संसद में भारी हंगामा, सड़कों पर लाठीचार्ज: नीट और CJP मार्च पर आर-पार
नीट पेपरलीक पर लोकसभा-राज्यसभा में विपक्ष का जोरदार हंगामा; जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस; जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके का अनशन टूटा, प्रदर्शन स्थल खाली।
Siyasat: आज का दिन देश की सियासत में दो मायनों में बेहद महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ जहां संसद के मानसून सत्र की आज से बेहद हंगामेदार शुरुआत हो गई, वहीं दूसरी तरफ पूरे देश की नजरें जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन पर टिकी रहीं, जिन्होंने आज 'संसद मार्च' का आवाहन किया था। सदन की कार्रवाई शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पारंपरिक संबोधन हुआ, जिसमें उन्होंने बेहतर मानसून और सत्र के प्रोडक्टिव होने की उम्मीद जताई। लेकिन जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में नीट (NEET) पेपरलीक को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।
संसद के भीतर जब विपक्ष सरकार को घेर रहा था, ठीक उसी वक्त सड़कों पर छात्रों और पुलिस के बीच जबरदस्त टकराव चल रहा था। जैसी उम्मीद थी कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस छात्रों को मार्च नहीं करने देगी, जमीन पर वही देखने को भी मिला। जंतर-मंतर से पेपरलीक के विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र जब सुबह बड़ी संख्या में जमा हो गए—वो भी सरकार और पुलिस के अनुमान से कहीं ज्यादा - तो उन्हें हटाने के लिए रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) के जवानों ने लाठीचार्ज कर दिया। इस बर्बर लाठीचार्ज को लेकर संसद के भीतर भी भारी हंगामा हुआ। लेकिन छात्र भी कहां मानने वाले थे, वे सभी घेराबंदी और बैरिकेडिंग को तोड़कर संसद के पास तक जा पहुंचे। जब छात्र रायसीना रोड के पास पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें दूर खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। एहतियातन संसद के भीतर की सुरक्षा को भी काफी बढ़ा दिया गया।
जेपी नड्डा से मुलाकात और अनशन का खत्म होना
सड़कों पर मचे इस घमासान के बीच खबर आई कि सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ बातचीत शुरू कर दी है और उनकी मांगों पर गौर करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि सीजेपी की ओर से सरकार से संपर्क किया गया था। खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुलाकात की जानकारी दी। सीजेपी के दो प्रतिनिधियों ने जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों की फेहरिस्त सौंपी। इस मुलाकात के बाद, हिरासत में लिए गए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने अपना अनशन तोड़ दिया। वैसे, सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के संकेत रविवार को ही उनकी पत्नी के बयान के बाद मिल गए थे। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने एक तय रणनीति के तहत कार्रवाई करते हुए जंतर-मंतर की प्रदर्शन साइट को पूरी तरह खाली कराना शुरू कर दिया है, जिसके बाद अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या पिछले एक महीने से चल रहा सीजेपी का यह बड़ा आंदोलन अब खत्म हो गया है?
संसद में स्पीकर की दुहाई और विपक्ष के तीखे तेवर
छात्रों के प्रदर्शन और नीट पेपरलीक का यह मुद्दा मानसून सत्र के पहले दिन दोनों ही सदनों में पूरी तरह छाया रहा। लोकसभा में जब विपक्षी सांसद इस मुद्दे पर भारी नारेबाजी कर रहे थे, तब स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों को टोकते हुए कहा कि नारेबाजी से सदन की मर्यादा नहीं बनती है। हालांकि, ओम बिरला का इस तरह नैतिकता की दुहाई देना थोड़ा हजम करना मुश्किल है, क्योंकि जिस तरह उन्होंने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद उस पर अपनी कानूनी मुहर लगाई, वह किसी से छिपी नहीं है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब टीएमसी (TMC) के जो 20 सांसद अलग गुट बनाकर नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए हैं, उन्हें भी वे जल्द ही मान्यता दे देंगे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इन फैसलों से लोकतंत्र को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचता?
उधर राज्यसभा में भी माहौल बेहद गर्म रहा। नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जैसे ही जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, वैसे ही सत्तापक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया।
पीएम मोदी के बयान पर रेणुका चौधरी की चुटकी
सत्र की शुरुआत से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया के सामने कहा था, "मानसून हो या मानसून सत्र, दोनों का प्रोडक्टिव होना जरूरी है, इससे देश को लाभ होता है।" लेकिन जहां एक तरफ पीएम मोदी बेहतर मानसून की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि देश पर अल नीनो का असर साफ दिखने लगा है और कई राज्य इस समय भयंकर सूखे और बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। प्रधानमंत्री के इसी बयान पर कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी ने संसद परिसर में अपने चिर-परिचित अंदाज में करारी चुटकी ली।
डिंपल यादव का मार्च और राम मंदिर का नया मोर्चा
नीट पेपरलीक के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने मोर्चा संभाला और संसद से जंतर-मंतर तक के लिए अपने सांसदों के साथ एक बड़ा मार्च निकाला। इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सक्रिय दिखे; वे पेपरलीक से लेकर अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार से लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को चौतरफा घेरते नजर आए।
मानसून सत्र का पहला दिन भले ही छात्रों और पेपरलीक के नाम रहा हो, लेकिन विपक्ष के पास इस बार राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का भी एक बहुत बड़ा मुद्दा है, जिसके जरिए वे आने वाले दिनों में मोदी सरकार को संसद के भीतर और बाहर घेरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इस मामले में मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर राहुल गांधी तक ने प्रधानमंत्री मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखा है, जिस पर दोनों शीर्ष नेताओं के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र में राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है, जिसे देश के लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी गहरी आस्था दिखाते हुए दान में दिया था।
जाहिर है कि सरकार को हर मोर्चे पर घेरने के लिए इस बार विपक्ष के पास मुद्दों की कोई कमी नहीं है। लेकिन दूसरी तरफ, सरकार की पूरी कोशिश आगामी परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को हर हाल में पारित कराने पर रहने वाली है, जिसके लिए वह सदन में जरूरी दो-तिहाई संख्या बल जुटाने की जुगत में लगी है। अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष की उस रणनीति को कैसे विफल करती है, जिसके तहत पेपरलीक और चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों को उठाकर सरकार को पूरी तरह बैकफुट पर धकेलने का प्लान तैयार किया गया है।

