ज़मीनी हकीकत: मंगोलपुरी में 'कागजी कत्ल', 2000 से ज़्यादा वोटरों के नाम सूची से गायब!
मंगोलपुरी के Y ब्लॉक में करीब 2000 मतदाताओं के नाम सूची से गायब होने के दावों के बीच लोगों ने SIR प्रक्रिया, ASDD सूची और दस्तावेज़ों की मांग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) की मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 'द फ़ेडरल देश' की टीम ने दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित वाई (Y) ब्लॉक का दौरा किया, जहाँ हैरान करने वाले दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ इस एक ब्लॉक में करीब 2000 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब कर दिए गए हैं। इन नागरिकों को एएसडीडी (ASDD—Absent, Shifted, Dead, Duplicate) सूची में डालकर या तो 'मृत', 'शिफ्टेड' (स्थानांतरित) या 'लापता' घोषित कर दिया गया है।
इस ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए उन आम नागरिकों की आपबीती, जो दशकों से एक ही पते पर रह रहे हैं, लेकिन अब अपने ही देश में 'वोटर' साबित होने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं:
1. आधार और पैन कार्ड को मानने से इनकार!
स्थानीय निवासी मोहसिन ने बताया कि उनकी पत्नी अल्फिया का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। जब उन्होंने बीएलओ (BLO) से संपर्क किया, तो उनसे 11 पुराने दस्तावेज़ मांगे गए। मोहसिन का कहना है कि बीएलओ ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड को मान्य दस्तावेज़ मानने से साफ इनकार कर दिया है।
2. 1977 में गुज़र चुके पिता के दस्तावेज़ की मांग
1976 से मंगोलपुरी में रह रहे राजकुमार की परेशानी सरकारी सिस्टम की बड़ी खामी उजागर करती है। उनका नाम तो नहीं कटा, लेकिन बीएलओ ने उनके पिता का नाम 'पूरन चंद' की जगह 'देवीदास' और माँ का नाम 'लाली देवी' की जगह 'लाली' लिख दिया। अब इस लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error) को सुधारने के लिए प्रशासन उनसे उनके पिता के दस्तावेज़ मांग रहा है, जिनका निधन 1977 में ही हो चुका है।
3. सरकारी कर्मचारी के परिवार का नाम भी 'शिफ्टेड' बताकर काटा
लक्ष्मी, जो 2006 से यहाँ रह रही हैं और जिनके पति फायर ब्रिगेड में सरकारी कर्मचारी हैं, उनका और उनके पति दोनों का नाम 'शिफ्टेड' बताकर काट दिया गया है। इसी तरह सुमन और सुनीता ने भी बताया कि दशकों से उसी पते पर रहने, वही बिजली मीटर होने और फॉर्म जमा करने के बावजूद उनके परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से गायब कर दिए गए हैं।
4. फॉर्म 6 का विरोधाभास और 'जनसरोकार' की रिपोर्ट
'जनसरोकार नेटवर्क' से जुड़े राजेंद्र ने मंगोलपुरी में एक जनसुनवाई की थी। उन्होंने बताया कि 1976 में बसाई गई इस कॉलोनी में परिवार बड़े होने के कारण लोग साथ वाली गलियों में किराए पर रहने लगे, लेकिन उनका स्थायी पता वही है। बीएलओ द्वारा उन्हें ट्रेस न कर पाने के कारण 'शिफ्टेड' घोषित कर दिया गया।
राजेंद्र ने 'फॉर्म 6' (Form 6) पर सबसे गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 20 साल से वोट दे रहा है, सरकार उससे फॉर्म 6 भरवाकर यह झूठ बुलवा रही है कि वह 'पहली बार का वोटर' है। फॉर्म में गलत जानकारी देने पर BNS के तहत सज़ा का प्रावधान है, जिससे नागरिक अनजाने में अपराधी बन रहे हैं। इसके अलावा साइबर कैफे वाले एक फॉर्म भरने के ₹200 तक वसूल रहे हैं।
मंगोलपुरी की यह ज़मीनी हकीकत दिखाती है कि कैसे सिस्टम की तकनीकी खामियों और जल्दबाज़ी का खामियाज़ा आम और गरीब जनता भुगत रही है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है। देखना यह होगा कि क्या इन हज़ारों नागरिकों को उनके पुराने पहचान पत्र के आधार पर सूची में वापस जोड़ा जाएगा या उन्हें 'नया वोटर' बनने की जटिल प्रक्रिया से गुज़रना पड़ेगा।

