राहुल गांधी की हुंकार के बाद दिल्ली में जनसैलाब: SIR धांधली के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का बड़ा प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों के विरोध में इंडिया ब्लॉक ने दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन किया। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए इस मार्च में NSUI, यूथ कांग्रेस और कई राज्यों से आए हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए
देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें आज एक बार फिर बड़े सियासी संग्राम की गवाह बनीं। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में हुई कथित धांधली के गंभीर आरोपों को लेकर इंडिया ब्लॉक (INDIA Alliance) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दिल्ली के ऐतिहासिक और व्यस्त इलाकों में शुमार बाराखंभा रोड से शुरू होकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक निकाले जाने वाले इस विशाल मार्च ने पूरे राजधानी क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की एक बेहद तीखी और हमलावर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुई। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधे तौर पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से समझौता किया जा रहा है और जनता के मताधिकार के साथ खिलवाड़ हो रहा है। राहुल गांधी के इस वक्तव्य के तुरंत बाद विपक्षी खेमे में जबरदस्त ऊर्जा देखने को मिली।
राहुल गांधी के इस सीधे हमले के बाद नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक में शामिल विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर साफ नजर आने लगा। देखते ही देखते बाराखंभा रोड पर कार्यकर्ताओं का एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ दिल्ली के लोकल कार्यकर्ता ही शामिल नहीं थे, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग अपनी आवाज उठाने पहुंचे थे। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा जैसे राज्यों से हजारों की तादाद में कार्यकर्ता बस और ट्रेनों के जरिए दिल्ली पहुंचे और विरोध मार्च का हिस्सा बने।
सड़कों पर उतरी कार्यकर्ताओं की भीड़ के हाथों में भारतीय संविधान की प्रतियां, बड़े-बड़े पोस्टर्स और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग करने वाले बैनर साफ देखे जा सकते थे। पूरे मार्च के दौरान "संविधान बचाओ", "लोकतंत्र की हत्या बंद करो" और "ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो" जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा।
बाराखंभा रोड बना छावनी, दिल्ली पुलिस ने किए कड़े सुरक्षा इंतजाम
विपक्ष के इस सुप्रीम कोर्ट मार्च के ऐलान को देखते हुए दिल्ली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से ही व्यापक तैयारियां कर रखी थीं। दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया। बाराखंभा रोड और सुप्रीम कोर्ट की तरफ जाने वाले तमाम रास्तों पर बहुस्तरीय (मल्टी-लेयर) बैरीकेडिंग की गई। लोहे की कंटीली झाड़ियों वाले बैरिकेड्स, कंक्रीट के ब्लॉक्स और भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते पूरे बाराखंभा रोड इलाके को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया और एक मजबूत छावनी में बदल दिया गया।
जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने जगह-जगह वॉटर कैनन और लाठीधारी जवानों को अलर्ट पर रखा ताकि स्थिति को किसी भी सूरत में बेकाबू होने से रोका जा सके।
चुनावी निष्पक्षता को खत्म करने का आरोप: मुमताज पटेल और विपक्षी नेता
प्रदर्शन के बीच पहुंचे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बनाने का सीधा आरोप लगाया। कांग्रेस नेता मुमताज पटेल, समाजवादी पार्टी के सांसदों और अन्य घटक दलों के नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा होते हैं। अगर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर ही देश की जनता का भरोसा उठ जाएगा, तो लोकतंत्र का ढांचा ही गिर जाएगा।
मुमताज पटेल ने कहा कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के नाम पर जो गड़बड़ियां और धांधली की जा रही हैं, वह देश के करोड़ों मतदाताओं के साथ धोखा है। विपक्षी नेताओं का कहना था कि यह प्रदर्शन किसी एक पार्टी या चुनाव के लिए नहीं है, बल्कि यह देश के संविधान को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष चुनाव आयोग का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहा है और इसी वजह से निष्पक्षता पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और विपक्ष का अड़िग फैसला
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन का रुख भी सामने आया। सर्वोच्च अदालत की ओर से स्पष्ट किया गया कि अदालत सीधे तौर पर इस तरह के राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों या प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात नहीं करती है। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रक्रिया, निर्णय या अधिकारी से विपक्षी दलों को कोई कानूनी आपत्ति है, तो उन्हें सड़कों पर प्रदर्शन करने के बजाय विधिवत याचिका (Petition) दाखिल कर कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बावजूद विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के तेवर बिल्कुल भी ढीले नहीं पड़े। इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मंच से यह साफ कर दिया कि उनकी यह लड़ाई सिर्फ कानूनी दांव-पेच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई बन चुकी है।
विपक्षी नेताओं ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की निष्पक्षता व पारदर्शिता की पूरी गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं। नेताओं का कहना था कि वे संसद से लेकर सड़क तक लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपना यह विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। आने वाले दिनों में इस प्रदर्शन को देश के अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों में भी ले जाने की योजना बनाई जा रही है।

