ज़मीनी हकीकत: सत्य निकेतन हादसे में BJP विधायक का 'PG कनेक्शन'?
सत्य निकेतन हादसे के बाद 'द फ़ेडरल देश' के शो 'ज़मीनी हकीकत' की ग्राउंड रिपोर्ट। MCD की तोड़फोड़, BJP विधायक से जुड़ा PG और DU छात्रों के शोषण का पूरा सच।
Zamini Hakikat: सत्य निकेतन में 6 मंजिला पीजी (PG) इमारत ढहने से हुई तीन छात्रों की मौत ने राजधानी दिल्ली के पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हादसे के बाद 'द फ़ेडरल देश' की टीम ने अपने खास शो 'ज़मीनी हकीकत' के तहत जब ग्राउंड ज़ीरो पर पड़ताल की, तो ऐसे खौफनाक सच सामने आए जो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। एक तरफ नगर निगम (MCD) का हथौड़ा चल रहा है, तो दूसरी तरफ इस जानलेवा पीजी कारोबार में राजनेताओं के रसूख और बेबस छात्रों के खुले शोषण की दास्तान सामने आई है।
'द फ़ेडरल देश' की 'ज़मीनी हकीकत' में जानिए इस पूरे मामले के तीन सबसे बड़े और कड़वे सच, जिन्हें हर किसी को जानना चाहिए:
1. MCD का एक्शन: मशीन नहीं, हाथों से तोड़ी जा रही है खतरनाक इमारत
रविवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन अब नींद से जागा है। सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग के ठीक बगल वाली इमारत को भी एमसीडी ने 'खतरनाक' घोषित कर दिया है और अब उसे ढहाया जा रहा है।
बुलडोजर से डर: चूंकि सत्य निकेतन की गलियां बेहद तंग हैं और बुलडोजर जैसी भारी मशीनों से आसपास की इमारतों के गिरने का खतरा है, इसलिए मजदूर इस छह मंजिला ढांचे को हाथों और हथौड़ों से (मैनुअल) तोड़ रहे हैं।
हवा में झूलता छज्जा: जिस इमारत को तोड़ा जा रहा है, उसके ग्राउंड फ्लोर पर एक केमिस्ट की दुकान थी। इसका ढांचा इतना कमजोर हो चुका था कि उसे सिर्फ लोहे की रॉड का सहारा देकर टिकाया गया था।
व्यापक अभियान: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कर दिया है कि नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई 5 मंजिला अवैध इमारतों को अब बख्शा नहीं जाएगा। सत्य निकेतन के अलावा लक्ष्मी नगर, पांडव नगर और अन्य छात्र-बहुल इलाकों में भी डिमोलिशन (तोड़फोड़) और सीलिंग का अभियान तेज कर दिया गया है।
2. BJP विधायक का आवास और उससे सटा 'रसूखदार' PG
'ज़मीनी हकीकत' की पड़ताल में राजनीतिक संरक्षण का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो एमसीडी की निष्पक्षता पर सीधा सवाल उठाता है। विवादों के केंद्र में है आर.के. पुरम से भाजपा विधायक अनिल कुमार शर्मा के आधिकारिक आवास से सटी हुई एक बहुमंजिला इमारत।
विधायक के घर से जुड़ा गेट: स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि इस ऊंची इमारत में भी पीजी हॉस्टल चलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पीजी का मुख्य गेट सीधे विधायक जी के परिसर की दीवार से जुड़ा हुआ है।
बेसमेंट में अमेज़न का वेयरहाउस: नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इस इमारत के बेसमेंट और स्टिल्ट पार्किंग वाली जगह पर 'अमेज़न फ्रेश' (Amazon Fresh) का एक बड़ा स्टोर और वेयरहाउस चल रहा है, जबकि उसके ऊपर चार मंजिलें तान दी गई हैं।
सिस्टम से सवाल: विधायक ने कैमरे पर सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन वे पहले मान चुके हैं कि उनके रिश्तेदार पीजी व्यवसाय से जुड़े हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सत्ताधारी नेता या उनके परिवार खुद इस अवैध कारोबार का हिस्सा हों, तो क्या एमसीडी का हथौड़ा इन रसूखदार इमारतों तक पहुंच पाएगा? या यह पीला पंजा सिर्फ आम आदमी की इमारतों पर ही गिरेगा?
3. छात्रों की जुबानी: लूटी जाती 'सिक्योरिटी' और कॉकरोच वाला खाना
नेताओं के रसूख और एमसीडी के दिखावटी एक्शन के बीच सबसे ज्यादा वो छात्र पिस रहे हैं, जो अपना घर छोड़कर यहां पढ़ने आते हैं। 'द फ़ेडरल देश' से बातचीत में डीयू की छात्राओं काशिफा और काजल ने पीजी माफिया की जो 'ज़मीनी हकीकत' बताई, वह बेहद डरावनी है:
किराया या खुली लूट? सत्य निकेतन जैसे इलाकों में 4x4 के एक छोटे से डबल या ट्रिपल शेयरिंग कमरे के लिए हर छात्र से 10,000 से 12,000 रुपये वसूले जाते हैं, वह भी बिना खाने के।
सिक्योरिटी मनी की गुंडागर्दी: पीजी मालिक छात्रों से जबरन 11 महीने का एग्रीमेंट करवाते हैं। अगर कोई बच्चा खराब सुविधाओं से तंग आकर एक-दो महीने में रूम छोड़ना चाहे, तो उसकी दो महीने की 'सिक्योरिटी मनी' (करीब 20-25 हजार रुपये) पीजी मालिक डकार जाते हैं।
बीमारी परोसता खाना: 'फूड पीजी' (जहां खाना मिलता है) की हालत और भी खराब है। किचन में साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं होता, वहां कॉकरोच घूमते हैं। बासी और गंदे खाने की वजह से बच्चों को फूड पॉइजनिंग, पेट के गंभीर इंफेक्शन और अपेंडिक्स जैसी बीमारियां हो रही हैं।
घुटन भरे अंधेरे कमरे: कई पीजी में हवा और प्राकृतिक धूप तक नहीं आती। इन घुटन भरे (ग्लूमी) कमरों में रहने से छात्रों की मानसिक और शारीरिक सेहत दांव पर लगी हुई है।
'ज़मीनी हकीकत' का निष्कर्ष:
सत्य निकेतन की घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लालच का नतीजा है। अब जब प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर ही दी है, तो देखना यह होगा कि क्या यह एक्शन सिर्फ कुछ दिनों का दिखावा साबित होगा? या फिर उन रसूखदार पीजी माफियाओं और नेताओं पर भी शिकंजा कसेगा, जो चंद रुपयों के लालच में हमारे देश के भविष्य की जान से खेल रहे हैं। 'द फ़ेडरल देश' की टीम इस पूरे मामले की 'ज़मीनी हकीकत' लगातार आप तक पहुंचाती रहेगी।
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