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PM मोदी के 25 साल पूरे होने पर झटका, रिजर्व बैंक ने साढ़े तीन साल बाद बढ़ाया रेपो रेट

एक तरफ देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर जश्न मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम जनता को महंगाई और EMI का बड़ा झटका दे दिया है।


आज 7 अक्तूबर की तारीख राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टिकोण से काफी अहम साबित हुई है। आज के दिन एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल के सेवा काल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम जनता की जेब पर बड़ा बोझ डाल दिया है।

केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी और पीएम मोदी के प्रशंसक गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री पद तक के 25 वर्षों के सफर को 'सेवा संकल्प काल' के रूप में मना रहे हैं। वडनगर से लेकर वाराणसी तक बैठकों, रैलियों और मंदिरों में पूजा-अर्चना का दौर जारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद दिल्ली के श्री विनायक मंदिर पहुंचकर देशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए पूजा की और 'We Will Do It' का नया संकल्प भी दिया। लेकिन पीएम मोदी के इस मंदिर दर्शन और सोशल मीडिया संदेश के महज दो घंटे बाद मुंबई स्थित देश के केंद्रीय बैंक से आई खबर ने करोड़ों आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी।

साढ़े तीन साल बाद बढ़ा रेपो रेट, महंगा हुआ कर्ज

भारतीय रिजर्व बैंक की तीन दिवसीय मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक समाप्त होने के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों से जुड़े फैसलों की घोषणा की। आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (0.25 फीसदी) का इजाफा करने का फैसला किया है। इसके साथ ही देश में रेपो रेट अब 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है।

आपको बता दें कि फरवरी 2023 के बाद, यानी पिछले लगभग साढ़े तीन सालों में यह पहला मौका है जब रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इसका सीधा मतलब यह है कि बैंकों के लिए आरबीआई से फंड लेना महंगा हो जाएगा और बैंक इसका पूरा बोझ सीधे अपने ग्राहकों पर डालेंगे।

त्योहारी सीजन में ईएमआई का झटका

त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है, ऐसे में जो लोग नया घर, गाड़ी, टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की योजना बना रहे थे, उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। जिन लोगों ने पहले से फ्लोटिंग रेट पर होम लोन या ऑटो लोन ले रखा है, उनकी मासिक ईएमआई (EMI) में बढ़ोतरी तय है।

अगर बैंक ईएमआई की राशि नहीं बढ़ाते हैं, तो उन्हें अपने लोन का टैन्योर (अवधि) बढ़ाना पड़ेगा, जिसका मतलब है कि आपको लंबे समय तक ब्याज चुकाना होगा। कुल मिलाकर, आम भारतीय परिवार को अब अपने घरेलू बजट और बचत में कटौती करके बढ़ी हुई ईएमआई का इंतजाम करना होगा।

'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग': अभी और सख्त होंगे नियम

आरबीआई गवर्नर का यह फैसला सिर्फ एक कदम तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने साफ संकेत दिया कि आने वाले समय में 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) की नीति अपनाई जाएगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि अगर महंगाई पर काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और भी बढ़ोतरी की जा सकती है।

क्यों बढ़ रही है महंगाई? आरबीआई ने बताए कारण

अगस्त के महीने में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.8 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो जुलाई में 4.5 फीसदी थी। आरबीआई के अनुमान के मुताबिक, अगले तीन तिमाहियों में औसत खुदरा महंगाई दर 5.8 फीसदी के आसपास रह सकती है। महंगाई बढ़ने के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं:

कमजोर और असमान मानसून: इस साल साउथ-वेस्ट मानसून की स्थिति चिंताजनक रही है। इसका सीधा असर आने वाली रबी फसलों (जैसे गेहूं, दालें और सब्जियां) के उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी।

एल नीनो (El Niño) का प्रभाव: मौसम के बदलते चक्र और एल नीनो के कारण कृषि पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) महंगा हो रहा है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ पूरे ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट पर पड़ेगा, जिससे हर चीज महंगी हो जाएगी।

आरबीआई की असली परीक्षा अब शुरू

आरबीआई के इस सख्त कदम से यह साफ हो गया है कि आर्थिक विकास की मजबूत रफ्तार के बावजूद केंद्रीय बैंक महंगाई को हल्के में लेने के मूड में बिल्कुल नहीं है। अब आने वाले महीनों में रिजर्व बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह देश की आर्थिक ग्रोथ रेट को बिना नुकसान पहुंचाए महंगाई को 4 फीसदी के दायरे में कैसे वापस लाता है।

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