मोदी-शाह को राहुल की चेतावनी, बोले- NSUI कार्यकर्ताओं को पीटने वालों को सजा दिलाएंगे
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मोदी-शाह को राहुल की चेतावनी, बोले- NSUI कार्यकर्ताओं को पीटने वालों को सजा दिलाएंगे

प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला NSUI कार्यकर्ता ने पुलिस पर गर्दन पकड़ने, थप्पड़ मारने और चेहरे पर खरोंचने के आरोप लगाए, जबकि राहुल ने प्रदर्शनकारियों से सबूत सुरक्षित रखने को कहा।


लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे NSUI कार्यकर्ताओं से कथित पुलिस मारपीट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। बुधवार को पीड़ित प्रदर्शनकारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

राहुल बोले- देश की आवाज के खिलाफ मत खड़े होइए
राहुल गांधी ने कहा, "यहां न कोई हिंदू है, न मुसलमान, न किसी खास जाति का व्यक्ति। न महिला है, न पुरुष। यहां एक आवाज है, एक विरोध है। यह भारत की आवाज है। अमित शाह और प्रधानमंत्री इस आवाज के खिलाफ खड़े हैं। मेरा सुझाव है कि इस आवाज के खिलाफ मत खड़े होइए।"

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पुलिस कार्रवाई के वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। राहुल ने चेतावनी दी कि इन साक्ष्यों के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार से लेकर मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों तक की जवाबदेही तय कराई जाएगी।

महिला कार्यकर्ता का आरोप- गर्दन पकड़ी, थप्पड़ मारे
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक महिला NSUI कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि मंगलवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें बसों में हिरासत में लिया। एक बस में दो छात्राएं और करीब 20-30 अन्य कार्यकर्ता थे।

महिला ने आरोप लगाया कि चंचल यादव नाम की महिला कांस्टेबल ने उनकी गर्दन पकड़कर धक्का दिया, चेहरे और कान के पास नाखूनों से खरोंचा और थप्पड़ मारे।

राहुल ने महिला कार्यकर्ता को 'हमारी शेरनी' बताते हुए कहा कि मारपीट के बावजूद वह डरी नहीं।

थाने में 15-20 पुलिसकर्मियों पर पिटाई का आरोप
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि 5 अक्टूबर को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में 15-20 पुलिसकर्मियों ने उनकी पिटाई की। उन्होंने कांस्टेबल अंकित कसाना पर हिरासत के दौरान लगातार मारपीट करने का आरोप भी लगाया।

खड़गे ने बीजेपी पर साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "पहले वोट चोरी, फिर विरोध के अधिकार की चोरी।" उन्होंने इसे बीजेपी की तानाशाही बताते हुए ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देना बंद करने की मांग की।

हाई कोर्ट में पुलिस कार्रवाई का मामला
इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट में 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। दिल्ली पुलिस ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए। अदालत ने पुलिस को प्रारंभिक आपत्तियां दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित है।

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