अपने ही डिजिटल हथियार से घिरी BJP, क्यों हटाए गए अमित मालवीय?
BJP से अमित मालवीय की विदाई और दीपक म्हास्के की एंट्री। छात्र आंदोलनों, Gen-Z के नैरेटिव और नई सोशल मीडिया टीम के पुराने विवादों का इनसाइड एनालिसिस।
Siyasat: जिस डिजिटल हथियार के सहारे भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल की और राज्यों में सरकारें बनाईं, आज वही सोशल मीडिया उसके खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने विश्लेषण किया कि कैसे बीजेपी का सबसे अभेद्य किला माना जाने वाला सोशल मीडिया नेटवर्क ही अब उसके अपने हाथों से फिसलता नजर आ रहा है।
17 अगस्त को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा अपनी नई टीम की घोषणा के साथ ही पिछले 11 सालों से आईटी और सोशल मीडिया सेल का जिम्मा संभाल रहे अमित मालवीय की आधिकारिक विदाई हो गई। उनकी जगह छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता दीपक म्हास्के को नया राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है, जबकि प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को सह-संयोजक (Co-convenors) नियुक्त किया गया है।
अमित मालवीय की छुट्टी: टाइमिंग, 'Gen-Z' का आक्रोश और नैरेटिव की नाकामी
भले ही भाजपा इसे सामान्य संगठनात्मक फेरबदल बता रही हो, लेकिन राजनीति में टाइमिंग सब कुछ बयां करती है। अमित मालवीय को पद से हटाए जाने के पीछे तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
'Gen-Z' छात्र आंदोलनों की आंधी: हालिया छात्र आंदोलनों और पेपर लीक विवाद में Instagram, X और YouTube सिर्फ खबर देने के माध्यम नहीं रहे, बल्कि सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने का औजार बन गए।
क्रॉकोच जनता पार्टी (CJP) और जंतर-मंतर का दबाव: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की विवादित टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके द्वारा गठित 'क्रॉकोच जनता पार्टी' ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स का समर्थन हासिल कर लिया। जंतर-मंतर पर हुए उग्र छात्र प्रदर्शन, गानों, मीम्स और रैप वीडियोज़ के जरिए बने नैरेटिव के आगे सरकार को झुकना पड़ा और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा।
आउटडेटेड प्रचार मॉडल: 2015 से आईटी सेल संभाल रहे अमित मालवीय का एकतरफा राजनीतिक नैरेटिव वाला फॉर्मूला नई पीढ़ी (Gen-Z) के सामने नाकाम साबित हुआ। पुराने दौर में आरक्षण और नेताओं पर की गई अमित मालवीय की विवादित टिप्पणियां भी पार्टी के लिए गले की फांस बनती रही थीं।
ताजपोशी के साथ ही विवादों में घिरी दीपक म्हास्के की नई 'डिजिटल आर्मी'
अमित मालवीय को हटाकर पार्टी ने राहत की सांस ली ही थी कि नई सोशल मीडिया टीम की घोषणा के चंद घंटों के भीतर ही नया बवंडर खड़ा हो गया। दीपक म्हास्के की सह-सहयोगी टीम के नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों ने खुद भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है:
अकाउंट लॉक और पोस्ट्स का गायब होना: नई टीम के ऐलान के तुरंत बाद प्रीति गांधी और आलोक भट्ट के X (ट्विटर) अकाउंट्स की पुरानी पोस्ट सार्वजनिक रूप से दिखनी बंद हो गईं, जबकि अरुण यादव और शिवानंद द्विवेदी के हैंडल ब्लॉक/प्रतिबंधित दिखाई देने लगे।
पुराना विवादित ट्रैक रिकॉर्ड:
अरुण यादव: 2022 में हरियाणा भाजपा आईटी सेल पद से एक पुरानी अमर्यादित पोस्ट के विवाद के चलते हटाए गए थे।
प्रीति गांधी: 2022 में राहुल गांधी की तस्वीर गलत संदर्भ में साझा करने पर पुलिस शिकायत का सामना कर चुकी हैं।
आलोक भट्ट: सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद गलत व्यक्ति की तस्वीर गोल्डी बराड़ के नाम से साझा करने पर फजीहत झेल चुके हैं।
क्या पुराने डिजिटल रिकॉर्ड छिपाना भाजपा को पड़ेगा भारी?
राजनीतिक गलियारों में अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा ने अपने नए सह-संयोजकों की पुरानी आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट्स से होने वाली फजीहत से बचने के लिए खुद ही उन्हें डिलीट या लॉक करवाया है?
आज के डिजिटल युग में इंटरनेट से कुछ भी पूरी तरह मिटाना नामुमकिन है। जिस 'नैरेटिव मैनेजमेंट' की नाकामी के चलते अमित मालवीय की बलि दी गई, यदि नई सोशल मीडिया टीम अपने खुद के ही पुराने ट्रैक रिकॉर्ड से घिरी रहेगी, तो वह युवाओं और डिजिटल स्पेस में भाजपा की खोई हुई विश्वसनीयता को वापस कैसे दिला पाएगी?
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