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E20 पेट्रोल से जनता बेहाल, केजरीवाल ने सीधे पूछा पीएम से सवाल

E20 पेट्रोल से कार मालिकों की घटती माइलेज पर भड़के केजरीवाल; शुद्ध पेट्रोल के विकल्प को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा।


Siyasat: देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20 Petrol) की नीति को लेकर कार मालिकों और मध्यम वर्ग की बढ़ती परेशानियों ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के चर्चित शो 'सियासत' में वरिष्ठ एंकर मनीष कुमार ने इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आक्रामक रणनीति का बड़ा विश्लेषण पेश किया है।

शो में यह तीखा सवाल उठाया गया कि क्या विपक्ष के अन्य बड़े नेताओं की खामोशी के बीच अरविंद केजरीवाल ने देश के करोड़ों वाहन मालिकों से जुड़े इस बड़े आर्थिक मुद्दे को पूरी तरह हाईजैक कर लिया है?


E20 पेट्रोल से जनता परेशान, बैकफुट पर आई सरकार

एंकर मनीष कुमार ने रिपोर्ट में बताया कि सरकार ने शुरुआत में एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) नीति को देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए अपनी बड़ी पीठ थपथपाने वाली उपलब्धि बताया था। लेकिन जब जमीनी स्तर पर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार और बाइक मालिकों की परेशानियां सामने आने लगीं—जैसे गाड़ियों की माइलेज घटना, इंजन में खराबी (Engine Knocking), पार्ट्स खराब होना और सर्विसिंग-रिपेयरिंग का खर्च अचानक बढ़ जाना—तो सरकार बैकफुट पर आ गई।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सरकार और तेल कंपनियों के बचाव के लिए 4 जुलाई को ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रमुखों को मैदान में उतरना पड़ा।


अरविंद केजरीवाल की एंट्री और ताबड़तोड़ 4 प्रेस कॉन्फ्रेंस

इस मुद्दे पर कार मालिकों के बढ़ते गुस्से की नब्ज को भांपते हुए अरविंद केजरीवाल ने मोर्चा खोल दिया। बीते 10 दिनों में केजरीवाल ने इस तकनीकी मुद्दे पर किसी प्रवक्ता को आगे करने के बजाय खुद कमान संभाली और एक के बाद एक 4 बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डालीं:

  • 7 जुलाई: नागरिकों पर जबरदस्ती E20 पेट्रोल थोपने को लेकर सरकार का विरोध किया।

  • 8 जुलाई: ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर पूछा कि क्या वे E20 पेट्रोल से कार मालिकों को हो रहे नुकसान की भरपाई करेंगी?

  • 9 जुलाई: सरकारी तेल कंपनियों द्वारा वसूले जा रहे ऊंचे दामों पर सवाल उठाए और कहा कि पेट्रोल की असल कीमत ₹82 प्रति लीटर होनी चाहिए थी।

  • 14 जुलाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर देश की जनता का दर्द सामने रखा।


पीएम मोदी से केजरीवाल की दो मुख्य मांगें

अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में साफ कहा कि पूरा देश E20 पेट्रोल से व्यथित है। उन्होंने पीएम के सामने दो बड़ी मांगें रखी हैं:

  1. शुद्ध पेट्रोल का विकल्प (Option of Pure Petrol): हर पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को यह विकल्प मिलना चाहिए कि वे E20 पेट्रोल डलाना चाहते हैं या शुद्ध पेट्रोल (Pure Petrol)। किसी पर जबरदस्ती E20 न थोपा जाए।

  2. E20 पेट्रोल के दाम कम हों: चूंकि E20 पेट्रोल की माइलेज कम है और इससे गाड़ी को नुकसान पहुंच रहा है, इसलिए इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से काफी कम होनी चाहिए।

केजरीवाल ने पीएम मोदी से मिलने का समय भी मांगा है और देश भर में एक 'ऑनलाइन सिग्नेचर अभियान' (Online Petition) की शुरुआत की है, जिसे वे सीधे प्रधानमंत्री को सौंपेंगे। यही नहीं, केजरीवाल खुद पेट्रोल पंपों और गाड़ियों के सर्विस स्टेशनों पर जाकर सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं।


राहुल और प्रियंका की खामोशी, केजरीवाल को मिला बड़ा मौका

शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विश्लेषण पेश करते हुए कहा कि जहां अरविंद केजरीवाल E20 के मुद्दे पर सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक बेहद मुखर हैं, वहीं कांग्रेस के शीर्ष नेता—चाहे लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी हों या कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा—इस बड़े जनहित के मुद्दे पर पूरी तरह खामोश दिखाई दे रहे हैं। इसी खामोशी का फायदा उठाकर केजरीवाल को इस नैरेटिव को अपने पक्ष में करने का बड़ा मौका मिल गया है।


अर्बन वोट बैंक और 'मिशन दिल्ली 2026' की रणनीति

प्रदीप सहगल और मनीष कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी मूल रूप से एक शहरी (Urban) आधार वाली पार्टी है। दिल्ली और पंजाब के शहरी इलाकों में उसका बड़ा प्रभाव रहा है। E20 पेट्रोल से सबसे ज्यादा प्रभावित भी शहरों में रहने वाला मध्यम वर्ग (Middle Class) है, जिसकी जेब पर सीधे असर पड़ रहा है।

वर्ष 2025 में दिल्ली की सत्ता गंवाने के दर्द के बाद, अरविंद केजरीवाल मध्यम वर्ग के इस आर्थिक दर्द को हवा देकर अपने खोए हुए शहरी वोट बैंक को दोबारा हासिल करने की बड़ी रणनीति पर काम कर रहे हैं। साथ ही, वे राम मंदिर चंदा चोरी जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाकर भी भाजपा को लगातार घेर रहे हैं, ताकि 'द फेडरल' जैसी मीडिया रिपोर्टों में आम आदमी पार्टी शहरी जनता की सबसे भरोसेमंद आवाज बनकर उभर सके।


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