मोदी के 25 साल बनाम युवाओं का गुस्सा: BJP के सामने 2027 की चुनौती
'सियासत' में मनीष कुमार का विश्लेषण: जानिए कैसे Gen-Z के आक्रोश और पेपर लीक के बाद 'ब्रांड मोदी' को बचाने के लिए BJP चला रही है सेवा संकल्प अभियान।
Siyasat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देश भर में एक व्यापक राजनीतिक और संगठनात्मक जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। इस अवसर पर पार्टी न केवल प्रधानमंत्री का जन्मदिन मना रही है, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर बतौर प्रधानमंत्री उनके सार्वजनिक जीवन व सेवाकाल के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने घर-घर 'आशीर्वाद का दिया' जलाने का आह्वान किया है, वहीं 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देश भर में महीने भर चलने वाला 'सेवा संकल्प अभियान' शुरू किया गया है।
डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फ़ेडरल देश' के खास राजनीतिक विश्लेषण शो 'सियासत' में पत्रकार मनीष कुमार ने इस राष्ट्रव्यापी अभियान, भाजपा की ब्रांड मोदी पर भारी निर्भरता और हालिया छात्र आंदोलनों के बाद बदलते सियासी समीकरणों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
महीने भर का 'सेवा संकल्प अभियान' और राजनीतिक सिम्बॉलिज्म
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री को आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए दीर्घायु होने की कामना की और कार्यकर्ताओं से सेवा कार्यों में जुटने की अपील की। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य जांच कैंप, वृक्षारोपण और वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
विश्लेषण के अनुसार, यह केवल जन्मदिन का पारंपरिक उत्सव नहीं है, बल्कि एक सघन जनसंपर्क अभियान है जिसके केंद्र में पूरी तरह से नरेंद्र मोदी का चेहरा और उनकी 25 साल की प्रशासनिक यात्रा है।
जंतर-मंतर आंदोलन, Gen-Z का आक्रोश और सरकार पर दबाव
शो 'सियासत' में रेखांकित किया गया कि इस वर्ष भारतीय राजनीति में युवाओं (Gen-Z) का एक नया और असरदार उभार देखने को मिला है:
छात्र आंदोलन और इस्तीफे का दबाव: जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और छात्रों के देशव्यापी आंदोलन ने पेपर लीक, बेरोजगारी, लटकी हुई भर्तियों और महंगी शिक्षा के मुद्दे को संसद तक पहुंचा दिया। इसके चलते संसद के मानसून सत्र में सरकार को भारी दबाव का सामना करना पड़ा और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा।
संवाद की नई रणनीति: युवा वर्ग के बढ़ते असंतोष को साधने के लिए ही हाल के दिनों में प्रधानमंत्री को 13 साल बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के एसआरसीसी (SRCC) कॉलेज जाना पड़ा, वडोदरा में युवाओं से संवाद करना पड़ा और सोशल मीडिया पर नए प्रारूपों में सक्रिय होना पड़ा। यहां तक कि आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत को भी मुंबई में युवाओं के बीच सीधा संवाद करना पड़ा।
'प्रेसिडेंशियल मॉडल' का विरोधाभास: जीत का सेहरा तो जवाबदेही किसकी?
रिपोर्ट में भाजपा के चुनाव प्रचार और ब्रांडिंग मॉडल के अंतर्विरोधों पर तीखे सवाल उठाए गए:
चेहरे पर पूरी निर्भरता: 2014 की 'उम्मीद', 2019 का 'मजबूत नेतृत्व' और 2024 की 'मोदी की गारंटी'—भाजपा ने हर छोटे-बड़े चुनाव में स्थानीय चेहरों के बजाय प्रधानमंत्री के नाम पर वोट मांगे हैं।
जवाबदेही का सवाल: जब हर जीत, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना, ट्रेन उद्घाटन और विदेश नीति की सफलता का श्रेय अकेले प्रधानमंत्री को दिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से बेरोजगारी, पेपर लीक और व्यवस्थागत खामियों का सवाल भी सीधे शीर्ष नेतृत्व से पूछा जाता है। इसे केवल संबंधित मंत्रालय के पाले में नहीं डाला जा सकता।
2014 बनाम 2026: बदल चुका है युवा मतदाता
रिपोर्ट के अनुसार, आज का 18-20 साल का युवा 2014 के दौर का मतदाता नहीं है। 2014 में वह महज 6-8 साल का बच्चा था; उसके लिए 'गुजरात मॉडल' अब इतिहास का हिस्सा है। आज का युवा अपने हाथ में स्मार्टफोन लेकर रोजगार, निश्चित परीक्षा कैलेंडर, बेहतर शिक्षा और हॉस्टल की मांग कर रहा है। वह सरकार को अतीत के दावों के बजाय वर्तमान के प्रदर्शन पर आंक रहा है।
2027 की अग्निपरीक्षा और 2029 की राह
भाजपा के पास मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों की लंबी कतार होने के बावजूद, राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश (उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम) को एक सूत्र में बांधने वाला दूसरा कोई सर्वमान्य चुनावी चेहरा नहीं है।
वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश (80 लोकसभा सीटों वाला राज्य) और गुजरात (पीएम का गृह राज्य) सहित सात प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
2027 के ये नतीजे ही यह तय करेंगे कि 2029 के आम चुनाव में 'ब्रांड मोदी' का असर कितना मजबूत रहेगा। यही कारण है कि भाजपा किसी भी कीमत पर इस ब्रांड की चमक को फीका नहीं पड़ने देना चाहती।
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