आंदोलनों पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, राहुल गांधी के प्रदर्शनों के बीच कही ये बात
मोहन भागवत ने कहा कि समाज में समस्याएं हैं और व्यवस्था में भी कमियां हो सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में आंदोलनों का होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए।
आरएसएस के स्थापना दिवस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के भाषण में आंदोलनों, राजनीतिक नेतृत्व और भारत, हिंदू समाज तथा संघ को तोड़ने की कथित कोशिशों का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने कहा कि आंदोलनों का होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान देना होना चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा कि समाज में समस्याएं हैं और व्यवस्था में भी कमियां हो सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में आंदोलनों का होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए।
'कानून की मर्यादा'
आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि आंदोलन करने वाला समाज का कोई समूह हो, शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करने वाला शासन-प्रशासन हो या राजनीतिक नेतागण—किसी की भी करनी से अनबन, द्वेष, मलाल या सामाजिक विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। उन्होंने भावनाएं तीव्र होने पर भी कानून की मर्यादा बनाए रखने की बात कही।
भागवत ने कहा कि भारत, "हिंदू समाज और संघ को किस तरह तोड़ा जा सकता है, इस बारे में विचार करके योजना बनाने वाली ताकतें काम करती हैं। उनके मुताबिक, कुछ लोग इसमें सहायता के लिए मिल जाते हैं और सत्ता के छोटे स्वार्थ तथा विवेकहीनता के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल होते हैं।"
'दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं'
आरएसएस प्रमुख ने कहा, "कई बार आंदोलनों को दूसरे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। समाज और देश को सिर्फ नेता नहीं चलाते, बल्कि समाज की सक्रियता से भी समस्याओं का समाधान होता है। दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं।"
संघ प्रमुख के इन बयानों को राजनीतिक आंदोलनों और विपक्ष की भूमिका के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, किसी दल, संगठन या नेता का सीधा नाम नहीं लिया है। लेकिन उनका बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया के विरोध में सड़कों पर उतरा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कई बार दिल्ली में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। वहीं, CJP भी इसी मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। इससे पहले CJP के आंदोलन के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

