयर 1660 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है जो कि इश्यू प्राइस से नीचे है.
टाटा समूह की एनबीएफसी टाटा कैपिटल साल 2025 में 15512 करोड़ रुपये का आईपीओ लेकर आई वो भी 326 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर. फिलहाल टाटा कैपिटल का शेयर भी अपने इश्यू प्राइस से नीचे 312 रुपये पर कारोबार कर रहा है.
ये तो बात हुई कुछ बड़े आकार वाले आईपीओ की जिन्होंने अपने निवेशकों को निराश किया है. लेकिन जब से जियो प्लेटफॉर्म्स ने सेबी के पास आईपीओ लाने के लिए ड्रॉफ्ट पेपर दाखिल किया तभी से निवेशकों में इस आईपीओ को लेकर काफी उत्साह है. सोमवार को एंकर इंवेस्टर्स से आईपीओ को तगड़ा रेस्पॉंस मिला था. 2.5 लाख करोड़ रुपये के शेयर्स के लिए कंपनी को आवेदन मिले जो कि एंकर निवेशकों को लिए तय कोटा का 30 गुना था. ऐसे में जो निवेशक जिन्हें जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर मिलेंगे उन्हें 28 अक्तूबर तक का इंतजार करना होगा. लेकिन शेयर बाजार का बिगड़ा सेटीमेंट भी जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग को फीका कर सकता है. अक्तूबर महीने में विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखी जा रही है. 2026 में FII ने 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर्स बेच डाले. बाजार हर रोज गोता लगा रहा है. निवेशक निराश हैं हताश हैं. ऐसे में बाजार का बिगड़ा मूड कहीं जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के रौनक को भी फीका ना कर दें? इसके लिए अगले हफ्ते का इंतजार करना होगा.

