'सियासत': संसद में धर्मेंद्र प्रधान के नारे, अमित शाह पर बरसा विपक्ष
'दे फ़ेडरल देश' के शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार की रिपोर्ट: पूर्व शिक्षा मंत्री की वापसी पर नारेबाजी, पुलिसिया कार्रवाई और E20 पर गहराया घमासान।
Siyasat: देश भर में NEET पेपर लीक विवाद और 'GenZ' व 'कॉकरोच जनता पार्टी' के लंबे आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भले ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा हो, लेकिन संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत में एक अलग ही नजारा देखने को मिला।
बतौर सांसद संसद परिसर पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने जोरदार स्वागत किया और 'प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगाए। दूसरी तरफ, विपक्षी दलों ने इसे छात्रों का अपमान बताते हुए संसद से लेकर सड़क तक जोरदार हंगामा किया और पुलिसिया बर्बरता को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा।देश भर में नीट (NEET) पेपर लीक विवाद, 'GenZ' और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के लंबे आंदोलन के भारी दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भले ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा हो, लेकिन संसद के मानसून सत्र के दौरान एक अलग ही राजनीतिक तस्वीर देखने को मिली। 'दे फ़ेडरल देश' के विशेष शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने संसद परिसर के अंदर और बाहर के इस पूरे सियासी घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल की।
मानसून सत्र के दूसरे हफ्ते के पहले दिन जब धर्मेंद्र प्रधान बतौर सांसद संसद पहुंचे, तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने उन्हें घेरकर 'प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगाए। दूसरी तरफ, विपक्षी दलों ने इसे आंदोलनकारी छात्रों का अपमान बताते हुए संसद से लेकर सड़क तक जोरदार हंगामा किया और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग की।
बीजेपी सांसदों की नारेबाजी पर भड़का विपक्ष
शो 'सियासत' में एंकर मनीष कुमार ने रेखांकित किया कि पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार हुआ जब किसी छात्र आंदोलन के आगे झुकते हुए मोदी सरकार के इतने ताकतवर मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
लेकिन इसके बावजूद, जब धर्मेंद्र प्रधान संसद परिसर पहुंचे तो बीजेपी सांसदों का उन्हें घेरकर नारेबाजी करना विपक्ष की नजर में संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया। विपक्षी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी सांसद जश्न का माहौल बनाकर देश के लाखों परेशान छात्रों और युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
गृह मंत्री अमित शाह रडार पर: राहुल गांधी ने उठाए तीखे सवाल
दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए संसद के दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों के निशाने पर गृह मंत्री अमित शाह रहे। 20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोलों और पैलेट गन (Pellet Guns) के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष ने अमित शाह से जवाब तलब किया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल दागे:
छात्रों पर एफआईआर: राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि छात्रों पर कोई केस दर्ज नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिसिया कार्रवाई की जा रही है।
छात्राओं के परिवारों को धमकी: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल हुई छात्राओं के परिजनों को फोन कर धमकाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने हक की आवाज उठाने वाले ये युवा देश के आतंकवादी हैं?
संसद में पेश हुआ 'पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक 2026'
'सियासत' शो में इस बात का भी ब्योरा दिया गया कि पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026' पेश कर दिया है। सरकार इस कड़े विधेयक को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की चेतावनियों के बावजूद विपक्ष का विरोध जारी रहा। सरकार का कहना है कि विपक्ष पेपर लीक रोधी कड़े कानून को बनने से रोकने की कोशिश कर रहा है।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी हाई-पावर्ड टास्क फोर्स
एनटीए (NTA) की परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार ने इंफोसिस के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और आधार कार्ड की परिकल्पना करने वाले नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है।
इस कमेटी में तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों को शामिल किया गया है:
नंदन नीलेकणी (अध्यक्ष)
एस. सोमनाथ (पूर्व इसरो चेयरमैन)
तपन डेका (पूर्व आईबी डायरेक्टर)
वी. कामाकोटी (डायरेक्टर, आईआईटी मद्रास)
अनीता करवाल (पूर्व शिक्षा सचिव)
अमृत लाल मीणा (लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट)
यह कमेटी परीक्षा प्रणाली को फुल-प्रूफ और भरोसेमंद बनाने के लिए सरकार को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपेगी।
अब ई-20 (E20) पेट्रोल विवाद से नई मुसीबत
एंकर मनीष कुमार ने 'सियासत' में यह भी उजागर किया कि नीट का मुद्दा अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि सरकार के सामने 'ई-20' (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) का नया संकट खड़ा हो गया है। 'E20 जनता पार्टी' का गठन हो चुका है, जिसने 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया है।
दूसरी ओर, एथेनॉल ब्लेंडिंग के सबसे बड़े पैरवीकार और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ई-20 को लेकर सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे कथित डीपफेक और मानहानिकारक कंटेंट के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
'दे फ़ेडरल देश' के शो 'सियासत' में हुए विश्लेषण से साफ है कि संसद का मानसून सत्र पूरी तरह से टकराव की राह पर है। एक तरफ सरकार कानूनी संशोधनों और एक्सपर्ट कमेटियों के सहारे अपनी साख बचाने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष पुलिसिया बर्बरता, छात्रों पर एफआईआर और नए आर्थिक-नीतिगत मुद्दों को लेकर अमित शाह और पूरी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
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